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विधि :
मैदा व मक्की का आटा एक साथ छान लें। नमक और तेल मिलाकर नरम गूंध लें। हॉट सॉस तैयार करने के लिए साबुत लाल मिर्च को पानी में कुछ देर के लिए भिगो दें। फिर मैश कर लें। टमाटरों को 10 मिनट के लिए गर्म पानी में भिगो दें।
फिर छिलका उतारकर मैश कर लें। लहसुन और प्याज को तेल में गुलाबी करें। टमाटर और लाल मिर्च पेस्ट पानी के साथ मिला दें। टमाटर को भून लें। इसमें अजवाइन, नमक और हरा प्याज मिलाकर 7-8 मिनट तक पकाएं।
भरावन तैयार करने के लिए रात भर भीगे राजमा में साबुत लाल मिर्च डालकर उबालें। तेल गरम करके प्याज, लहसुन गुलाबी करें। इसमें राजमा, मक्खन, नमक और दो टे.स्पून हॉट सॉस मिला दें। पांच मिनट पकाकर थोड़ा मैश कर लें। फिर दही को फेंटकर नमक, टबास्को सॉस और क्रीम मिला लें।
गुंधे हुए मैदे की 6-7 पतली रोटियां बेलकर तवे पर धीमी आंच पर पका लें। कैसरोल में ढंककर रख दें। परोसते समय राजमा भरावन गर्म करके रोटी पर फैला दें। ऊपर से थोड़ी हॉट सॉस और थोड़ी सार क्रीम डाल दें।
आज हम आपको एक ऐसे ही किले के बारे में बताएंगे जहां आज भी लड़कियों के चीखने की आवाज आती है। पिछले 150 साल से लोग यहां 7 लड़कियों की चीखे सुन रहे हैं। इस किले के दरवाजे पर 7 लड़कियों की पेटिंग बनी है। ललितपुर के तालबेहट का किला 1850 में मर्दन सिंह ने बनवाया था। राजा मर्दन सिंह ने 1857 की क्रांति में रानी लक्ष्मीबाई का साथ दिया था।तालबेहट के किले को मर्दन सिंह ने अपने पिता प्रहलाद सिंह के लिए बनवाया था।
इतिहासकारों के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन तालबेहट राज्य की 7 लड़कियां राजा मर्दन सिंह के इस किले में नेग मांगने गई थीं। तब राजा के पिता प्रहलाद किले में अकेले थे। लड़कियों की खूबसूरती देखकर उनकी नीयत खराब हो गई और उन्होंने सातों लड़कियों को अपनी हवस का शिकार बना लिया। लड़कियों ने इस घटना से आहत होकर महल के बुर्ज से कूदकर जान दे दी थी।
यहां के स्थानीय निवासियों के मुताबिक आज भी उन 7 पीडि़त लड़कियों की चीखें तालबेहट फोर्ट में सुनाई देती हैं। यह घटना अक्षय तृतीया के दिन हुई थी, इसलिए आज भी यहां यह त्योहार नहीं मनाया जाता।
आपने अक्सर लोगों के मुंह से सुना होगा कि, पैसे क्या पेड़ पर उगते हैं?लेकिन लगता है कि ये कहावत इस जगह बिल्कुल सटीक बैठती है।अगर आप वाकई पैसों का पेड़ देखना चाहते हैं तो आपको इंग्लैंड जाना होगा। इंगलैंड में पैसों का एक पेड़ है जिसमें लोग सदियों से सिक्के गाड़ रहे हैं। इस पेड़ में करीब लाखों सिक्के लगे हुए हैं।इस पेड़ को मिस्ट्री विशिंग ट्री कहते है। अपनी इच्छाओं की पूर्ती के लिए ब्रिटेनवासी इस पेड़ में पैसे डालते थे। इस पेड़ की कहानी की शुरुआत सन 1700 से हुई।
इंगलैंड के स्कॉटिश द्वीप के पीक जिले में यह पेड़ स्थित है। गुड लक पाने की इच्छा में लोग इस पेड़ के दर्शन करने आते हैं। एक मान्यता के अनुसार- त्यौहार एवं खुशियों के मौके पर लोग इसमें सिक्के डालते थे ताकि मन की मुराद पूरी होसके। इस पेड़ में कई बहुमूल्य सिक्के भी है, जिनकी कीमत वर्तमान में अरबों रुपए हैं। इसमें कई देशों के सिक्के देखने को मिल जाएंगे। एक मान्यता के अनुसार इस पेड़ में देवों का वास है।
A unique temple of India whose people are scared of handing their idols
भारत में मंदिरों की अपनी अलग पहचान होती है। आज हम आपको एक ऐसें मंदिर के बारें में बताने जा रहे है जिसमे मंदिर की मूर्तियों को हाथ लगाने से लोग डरते है। छत्तीसगढ के जगदलपुर जिला मुख्यालय से करीब 35 किलोमीटर दूर इंद्रावती नदी के किनारे पर बने शिवमंदिर परिसर में बिखरी पडी 10वीं शताब्दी की मूर्तियों की। इन मूर्तियों को छिंदगांव के ग्रामीण छूने से डरते हैं।
इस गांव के राजा ने 70 साल पहले मूर्तियों को को ना छूने का आदेश सुनाया था। इस मंदिर में राजा का वह आदेश भी मौजूद है जो सागौन की लकड़ी पर खोदकर लिखा गया था, जिसमें अंग्रेजी और हिंदी भाषा में लिखा गया है की “इन मूर्तियों को हटाना, बिगड़ना और तोड़ना सख्त मना है – बाहुक्म बस्तर स्टेट दरबार ! इस आदेश के पास से यहां के लोग ना तो इन मूर्तियों के साथ कोई छेड़छाड़ करते हैं ना ही इन्हें किसी दूसरी जगह स्थापित करते हैं इसी कारण ग्रामीणों ने इन मूर्तियों को संग्रालय में ले जाने का भी विरोध किया।
OMG! The more beautiful it is, the more dangerous it is.
पेड़-पौधे हमारे लिए वरदान है। लेकिन इस धरती पर कुछ पेड़ ऐसे भी होते हैं जो इंसान को जीवन देने के बजाए उसके जीवन के लिए खतरा बन जाते हैं। ऐसे ही पेड़ों में से एक पेड़ है सुसाइड ट्री यानी की सरबेरा ओडोलम नाम का पेड़। ये पेड़ दिखने में जितना सुंदर है उतना ही खतरनाक। ये पेड़ इतना जहरीला है कि चंद मिनटों में इंसान को मौत दे सकता है। भारत सहित दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ अन्य देशों में पाया जाने वाला सरबेरा ओडोलम पेड़ जहरीला और खतरनाक है।
ऐसा माना जाता है कि हर हफ्ते इस पौधे से कम से कम एक व्यक्ति की मौत हो जाती है। शोधकर्ताओं के मुताबिक विश्व में अन्य जहरीले पौधों के मुकाबले सरबेरा ओडोलम अधिक जहरीला है।
इसकी थोड़ी सी मात्रा शरीर में जलन, सिरदर्द, उल्टियां, अनियमित धड़कन और डायरिया जैसी परेशानी खड़ी कर सकता है। इसके इस्तेमाल से कुछ घंटों के अंदर ही इंसान की मृत्यु हो जाती है।
Unique villages of India which are known for their civilization
कहा जाता है की भारत का ह्रदय गाँवों में बसता हैं क्योकि देश से जुडी संस्कृती, कला के नज़ारे गाँवों में ही देखने को मिलते हैं। भारत की अधिकांश जानता गावों में ही रहती हैं। उनमें से भी कुछ गाँव ऐसे हैं जो कि अपने अनोखे अंदाज या विशेषता के लिए जाने जाते हैं। आज हम बताते हैं आपको उन गावों के बारे में जो अपनी विशेषता के लिए जाने जाते हैं…
* मट्टूर :
इस गांव का हर शख्स संस्कृत भाषा में बात करता है। फिर चाहे वो बच्चा हो या बड़ा। यहां के लोग वैदिक जिंदगी जीते हैं। इस गांव को संस्कृत गांव भी कहा जाता है। यहां की पाठशाला में बच्चे पांच साल में भाषा का अध्यन करते हैं।
* झांझड़ा हसनपुर :
यह गांव लोहारू थाना के अंतर्गत आता हैं। इस गांव के लोग पिछले 14 साल के दौरान कभी थाने नहीं गए। यहां के लोगो का मानना हैं कि थाने में जाने के बाद न केवल भाईचारा बिगड़ेगा बल्कि कोर्ट-कचहरी के चक्कर में आर्थिक नुकसान भी होगा।
यहां के लोग कभी दूध या उससे बनने वाली चीज़ो को बेचते नही हैं बल्कि उन लोगों को मुफ्त में दे देते हैं जिनके पास गाय या भैंस नहीं हैं। श्वेत क्रांति के लिए प्रसिद्ध ये गाँव दूध दही ऐसे ही बाँट देता है, यहां पर रहने वाले एक पुजारी बताते हैं की उन्हें महीने में करीब 7,500 रुपए का दूध गाँव से मुफ्त में मिलता है।
* शनि शिन्ग्नापुर :
महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के नेवासा तालुके में शनि शिन्ग्नापुर भारत का एक ऐसा गाँव है जहाँ लोगों के घर में एक भी दरवाजा नही है यहाँ तक की लोगों की दुकानों में भी दरवाजे नही हैं, यहाँ पर कोई भी अपनी बहुमूल्य चीजों को ताले चाबी में बंद करके नहीं रखता फिर भी गाँव में आज तक कभी कोई चोरी नही हुई।
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के अति दुर्गम इलाके में स्तिथ है मलाणा गाँव। इसे आप भारत का सबसे रहस्यमयी गाँव कह सकते है। यहाँ के निवासी खुद को सिकंदर के सैनिकों का वंशज मानते हैं। यहां पर भारतीय क़ानून नहीं चलते है यहाँ की अपनी संसद है जो सारे फैसले करती है। मलाणा भारत का इकलौता गांव है जहाँ मुग़ल सम्राट अकबर की पूजा की जाती है।
राजस्थान एक बेहद ही खूबसूरत जगह है, जिसे देखने के लिए दुनिया भर से लोग यहां आते हैं| राजस्थान में कई खूबसूरत जगहें हैं, जैसे जयपुर,जोधपुर ,उदयपुर, माउंट आबू, बूंदी आदि| अगर राजस्थान की संस्कृति को करीब से जानना चाहते हैं, यहां ट्राइबल क्षेत्रों की सैर करें| गांव ठिकार्दा बूंदी से आठ किमी की दूरी पर स्थित यह गांव मिट्टी के बर्तनों और मिट्टी की सजावट के सामान बनाने के लिए जाना जाता है| इस गांव के घर आज भी मिट्टी के बने हुए, जिन्हें गोबर और मिट्टी से रंगा जाता है|
सभी घरों में मिट्टी के बर्तन बनाने का काम होता है| इस गांव में रात में रुकने की व्यवस्था नहीं है| इसीलिए पुराने परिवेश को जानकर शाम को वापस बूंदी आ सकते हैं|
इस छोटे से गांव के लोग बहुत ही सीधे हैं, जैसे ही आप इस गांव में पहुंचेगे, यहां के लोग आपका अतिथि सत्कार करने के बाद आपके साथ मिट्टी के बर्तन बनाना भी पसंद करते हैं| उनके यहां के खाने को चख सकते हैं|
Carrie Fisher, Leonard Cohen, posthumous Grammy Award
न्यूयॉर्क| अभिनेत्री कैरी फिशर और गायक लियोनार्ड कोहेन को मरणोपरांत 2018 ग्रैमी पुरस्कारों से नवाजा गया है।
वेबसाइट ‘डेलीमेल डॉट को डॉट यूके’ के मुताबिक, ‘स्टार वार्स’ श्रृंखला की फिल्मों के लिए जानी जाने वाली फिशर ने रविवार रात यहां ‘द प्रिंसेस डायरिस्ट’ के लिए पहला ग्रैमी पुरस्कार जीता। फिशर का 27 दिसंबर 2016 को देहांत हो गया था। दिग्गज कनाडाई गायक कोहेन जिनका पिछले साल नवंबर में 83 साल की उम्र में निधन हो गया था, उन्हें ‘यू वॉन्ट इट डार्कर’ के लिए सर्वश्रेष्ठ रॉक प्रस्तुति का पुरस्कार मिला। फिशर की बेटी बिली लुअर्ड (25) ने अपनी मां के साथ की एक तस्वीर साझा करते हुए भावुक पोस्ट किया।
उन्होंने लिखा, प्रिंसेस डायरिस्ट’ अंतिम पेशेवर काम था, जो मैंने और मेरी मां ने साथ किया। काश वह मेरे साथ रेड कॉर्पेट पर फूलों के काम वाले परिधान में सजी मौजूद होती, लेकिन हम इसका जश्न कैरी स्टाइल में मनाएंगे। टीवी के सामने बिस्तर में कोल्ड कोका कोला और गर्म ई-सिगरेट के साथ। मुझे बेहद गर्व है।
Rajasthan by-election: voting in Ajmer, Alwar, Mandalgarh
जयपुर। राजस्थान में दो लोकसभा सीट अलवर और अजमेर तथा मांडलगढ़ विधानसभा सीट पर सोमवार को हुए उपचुनाव के दौरान रिकॉर्ड मतदान हुआ। अजमेर में 65.33 फीसदी, अलवर में 62.08 फीसदी मतदान दर्ज किया गया। मांडलगढ़ में भी रिकॉर्ड 78.74 प्रतिशत वोट पड़े। रिकॉर्ड मतदान से राजनीतिक दलों में उत्साह देखा जा रहा है।
अलवर व अजमेर के सांसद तथा मांडलगढ़ के विधायक की मृत्यु हो जाने के बाद सोमवार को यहां पुन: मतदान कराया गया। सत्तारूढ़ बीजेपी तथा सत्ता में आने की राह देख रही कांग्रेस ने उपचुनावों में मतदाताओं को रूझाने के लिए दिनरात एक कर दिए थे।
अजमेर लोकसभा सीट पर कांग्रेस के डॉ. रधु शर्मा और बीजेपी के रामस्वरूप लांबा के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिला। अलवर लोकसभा सीट से डॉ. करण सिंह यादव (कांग्रेस) और डॉ. जसवंत यादव (बीजेपी) तथा मांडलगढ विधानसभा सीट पर भी बीजेपी-कांग्रेस में सीधा मुकाबला दिखाई दिया। मांडलगढ से बीजेपी के शक्ति सिंह और कांग्रेस के विवेक धाकड मैदान में हैं।
अलवर में 11, अजमेर में 23 और मांडलगढ़ में 8 उम्मीदवार मैदान में किस्मत आजमा रहे हैं। इन सभी का भाग्य मतदाताओं ने ईवीएम मशीन में बंद कर दिया है। एक फरवरी को मतगणना होगी।
जैसा कि राजपूत समुदाय ने खुलकर कांग्रेस को तीनों सीटों पर समर्थन देने की बात कही है, ऐसे में ये उपचुनाव भारतीय जनता पार्टी सरकार के लिए अग्निपरीक्षा की तरह है।
इन उपचुनावों में जातीय समीकरण भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। अलवर में दो यादव उम्मीदवार, अजमेर और मंडलगढ़ में क्रमश: जाट और ब्राह्मण उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं।
ये तीनों सीटें भाजपा के पास थीं, और सांसदों और विधायक के निधन के कारण यहां उपचुनाव कराने पड़े हैं। अजमेर के सांसद सांवर लाल जाट का पिछले साल नौ अगस्त को देहांत हो गया था, जबकि अलवर के सांसद महंत चंद नाथ का 17 सितंबर को देहांत हो गया था। वहीं, भाजपा की मंडलगढ़ क्षेत्र की विधायक कीर्ति कुमारी का स्वाइन फ्लू के चलते 28 अगस्त को निधन हो गया था।