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सीबीआई ने अनुब्रत मंडल के करीबियों के ठिकानों पर मारा छापा

बोलपुर। पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिला में सीमापार पशु तस्करी घोटाले की जांच कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने बुधवार को तृणमूल कांग्रेस के नेता अनुब्रत मंडल कुछ करीबी सहयोगियों के ठिकानों पर छापा मारा। इस मामले में मंडल को सीबीआई ने पहले ही गिरफ्तार कर लिया है।

सीबीआई अधिकारी मंडल के चार्टर्ड एकाउंटेंट मनोज कोठारी के घर और कार्यालय, तृणमूल पार्षद विश्वजीत बनर्जी के कार्यालय और आवास, तृणमूल कार्यकर्ता सुदीप रॉय और डोलन कुमार डे के बोलपुर स्थित घरों पर तलाशी ले रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि चार्टर्ड एकाउंटेंट कोठारी के अलावा तीन अन्य जेल में बंद श्री मंडल के करीबी हैं। श्री मंडल 11 अगस्त को गिरफ्तार हुए थे और वह न्यायिक हिरासत में हैं।

सूत्रों ने बताया कि फिलहाल सीबीआई ने बोलपुर नगर पालिका के वार्ड 19 के पार्षद विश्वजीत बनर्जी को हिरासत में लिया है। उन्होंने बताया कि सीबीआई अधिकारियों की अलग-अलग टीमों ने सुबह सात बजे से छापेमारी शुरू की।

सीबीआई ने मंडल और उनके परिवार के सदस्यों की चल और अचल संपत्ति का खुलासा किया है, जिसमें उनकी पुत्र का नाम भी शामिल है और अब तक उनके 17 करोड़ रुपए से अधिक के बैंक खातों को जब्त कर लिया है।

उन्होंने बताया कि तीन के नाम, जिनके घरों और कार्यालयों पर छापेमारी की जा रही थी, विभिन्न स्रोतों से आए हैं और तीनों बांग्लादेश में मवेशियों की तस्करी के मामले में भी शामिल हैं।

अजमेर : स्वतंत्रता सेनानी किशन अग्रवाल का अन्तिम संस्कार संपन्न

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अजमेर। राजस्थान के अजमेर में शतायु स्वतंत्रता सेनानी किशन अग्रवाल का आज राजकीय सम्मान के साथ अन्तिम संस्कार कर दिया गया।

अग्रवाल का मंगलवार रात को निधन हो गया था। दिवंगत अग्रवाल की अन्तिम यात्रा शव वाहन पर बैण्ड बाजों के साथ स्थानीय नया बाजार होलीदडा गुजर गवाडी से निकाली गयी। उनकी पार्थिवदेह पर राष्ट्रीय ध्वज था। उनका अन्तिम संस्कार पुष्कर रोड स्थित मोक्षधाम पर किया गया।

प्रशासन की ओर से पुष्पचक्र अर्पित किया गया और पुलिस की टुकडी ने सशस्त्र सलामी दी। इस मौके जिला कलक्टर अंशदीप एवं पुलिस अधीक्षक चूनाराम जाट भी उपस्थित रहे। 1942 के भारत छोडों आन्दोलन में दिवंगत अग्रवाल की अहम भूमिका रही। हाल ही में जिले के प्रभारी मंत्री लालचंद कटारिया ने इनके निवास पहुंचकर तिरंगा फहराया था।

12 जनवरी 1922 को जन्मे अग्रवाल सौ वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके थे। वे अपने पीछे भरापूरा परिवार छोडकर चले गए। परिवार में पत्नि चंदादेवी के अलावा पांच बेटे, पांच बेटियों का भरा पूरा परिवार है।

खरगोन से लापता तीन नाबालिग बहनें अजमेर से बरामद

खरगोन। मध्यप्रदेश के खरगोन जिले के करही क्षेत्र से स्कूल जाने के बाद लापता हुई तीन नाबालिग बहनों को राजस्थान में अजमेर जिले के श्रीनगर में ढूंढ लिया गया है।

खरगोन पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह यादव ने बताया कि 15 और 13 साल की दो सगी और 15 वर्ष की उनकी चचेरी बहन को राजस्थान पुलिस की सहायता से अजमेर जिले के श्रीनगर में सुरक्षित ढूंढ लिया गया है। उन्होंने बताया कि वहां भेजी गई पुलिस टीम शीघ्र ही उन्हें वापस लाएगी और इसके बाद घटना के कारण का पता चल सकेगा।

करही थाना प्रभारी परमानंद गोयल ने बताया कि कल स्कूल के लिए निकली तीनों बहनें घर नहीं लौटी थीं। इसके पश्चात आरंभ हुई खोज में पता चला था कि वह बड़वाह में एक बस से इंदौर गई और वहां से अन्य बस से राजस्थान के लिए निकल गई। उन्होंने बताया कि वह फिलहाल राजस्थान के अजमेर जिले के श्रीनगर में सुरक्षित हैं और पुलिस दल उन्हें लाने पहुंच चुका है।

इस घटनाक्रम के सामने आने के बाद खरगोन पुलिस ने कल रात तीनों बहनों के फोटो समेत जानकारी सोशल मीडिया पर प्रसारित कर उनकी विभिन्न माध्यमों से खोज आरंभ की थी। पुलिस अधीक्षक ने उनका पता देने के लिए दस हजार रुपए का इनाम भी घोषित किया था।

नहीं रहे बिना रक्तपात शीत युद्ध खत्म कराने वाले मिखाइल गोर्बाचेव

मास्को। बीसवीं सदी के सबसे प्रभावशाली राजनेताओं में से एक एवं सोवियत संघ के अंतिम राष्ट्रपति मिखाइल गोर्बाचेव का यहां एक अस्पताल में निधन हो गया है। वह 91 वर्ष के थे।

ग्लासनोस्ट (खुलेपन) और पेरेस्त्रोइका (परिवर्तन) की अवधारणाओं को पेश करने वाले गोर्बाचेव को अमेरिका और रूस के संबंधों में सुधार करने तथा दोनों देशों के बीच शीत युद्ध को शांतिपूर्ण अंत करने का श्रेय जाता है। एबीसी न्यूज के अनुसार गंभीर और लंबे समय से बीमारी से ग्रसित गोर्बाचेव का सेंट्रल क्लिनिकल अस्पताल में निधन हो गया। अस्पताल ने उनके निधन के बारे में मंगलवार को जानकारी दी।

गोर्बाचेव 1985 में सोवियत कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव थे। उन्हें तत्कालीन सोवियत संघ को दुनिया के लिए खोलने और देश में सुधारों का एक सेट पेश करने के लिए याद किया जाता है। वह हालांकि, सोवियत संघ के धीर-धीरे पतन की ओर बढ़ने से रोकने में असमर्थ रहे थे और बाद में आधुनिक रूस का उदय हुआ। दुनियाभर के राजनेताओं ने गोर्बाचेव को श्रद्धांजलि अर्पित की है।

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने गोर्बाचेव के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि मिखाइल गोर्बाचेव एक अलग तरह के राजनेता थे। दुनिया ने एक महान वैश्विक नेता, प्रतिबद्ध बहुपक्षवादी और शांति के अथक पैरोकार को खो दिया है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गोर्बाचेव के निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त की है। यह जानकारी उनके प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने रूसी समाचार एजेंसी इंटरफैक्स तथा बीबीसी को दी है।

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने गोर्बाचेव को दुर्लभ नेता बताया और एक अद्वितीय राजनेता के रूप में प्रशंसा की, जिनके पास शीत युद्ध के तनाव के बीच एक अलग भविष्य को देखने की कल्पना थी।

यूरोपीय संघ के अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयन ने गोर्बाचेव को एक विश्वसनीय और सम्मानित नेता बताया, जिन्होंने स्वतंत्र यूरोप के लिए रास्ता खोलने का काम किया। उन्होंने कहा कि यह विरासत वह है जिसे हम नहीं भूलेंगे।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने गोर्बाचेव को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि वह गोर्बाचेव के साहस और अखंडता की प्रशंसा करते हैं। उन्होंने कहा कि यूक्रेन में पुतिन की आक्रामकता के समय में, सोवियत समाज को खोलने के लिए उनकी अथक प्रतिबद्धता हम सभी के लिए एक उदाहरण है।

बीबीसी ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि गोर्बाचेव 1985 में सोवियत कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव और रूस के वास्तविक नेता बने। उस समय वह 54 वर्ष के थे। गोर्बाचेव को पोलित ब्यूरो के रूप में जानी जाने वाली सत्तारूढ़ परिषद के सबसे कम उम्र के सदस्य बनने का गौरव प्राप्त है। कई उम्रदराज़ नेताओं के बाद कुछ नेताओं का वैश्विक व्यवस्था पर इतना गहरा प्रभाव पड़ा है।

सोवियत अर्थव्यवस्था अमेरिका के साथ बने रहने के लिए वर्षों से संघर्ष कर रही थी और पेरेस्त्रोइका की उनकी नीति ने देश को चलाने वाली प्रणाली में कुछ सुधारों की मांग पेश की थी। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वह हथियारों तक पहुंचे को नियंत्रित करने के लिए अमेरिका के साथ समझौता, पूर्वी यूरोपीय देशों के कम्युनिस्ट शासकों के खिलाफ आवाज उठने पर हस्तक्षेप करने से इनकार करना और अफगानिस्तान में खूनी सोवियत युद्ध को समाप्त करने जैसे महत्वपूर्ण कदम उठाए थे।

बीबीसी के मुताबिक खुलेपन या खुलेपन की गोर्बाचेव की नीति ने लोगों को सरकार की आलोचना करने की अनुमति दी, जो पहले अकल्पनीय थी। इसने देश के कई क्षेत्रों में राष्ट्रवादी भावनाएं भी उजागर हुई, जिसने अंततः देश की स्थिरता को कमजोर कर दिया और इसके पतन का कारण बना। साल 1991 कम्युनिस्ट कट्टरपंथियों द्वारा एक शर्मनाक ढंग से तख्तापलट विफल कोशिश के बाद गोर्बाचेव सोवियत संघ को भंग करने और कार्यालय छोड़ने के लिए सहमत हुए।

गोर्बाचेव को पश्चिमी देशों के साथ रूस के संबंध सुधार के वास्तुकार के रूप में देखा जाता है, जिन्होंने 1991 में शीत युद्ध की समाप्ति के लिए परिस्थितियों का निर्माण किया। सोवियत संघ, अमेरिका और ब्रिटेन सहित पश्चिमी देशों के बीच गहरे तनाव को कम करने की काम किया। उन्हें साल 1990 में पुरस्कार पूर्व-पश्चिम संबंधों में आमूल-चूल परिवर्तन में उनकी प्रमुख भूमिका के लिए नोबेल शांति से सम्मानित किया गया था। लेकिन नए रूस में जो 1991 के बाद उभरा, वह शैक्षिक और मानवीय परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित करते हुए राजनीति से दूर हो गए। श्री गोर्बाचेव ने 1996 में राजनीतिक जीवन में लौटने का प्रयास किया और राष्ट्रपति चुनावों में केवल 0.5 प्रतिशत वोट प्राप्त किया।

पूर्व अमरीकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन की सरकार में विदेश मंत्री के रूप में कार्य करने वाले हेनरी किसिंजर बीबीसी को बताया कि गोर्बाचेव को इतिहास में एक ऐसे व्यक्ति के रूप में याद किया जाएगा, जिसने ऐतिहासिक परिवर्तन शुरू किए, जो मानव जाति और रूसी लोगों के हित में थे।

गोर्बाचेव की सरकार के साथ जर्मनी के संबंध स्थापित करने के मुद्दे पर बातचीत करने वाले जेम्स बेकर ने न्यूयार्क टाइम्स को बताया कि इतिहास मिखाइल गोर्बाचेव को एक ऐसे महान व्यक्ति के रूप में याद रखेगा, जिसने अपने महान राष्ट्र को लोकतंत्र की ओर अग्रसर किया। लेकिन कई रूसियों ने उन्हें उस उथल-पुथल के लिए कभी माफ नहीं किया जो रूस और अमरीका के बीच संधि के बाद देश के पतन का कारण बना। हाल के वर्षों में उनके स्वास्थ्य में गिरावट आई है।

बीबीसी ने ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि जून में, अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने बताया कि वह गुर्दे की बीमारी से पीड़ित है, हालांकि उनकी मृत्यु के कारण की घोषणा नहीं की गई है। रूस की तास समाचार एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि उन्हें मास्को के नोवोडेविची कब्रिस्तान में दफनाया जाएगा, जहां पर कई प्रमुख रूसियों का समाधि स्थल हैं। उन्हें उनकी पत्नी रायसा जिनकी 1999 में ल्यूकेमिया से मृत्यु हो गई थी के बगल में दफनाया जाएगा।

दमोह में एंबुलेंस के नहीं आने के कारण प्रसूता को हाथ ठेले पर ले गया पति

दमोह। मध्यप्रदेश के दमोह जिले में एंबुलेंस के नहीं मिलने के कारण एक पति को अपनी गर्भवती पत्नी को ठेले पर अस्पताल ले जाना पड़ा।

सूत्रों के मुताबिक हटा तहसील अंतर्गत जिला मुख्यालय से 60 किलोमीटर दूर मंगलवार को रनेह ग्राम में एक गर्भवती महिला काजल को एंबुलेंस ना मिलने से उसका पति कैलाश अहिरवाल अपने घर से आरोग्य केंद्र इलाज के लिए हाथ ठेले पर ले गया।

आरोप है कि यहां लगभग दो घंटे तक किसी भी डॉक्टर या नर्स से इलाज ना मिलने के कारण वह तत्काल ही अपनी पत्नी को सिविल अस्पताल लेकर हटा पहुंचा। जहां से उसे दमोह जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।

इस संबंध में कैलाश अहिरवाल ने बताया कि उसकी पत्नी काजल को प्रसव पीड़ा होने पर उसने पहले 108 एंबुलेंस पर कॉल किया, लेकिन दो घंटे तक वाहन की कोई व्यवस्था ना होने पर वह सब्जी बेचने वाले ठेले पर लिटा कर पत्नी को स्थानीय आरोग्य केंद्र ले गया। वहां उसे इलाज नहीं मिला। इसके बाद वह पत्नी को सिविल अस्पताल हटा और बाद में एंबुलेंस के माध्यम से जिला अस्पताल ले कर गया।

सिविल अस्पताल हटा बीएमओ डॉ आरपी कोरी का कहना है कि उन्हें इस संबंध में जानकारी मिली थी। अस्पताल में स्टाफ नहीं मिलने के मामले में संबंधित ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों को नोटिस देकर जांच कराई जा रही है।

हिमाचल में चुनाव से पहले कांग्रेस ने किया 10 गारंटियों का एलान

शिमला। हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। कांग्रेस ने प्रदेश की जनता को 10 गारंटियां देकर चुनावी समर में उतरने का एलान कर दिया है।

हिमाचल प्रदेश कांग्रेस के चुनाव पर्यवेक्षक व छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भुपेश बघेल शिमला में प्रेस वार्ता में यह जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सत्ता में आने बाद पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) बहाल करना, हर घरेलू उपभोक्ताओं को 300 यूनिट तक बिजली मुफ्त देना, 18 से 60 साल की महिलाओं को 1500 रुपए प्रति माह देना, 5 लाख युवाओं को रोजगार देना, फलों के दाम बागवान तय करेंगे, युवाओं के लिए 680 करोड़ का स्टार्टअप फंड, हर गांव में मुफ्त इलाज के लिए मोबाइल क्लीनिक, हर विधानसभा क्षेत्र में चार अंग्रेजी मीडियम स्कूल, गाय भैंस पालकों से हर दिन 10 लीटर दूध खरीदा जाएगा। इसके अलावा गोबर की खरीद दो रुपये प्रति किलो की दर से की जाएगी।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी जो बोलती है वो करती भी है। भाजपा की तरह कांग्रेस जुमलेबाजी नहीं करती है। गौरतलब है कि इससे पहले भी कांग्रेस पार्टी ने पांच एलान कुछ दिन पहले किए थे। उसी में आज पांच एलान और जोड़े गए हैं।

इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा कांग्रेस की घोषणाओं से घबराने लगी है, जबकि अभी तो कांग्रेस पार्टी ने शुरुआत ही की है। पार्टी ने पूरी स्थितियों और आर्थिक आकलन के बाद घोषणा की है। इसलिए भाजपा को फण्ड की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। कांग्रेस पार्टी किसी के आगे हाथ नहीं फैलाएगी जो वादे किए गए हैं पार्टी उन्हें निभाएगी भी।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासित राज्यों में सरकार पहले ही सभी घोषणाओं को लागू कर चुकी है। हिमाचल में भी पूरी की जाएंगी। जिस तरह से केंद्र सरकार ने लोगों पर महंगाई थोपी है उससे जनता की जेब खाली है और कांग्रेस पार्टी लोगों को राहत देने के काम कर रहे हैं। भाजपा गाय के नाम पर वोट गो मांगती है लेकिन सेवा कभी नहीं करते हैं।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार लोगों से गोबर खरीद रही है और कई उत्पाद उससे निर्मित किये जा रहे हैं। यहां तक कि बिजली भी उससे उत्पादित की जा रही है इसलिए हिमाचल में भी लोगों से गोबर खरीदने की गारंटी लोगों को कांग्रेस ने दी है। इस पत्रकार वार्ता के दौरान पार्टी के नेता सचिन पायलट, प्रताप सिंह बाजवा, प्रदेश प्रभारी राजीव शुक्ला, सह प्रभारी संजय दत्त सहित अन्य नेता भी शामिल थे।

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की माता पाओला का निधन

नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की माता पाओला माइनो का निधन हो गया है। कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख जयराम रमेश ने ट्वीट कर सोनिया गांधी के माता जी के निधन की जानकारी देते हुए बताया कि पाओला माइनो का इटली में शनिवार 27 अगस्त को निधन हो गया था।

रमेश ने ट्वीट किया कि सोनिया गांधी की माता पाओला माइनो का शनिवार 27 अगस्त को इटली में उनके घर पर निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार कल किया गया।

छत्तीसगढ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पाओला के निधन पर शोक जताते हुए कहा कि सोनिया गांधी की माता के निधन का दुखद समाचार प्राप्त हुआ। ईश्वर समस्त परिवार को यह दुःख सहने की शक्ति दे।

झारखंड : निलंबित भाजपा नेता सीमा पात्रा 14 दिनों के लिए भेजा जेल

रांची। झारखंड में रांची के अरगोड़ा थाना पुलिस ने नौकरानी के प्रताड़ना के आरोप में पूर्व आईएएस की पत्नी और निलंबित भाजपा नेता सीमा पात्रा को अपर न्यायायुक्त मनीष रंजन की अदालत में बुधवार को पेश किया। कोर्ट ने सुनवाई के बाद आरोपित सीमा पात्रा को 14 दिनों के न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।

इससे पूर्व रांची पुलिस ने बुधवार सुबह सीमा पात्रा को उनके आवास अशोक नगर स्थित रोड नंबर एक से गिरफ्तार किया। गिरफ्तार करने के बाद आरोपित सीमा पात्रा का सदर अस्पताल में मेडिकल चेकअप और कोविड टेस्ट भी हुआ। मेडिकल रिपोर्ट सामान्य आने के बाद आरोपित को अदालत में प्रस्तुत किया गया। इनपर अपने नौकरानी को प्रताड़ित करने का आरोप है।

उल्लेखनीय है कि रिटायर्ड आईएएस की पत्नी और निलंबित भाजपा नेता सीमा पात्रा पर अरगोड़ा थाना में आईपीसी की धारा सहित एससी-एसटी एक्ट के तहत 29 अगस्त को मामला दर्ज किया गया। मामले की जांच के लिए हटिया डीएसपी राजा मित्रा को केस का आईओ बनाया गया।

सीमा पात्रा के अशोक नगर स्थित आवास में लंबे समय से बंधक बनाकर रखी गई एक युवती सुनीता को पुलिस ने 23 अगस्त को मुक्त कराया था। आरोप है कि सीमा पात्रा के घर बीते आठ साल से घरेलू कामकाज के लिए रखी गई युवती को लंबे समय से बुरी तरह प्रताड़ित किया जा रहा था। उसे घर से बाहर तक निकलने नहीं दिया जा रहा था। सीमा पात्रा रिटायर्ड आईएएस महेश्वर पात्रा की पत्नी है।

धीमी ओवर गति के लिए भारत, पाकिस्तान पर लगा जुर्माना

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दुबई। भारत और पाकिस्तान क्रिकेट टीम पर एशिया कप 2022 में रविवार को खेले गए ग्रुप-ए मैच में धीमी ओवर गति के लिये जुर्माना लगाया गया है।

रोहित शर्मा और बाबर आज़म की टीम ने निर्धारित समय में दो-दो ओवर कम डाले थे, जिसके बाद आईसीसी मैच रेफ़री जेफ़ क्रो ने दोनों टीमों पर उनकी मैच फीस का 40 प्रतिशत जुर्माना लगाने का निर्णय लिया।

उल्लेखनीय है कि आईसीसी की खिलाड़ियों और खिलाड़ी सहायक-कर्मी आचार संहिता के अनुच्छेद 2.22 के अनुसार यदि एक टीम निर्धारित समय में एक ओवर कम डालती है, तो खिलाड़ियों पर 20 प्रतिशत मैच फीस जुर्माना लगाया जाता है। भारत और पाकिस्तान ने निर्धारित समय में दो-दो ओवर कम डाले इसलिए दोनों टीमों पर मैच फीस का 40 प्रतिशत जुर्माना लगाया गया।

दोनों कप्तानों ने अपना अपराध मानते हुए जुर्माना स्वीकार किया, जिसके बाद आधिकारिक सुनवाई की आवश्यकता नहीं पड़ी। यह आरोप मैदानी अंपायर मसूदुर रहमान और रुचिरा पिलियागुरुगे, तीसरे अंपायर रवींद्र विमलसिरी और चौथे अंपायर गाज़ी सोहेल ने लगाए थे।

कोटा में जुआ खेलते हुए 10 बदमाशों को पकड़ा

कोटा। राजस्थान में कोटा के जवाहर नगर थाना क्षेत्र में पुलिस ने छापा मारकर ताश के पत्तों से जुआ खेलते हुए 10 लोगों को गिरफ्तार किया है।

पुलिस अधीक्षक (शहर) केसर सिंह शेखावत ने आज बताया कि कल रात्रि जवाहर नगर थाना प्रभारी वासुदेव सिंह को मुखबिरों से इस आशय की सूचना मिली थी कि दादाबाड़ी की आधारशिला कच्ची बस्ती, वक्फ़ कॉलोनी, रामपुरा कोतवाली और अनंतपुरा की बरड़ा बस्ती के कुछ लोग जवाहर नगर में कोटा हवाई अड्डे की चारदीवारी के पास अस्थाई सार्वजनिक रोशनी लगाकर ताश के पत्तों से जुआ खेल रहे हैं।

इसके बाद पुलिस की एक विशेष टीम का डीएसटी टीम के साथ संयुक्त रूप से गठन किया और बताए गए स्थान पर छापा मारकर 10 बदमाशों को ताश के पत्तों से जुआ खेलते हुए मौके से ही गिरफ्तार किया।

पकड़े गए बदमाशों में शाहरुख पठान (26), इरफान (36), वसीम पठान (32), शाहरुख कुरेशी (35), आबिद हुसैन अंसारी (35), शाहनवाज (32), अब्दुल सलाम(50), मोहम्मद शकील (26), शाकिर (32) मोहम्मद अली (35) शामिल है।

पकड़े गए बदमाशों के पास से दो जोड़ी ताश के पत्ते और 79 हजार 800 रुपए नकद बरामद किए हैं। पुलिस ने मौके पर से इन लोगों की छह मोटरसाइकिलों को भी जप्त कर सभी के खिलाफ 13 आरपीजीओ एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया है।