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सोम प्रदोष व्रत परिचय एवं विस्तृत विधि

प्रत्येक चन्द्र मास की त्रयोदशी तिथि के दिन प्रदोष व्रत रखने का विधान है। यह व्रत कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष दोनों को किया जाता है। सूर्यास्त के बाद के 2 घण्टे 24 मिनट का समय प्रदोष काल के नाम से जाना जाता है। प्रदेशों के अनुसार यह बदलता रहता है। सामान्यत: सूर्यास्त से लेकर रात्रि आरम्भ तक के मध्य की अवधि को प्रदोष काल में लिया जा सकता है।

ऐसा माना जाता है कि प्रदोष काल में भगवान भोलेनाथ कैलाश पर्वत पर प्रसन्न मुद्रा में नृ्त्य करते हैं। जिन जनों को भगवान श्री भोलेनाथ पर अटूट श्रद्धा विश्वास हो, उन जनों को त्रयोदशी तिथि में पडने वाले प्रदोष व्रत का नियम पूर्वक पालन कर उपवास करना चाहिए।

यह व्रत उपवासक को धर्म, मोक्ष से जोडने वाला और अर्थ, काम के बंधनों से मुक्त करने वाला होता है। इस व्रत में भगवान शिव की पूजन किया जाता है। भगवान शिव कि जो आराधना करने वाले व्यक्तियों की गरीबी, मृ्त्यु, दु:ख और ऋणों से मुक्ति मिलती है।

प्रदोष व्रत की महत्ता

शास्त्रों के अनुसार प्रदोष व्रत को रखने से दौ गायों को दान देने के समान पुन्य फल प्राप्त होता है। प्रदोष व्रत को लेकर एक पौराणिक तथ्य सामने आता है कि एक दिन जब चारों और अधर्म की स्थिति होगी, अन्याय और अनाचार का एकाधिकार होगा, मनुष्य में स्वार्थ भाव अधिक होगी तथा व्यक्ति सत्कर्म करने के स्थान पर नीच कार्यो को अधिक करेगा।

उस समय में जो व्यक्ति त्रयोदशी का व्रत रख, शिव आराधना करेगा, उस पर शिव कृ्पा होगी. इस व्रत को रखने वाला व्यक्ति जन्म- जन्मान्तर के फेरों से निकल कर मोक्ष मार्ग पर आगे बढता है, उसे उतम लोक की प्राप्ति होती है।

व्रत से मिलने वाले फल

अलग- अलग वारों के अनुसार प्रदोष व्रत के लाभ प्राप्त होते हैं।

जैसे सोमवार के दिन त्रयोदशी पडने पर किया जाने वाला वर्त आरोग्य प्रदान करता है। सोमवार के दिन जब त्रयोदशी आने पर जब प्रदोष व्रत किया जाने पर, उपवास से संबन्धित मनोइच्छा की पूर्ति होती है। जिस मास में मंगलवार के दिन त्रयोदशी का प्रदोष व्रत हो, उस दिन के व्रत को करने से रोगों से मुक्ति व स्वास्थ लाभ प्राप्त होता है एवं बुधवार के दिन प्रदोष व्रत हो तो, उपवासक की सभी कामना की पूर्ति होने की संभावना बनती है।

गुरु प्रदोष व्रत शत्रुओं के विनाश के लिए किया जाता है। शुक्रवार के दिन होने वाल प्रदोष व्रत सौभाग्य और दाम्पत्य जीवन की सुख-शान्ति के लिए किया जाता है। अंत में जिन जनों को संतान प्राप्ति की कामना हो, उन्हें शनिवार के दिन पडने वाला प्रदोष व्रत करना चाहिए। अपने उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए जब प्रदोष व्रत किए जाते हैं तो व्रत से मिलने वाले फलों में वृ्द्धि होती है।

व्रत विधि

सुबह स्नान के बाद भगवान शिव, पार्वती और नंदी को पंचामृत और जल से स्नान कराएं। फिर गंगाजल से स्नान कराकर बेल पत्र, गंध, अक्षत (चावल), फूल, धूप, दीप, नैवेद्य (भोग), फल, पान, सुपारी, लौंग और इलायची चढ़ाएं। फिर शाम के समय भी स्नान करके इसी प्रकार से भगवान शिव की पूजा करें। फिर सभी चीजों को एक बार शिव को चढ़ाएं।

इसके बाद भगवान शिव की सोलह सामग्री से पूजन करें। बाद में भगवान शिव को घी और शक्कर मिले जौ के सत्तू का भोग लगाएं। इसके बाद आठ दीपक आठ दिशाओं में जलाएं। जितनी बार आप जिस भी दिशा में दीपक रखेंगे, दीपक रखते समय प्रणाम जरूर करें। अंत में शिव की आरती करें और साथ ही शिव स्त्रोत, मंत्र जाप करें। रात में जागरण करें।

प्रदोष व्रत समापन पर उद्धापन

इस व्रत को ग्यारह या फिर 26 त्रयोदशियों तक रखने के बाद व्रत का समापन करना चाहिए. इसे उद्धापन के नाम से भी जाना जाता है।

उद्धापन करने की विधि

इस व्रत को ग्यारह या फिर 26 त्रयोदशियों तक रखने के बाद व्रत का समापन करना चाहिए. इसे उद्धापन के नाम से भी जाना जाता है।

इस व्रत का उद्धापन करने के लिए त्रयोदशी तिथि का चयन किया जाता है। उद्धापन से एक दिन पूर्व श्री गणेश का पूजन किया जाता है। पूर्व रात्रि में कीर्तन करते हुए जागरण किया जाता है. प्रात: जल्द उठकर मंडप बनाकर, मंडप को वस्त्रों या पद्म पुष्पों से सजाकर तैयार किया जाता है। ऊं उमा सहित शिवाय नम: मंत्र का एक माला अर्थात 108 बार जाप करते हुए, हवन किया जाता है. हवन में आहूति के लिए खीर का प्रयोग किया जाता है।

हवन समाप्त होने के बाद भगवान भोलेनाथ की आरती की जाती है। और शान्ति पाठ किया जाता है. अंत: में दो ब्रह्माणों को भोजन कराया जाता है तथा अपने सामर्थ्य अनुसार दान दक्षिणा देकर आशिर्वाद प्राप्त किया जाता है।

सोम प्रदोष व्रत

सूत जी बताने लगे- सोम त्रयोदशी प्रदोष व्रत से शिव-पार्वती प्रसन्न होते हैं । व्रती के समस्त मनोरथ पूर्ण होते हैं।

व्रत कथा

एक नगर में एक ब्राह्मणी रहती थी। उसके पति का स्वर्गवास हो गया था। उसका अब कोई आश्रयदाता नहीं था, इसलिए प्रातः होते ही वह अपने पुत्र के साथ भीख मांगने निकल पड़ती थी। भिक्षाटन से ही वह स्वयं व पुत्र का पेट पालती थी।

एक दिन ब्राह्मणी घर लौट रही थी तो उसे एक लड़का घायल अवस्था में कराहता हुआ मिला। ब्राह्मणी दयावश उसे अपने घर ले आई। वह लड़का विदर्भ का राजकुमार था। शत्रु सैनिकों ने उसके राज्य पर आक्रमण कर उसके पिता को बन्दी बना लिया था और राज्य पर नियंत्रण कर लिया था, इसलिए वह मारा-मारा फिर रहा था। राजकुमार ब्राह्मण-पुत्र के साथ ब्राह्मणी के घर रहने लगा। एक दिन अंशुमति नामक एक गंधर्व कन्या ने राजकुमार को देखा और उस पर मोहित हो गई। अगले दिन अंशुमति अपने माता-पिता को राजकुमार से मिलाने लाई। उन्हें भी राजकुमार भा गया। कुछ दिनों बाद अंशुमति के माता-पिता को शंकर भगवान ने स्वप्न में आदेश दिया कि राजकुमार और अंशुमति का विवाह कर दिया जाए। उन्होंने वैसा ही किया। ब्राह्मणी प्रदोष व्रत करती थी। उसके व्रत के प्रभाव और गंधर्वराज की सेना की सहायता से राजकुमार ने विदर्भ से शत्रुओं को खदेड़ दिया और पिता के राज्य को पुनः प्राप्त कर आनन्दपूर्वक रहने लगा। राजकुमार ने ब्राह्मण-पुत्र को अपना प्रधानमंत्री बनाया। ब्राह्मणी के प्रदोष व्रत के माहात्म्य से जैसे राजकुमार और ब्राह्मण-पुत्र के दिन फिरे, वैसे ही शंकर भगवान अपने दुसरे भक्तों के दिन भी फेरते हैं।

प्रदोषस्तोत्रम्

।। श्री गणेशाय नमः।।

जय देव जगन्नाथ जय शङ्कर शाश्वत । जय सर्वसुराध्यक्ष जय सर्वसुरार्चित ॥ १॥

जय सर्वगुणातीत जय सर्ववरप्रद ।
जय नित्य निराधार जय विश्वम्भराव्यय ॥ २॥

जय विश्वैकवन्द्येश जय नागेन्द्रभूषण ।
जय गौरीपते शम्भो जय चन्द्रार्धशेखर ॥ ३॥

जय कोट्यर्कसङ्काश जयानन्तगुणाश्रय । जय भद्र विरूपाक्ष जयाचिन्त्य निरञ्जन ॥ ४॥

जय नाथ कृपासिन्धो जय भक्तार्तिभञ्जन । जय दुस्तरसंसारसागरोत्तारण प्रभो ॥ ५॥

प्रसीद मे महादेव संसारार्तस्य खिद्यतः । सर्वपापक्षयं कृत्वा रक्ष मां परमेश्वर ॥ ६॥

महादारिद्र्यमग्नस्य महापापहतस्य च । महाशोकनिविष्टस्य महारोगातुरस्य च ॥ ७॥

ऋणभारपरीतस्य दह्यमानस्य कर्मभिः । ग्रहैः प्रपीड्यमानस्य प्रसीद मम शङ्कर ॥ ८॥

दरिद्रः प्रार्थयेद्देवं प्रदोषे गिरिजापतिम् । अर्थाढ्यो वाऽथ राजा वा प्रार्थयेद्देवमीश्वरम् ॥ ९॥

दीर्घमायुः सदारोग्यं कोशवृद्धिर्बलोन्नतिः ।
ममास्तु नित्यमानन्दः प्रसादात्तव शङ्कर ॥ १०॥

शत्रवः संक्षयं यान्तु प्रसीदन्तु मम प्रजाः । नश्यन्तु दस्यवो राष्ट्रे जनाः सन्तु निरापदः ॥ ११॥

दुर्भिक्षमरिसन्तापाः शमं यान्तु महीतले । सर्वसस्यसमृद्धिश्च भूयात्सुखमया दिशः ॥ १२॥

एवमाराधयेद्देवं पूजान्ते गिरिजापतिम् । ब्राह्मणान्भोजयेत् पश्चाद्दक्षिणाभिश्च पूजयेत् ॥ १३॥

सर्वपापक्षयकरी सर्वरोगनिवारणी । शिवपूजा मयाऽऽख्याता सर्वाभीष्टफलप्रदा ॥ १४॥

॥ इति प्रदोषस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥

कथा एवं स्तोत्र पाठ के बाद महादेव जी की आरती करें

ताम्बूल, दक्षिणा, जल -आरती 

तांबुल का मतलब पान है। यह महत्वपूर्ण पूजन सामग्री है। फल के बाद तांबुल समर्पित किया जाता है। ताम्बूल के साथ में पुंगी फल (सुपारी), लौंग और इलायची भी डाली जाती है। दक्षिणा अर्थात् द्रव्य समर्पित किया जाता है। भगवान भाव के भूखे हैं। अत: उन्हें द्रव्य से कोई लेना-देना नहीं है। द्रव्य के रूप में रुपए, स्वर्ण, चांदी कुछ भी अर्पित किया जा सकता है।

आरती पूजा के अंत में धूप, दीप, कपूर से की जाती है। इसके बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। आरती में एक, तीन, पांच, सात यानि विषम बत्तियों वाला दीपक प्रयोग किया जाता है।

भगवान शिव जी की आरती

ॐ जय शिव ओंकारा,भोले हर शिव ओंकारा।
ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥ ॐ हर हर हर महादेव…॥

एकानन चतुरानन पंचानन राजे।
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥ ॐ हर हर हर महादेव..॥

दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।
तीनों रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥ ॐ हर हर हर महादेव..॥

अक्षमाला बनमाला मुण्डमाला धारी।
चंदन मृगमद सोहै भोले शशिधारी ॥ ॐ हर हर हर महादेव..॥

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥ ॐ हर हर हर महादेव..॥

कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता।
जगकर्ता जगभर्ता जगपालन करता ॥ ॐ हर हर हर महादेव..॥

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर के मध्ये ये तीनों एका ॥ ॐ हर हर हर महादेव..॥

काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठि दर्शन पावत रुचि रुचि भोग लगावत महिमा अति भारी ॥ ॐ हर हर हर महादेव..॥

लक्ष्मी व सावित्री, पार्वती संगा ।
पार्वती अर्धांगनी, शिवलहरी गंगा ।। ॐ हर हर हर महादेव..।।

पर्वत सौहे पार्वती, शंकर कैलासा।
भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा ।। ॐ हर हर हर महादेव..।।

जटा में गंगा बहत है, गल मुंडल माला।
शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला ।। ॐ हर हर हर महादेव..।।

त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे ॥ ॐ हर हर हर महादेव..॥

ॐ जय शिव ओंकारा भोले हर शिव ओंकारा
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अर्द्धांगी धारा ।। ॐ हर हर हर महादेव।।

कर्पूर आरती

कर्पूरगौरं करुणावतारं, संसारसारम् भुजगेन्द्रहारम्।
सदावसन्तं हृदयारविन्दे, भवं भवानीसहितं नमामि॥

मंगलम भगवान शंभू
मंगलम रिषीबध्वजा ।
मंगलम पार्वती नाथो
मंगलाय तनो हर ।।

मंत्र पुष्पांजलि

मंत्र पुष्पांजलि मंत्रों द्वारा हाथों में फूल लेकर भगवान को पुष्प समर्पित किए जाते हैं तथा प्रार्थना की जाती है। भाव यह है कि इन पुष्पों की सुगंध की तरह हमारा यश सब दूर फैले तथा हम प्रसन्नता पूर्वक जीवन बीताएं।

ॐ यज्ञेन यज्ञमयजंत देवास्तानि धर्माणि प्रथमान्यासन्।

ते हं नाकं महिमान: सचंत यत्र पूर्वे साध्या: संति देवा:

ॐ राजाधिराजाय प्रसह्ये साहिने नमो वयं वैश्रवणाय कुर्महे स मे कामान्कामकामाय मह्यम् कामेश्वरो वैश्रवणो ददातु।
कुबेराय वैश्रवणाय महाराजाय नम:

ॐ स्वस्ति साम्राज्यं भौज्यं स्वाराज्यं वैराज्यं
पारमेष्ठ्यं राज्यं माहाराज्यमाधिपत्यमयं समंतपर्यायी सार्वायुष आंतादापरार्धात्पृथिव्यै समुद्रपर्यंता या एकराळिति तदप्येष श्लोकोऽभिगीतो मरुत: परिवेष्टारो मरुत्तस्यावसन्गृहे आविक्षितस्य कामप्रेर्विश्वेदेवा: सभासद इति।

ॐ विश्व दकचक्षुरुत विश्वतो मुखो विश्वतोबाहुरुत विश्वतस्पात संबाहू ध्यानधव धिसम्भत त्रैत्याव भूमी जनयंदेव एकः।
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि
तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥

नाना सुगंध पुष्पांनी यथापादो भवानीच
पुष्पांजलीर्मयादत्तो रुहाण परमेश्वर
ॐ भूर्भुव: स्व: भगवते श्री सांबसदाशिवाय नमः। मंत्र पुष्पांजली समर्पयामि।।

प्रदक्षिणा

नमस्कार, स्तुति -प्रदक्षिणा का अर्थ है परिक्रमा। आरती के उपरांत भगवन की परिक्रमा की जाती है, परिक्रमा हमेशा क्लॉक वाइज (clock-wise) करनी चाहिए। स्तुति में क्षमा प्रार्थना करते हैं, क्षमा मांगने का आशय है कि हमसे कुछ भूल, गलती हो गई हो तो आप हमारे अपराध को क्षमा करें।

यानि कानि च पापानि जन्मांतर कृतानि च। तानि सवार्णि नश्यन्तु प्रदक्षिणे पदे-पदे।।

अर्थ: जाने अनजाने में किए गए और पूर्वजन्मों के भी सारे पाप प्रदक्षिणा के साथ-साथ नष्ट हो जाए।

सबगुरु राशिफल : 25 जुलाई सोमवार को आपके भाग्य में क्या होगा बदलाव

सबगुरु न्यूज। सावन मास, कृष्ण पक्ष, द्वादशी तिथि, वार सोमवार, सम्वत 2079, वर्षा ऋतु, रवि दक्षिणायन, शाम 04.16 बजे बाद त्रयोदशी तिथि प्रारम्भ।

मेष (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)

आज का दिन आशा से कुछ कम लाभ देगा फिर भी आवश्यकताओं की पूर्ति आसानी से कर लेंगे। नौकरी पेशा एवं व्यवसायी वर्ग को आज अतिरिक्त कार्य करना पड़ेगा इसका लाभ भी जल्द ही मिल जाएगा। व्यापार में वृद्धि होगी लेकिन आर्थिक लाभ के लिए थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा। आज आपसे या किसी निकटस्थ से कुछ नुकसान भी हो सकता है जिसका सीधा असर धन और व्यवसाय पर भी पड़ेगा। सामाजिक व्यवहार पहले से अधिक बनेंगे परन्तु इनमें से अधिकांश लाभ की जगह खर्च ही करवाएंगे। परिवार में सुख शांति रहेगी बीच में किसी गलतफहमी के कारण मामूली नारजगी रह सकती है। संध्या का समय थकान वाला रहेगा फिर भी सुख से बिताएंगे।

वृष (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)

आज का दिन भी सावधानी से व्यतीत करें। कार्य क्षेत्र पर प्रतिस्पर्धी आपको क्षति पहुंचाने के लिए कुछ भी कर सकते है। घर में भी किसी की चुगली का शिकार बनना पड़ेगा जिससे कुछ समय के लिए माहौल खराब होगा लेकिन शीघ्र ही स्थिति स्पष्ट होने से शांति स्थापित हो जाएगी। आध्यात्म में रुचि रहेगी साथ ही आडम्बर भी रहने से प्राप्ति न्यून रहेगी। आज अपने कार्य छोड़ अन्य की समस्या सुलझाने में स्वयं का नुकसान कर लेंगे जिसकी भरपाई बाद में असंभव ही रहेगी। परिवार अथवा रिश्तेदारी में विवाह अथवा अन्य मांगलिक आयोजन पर खर्च करने पड़ेंगे। महिलाएं किसी ना किसी कारण से नाराज रहेंगी।

मिथुन (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)

आज के दिन धन लाभ आपके व्यवहार के ऊपर काफी हद तक निर्भर रहेगा। स्वभाव में चंचलता ना आने दे लक्ष्य के प्रति दृढ़ रहें आशा से अधिक लाभ हो सकता है। व्यवसायी वर्ग व्यवसाय में तेजी रहने से उत्साहित रहेंगे। व्यस्तता भी अन्य दिनों की अपेक्षा अधिक रहेगी। नए कार्यो का विचार बना कर रखें जल्द ही इस पर काम करना पड़ेगा। कार्य क्षेत्र पर अधीनस्थों के कारण थोड़ी असुविधा बनेगी फिर भी स्थिति संभाल लेंगे। दाम्पत्य जीवन मे खुशिया बढ़ेंगी महिलाएं मानसिक रूप से चंचल फिर भी आर्थिक एवं अन्य कारणों से सहयोगी रहेंगी। आकस्मिक यात्रा के योग बन सकते हैं। संभव हो तो टालें वरना उचित लाभ से वंचित रह सकते है।

कर्क (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)

आज आपकी समस्त दिनचर्या अस्त-व्यस्त रहेगी। जिस भी कार्य मे हाथ डालेंगे उसमे असफलता मिलेगी अथवा विलंब होगा। आज लोभ अथवा किसी दुर्व्यसन के कारण सामाजिक क्षेत्र पर मान भंग हो सकता है। घर परिवार में भाई बंधुओं से मतांतर के कारण तीखी झड़प होगी। आज आपका पक्ष लेने वाला कोई नहीं मिलेगा ना ही व्यवसाय में ही किसी का उचित सहयोग मिल सकेगा। महिलाएं घरेलू कार्यो से परेशानी अनुभव करेंगी इसके विपरीत मनोरंजन पर अधिक ध्यान देंगी जिससे कुछ हानि भी हो सकती है। बाहर घूमने अथवा किसी समारोह के निमंत्रण में जाने की योजना बनाएंगे परन्तु यहां भी वैर विरोध का सामना करना पड़ेगा।

सिंह (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)

आज का दिन भी आपकी कीर्ति में वृद्धि करने वाला रहेगा। दिन के आरंभ में पुराने कार्य निपटाने में व्यस्त रहेंगे शीघ्र ही अन्य अनुबंध मिलने से आर्थिक पक्ष मजबूत होगा। सामाजिक व्यवहारों से भी आज जम कर लाभ उठाएंगे। मध्यान के समय कार्य क्षेत्र पर सुस्ती रहेगी परन्तु संध्या से व्यस्तता बढ़ जाएगी। आज किसी अपरिचित को उधार ना दें निश्चित ही डूबेगा। सरकारी अथवा अन्य महत्त्वपूर्ण कार्य ले देकर आज पूर्ण करने का प्रयास करें लाभदायक रहेगा इसके बाद परिस्तितियों में बदलाव आने से कार्य सफलता में संदेह रहेगा। पारिवारिक वातावरण में आनंद मंगल रहेगा आज मांगलिक कार्यकर्मो में भी व्यस्त रहेंगे इनपर खर्च भी करना पड़ेगा।

कन्या (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)

आज का दिन भी कार्यो में सफलता दिलाने वाला रहेगा फिर भी अतिआवश्यक कार्यो को आज ही पूर्ण करने का प्रयास करें बाद में स्थिति प्रतिकूल बनने वाली है। दिन का आरंभ किसी शुभ समाचार की प्राप्ति से होगा। महिलाएं आज पुरुषों की अपेक्षा अधिक शांत रहेंगी। घरेलू वातावरण को क्लेश मुक्त रखने में महत्त्वपूर्ण योगदान देंगी। आज आपको पैतृक व्यवसाय से अधिक लाभ होगा लेकिन आर्थिक लाभ में विलंब होने से कुछ समय के लिए परेशानी रहेगी। संध्या का समय अधिक व्यस्त रहेगा। रिश्तेदारी के व्यवहार निभाने में समय देना पड़ेगा। घर के बड़े लोग आपसे प्रसन्न रहेंगे। रात्रि के समय अचानक अशुभ समाचार मिलने से बेचैनी रहेगी।

तुला (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)

आपके लिए आज का दिन मिश्रित फलदायी रहेगा। आज आपके लगभग सभी कार्य अंत में जाकर आर्थिक अथवा किसी अन्य कारण से अटक सकते हैं। आर्थिक मामलों को सुलझाने में किसी की चापलूसी करनी पड़ेगी अन्यथा उलझने ज्यादा बढ़ सकती है। सेहत भी नरम-गरम रहेगी इसकी अनदेखी कर कार्यो में जुटे रहेंगे जिससे बाद में तकलीफ बढ़ने की संभावना है। सभी प्रकार के जमीन अथवा सरकारी कार्य आज निरस्त रखें व्यर्थ भागदौड़ के बाद भी हासिल कुछ नहीं होगा। व्यर्थ के खर्च अधिक परेशान करेंगे धन कोष में कमी का कारण बनेंगे। घर के सदस्य आपसी विचारो से असहमत रहेंगे। बुजुर्गो के स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें।

वृश्चिक (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)

आज का दिन अधिक थकान वाला रहेगा आप आज आवश्यक कार्यो को प्रातः काल में ही पूर्ण करने का प्रयास करेंगे लेकिन कुछ कार्य फिर भी अधूरे रह सकते हैं। दैनिक कार्य आज अस्त-व्यस्त रहेंगे। व्यवसायी लोग थकान एवं उन्माद के कारण बेमन से कार्य करेंगे परन्तु आर्थिक रूप से दिन बेहतर रहेगा। पुराने आश्वासन आज फलीभूत होने से धन आगमन सुनिश्चित होगा। भविष्य की योजनाओं पर खर्च होगा। कार्य क्षेत्र पर सहयोगियों का बर्ताव कुछ समय के लिए क्रोध दिलाएगा। मांगलिक कार्यो पर खर्च अधिक होगा धर्म कर्म के लिए भी समय निकाल लेंगे। घर का वातावरण लगभग सामान्य ही रहेगा। विपरीत लिंगीय के कारण दुख होगा।

धनु (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)

आज का दिन आपको यश दिलाएगा। शारीरिक एवं मानसिक रूप से भी तंदुरुस्त रहेंगे। कार्य व्यवसाय में कई महत्त्वपूर्ण फैसले निकट भविष्य में लाभदायक सिद्ध होंगे। आज एक साथ अधिक कार्य करना पसंद करेंगे इससे व्यवसाय वृद्धि के साथ ही धन लाभ भी उचित मात्रा में हो सकेगा। विरोधी भी मुह ताकते रह जाएंगे। आज प्रेम प्रसंगों में समय बर्बाद ना करे इसकी जगह कार्य क्षेत्र पर समय दें अन्यथा लाभ की स्थिति ज्यादा देर नहीं टिकेगी। घरेलू एवं व्यक्तिगत सुख के साधनों पर आज अधिक खर्च होगा महिलाएं महंगे सौंदर्य प्रसाधन पर खर्च करेंगी। छोटी मोटी बातों को छोड़ परिवार में सुख शांति बनी रहेगी।

मकर (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)

आज के दिन कार्य क्षेत्र एवं गृहस्थ में उठापटक वाली स्थिति रहेगी। व्यवसायी वर्ग भी एक साथ कई काम हाथ मे लेने पर उलझन की स्थिति से गुजरेंगे। मध्यान तक अधिक परिश्रम करना पड़ेगा परन्तु लाभ आशानुकूल नहीं रहने से निराशा होगी। अधिक कमाने की लालसा अनैतिक प्रवृतियों की ओर खींचेंगी जिसका आरंभ में लाभ मिलेगा परन्तु बाद में हानि दिखती नजर आएगी। नकारात्मक विचार मन पर हावी रहेंगे संध्या के बाद किसी बुजुर्ग के सहयोग से कामचलाऊ स्थिति बन सकेगी धन लाभ होने से कार्य चलते रहेंगे। किसी मांगलिक कार्यक्रम को लेकर अधिक खर्च करना पड़ेगा। महिलाओ का व्यवहार अटपटा रहेगा।

कुंभ (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)

आज आप प्रातः काल से ही अधूरे कामो को पूर्ण करने में जुट जाएंगे लेकिन फिर भी अपने किये कार्यो से पूरी तरह आश्वस्त नही होंगे अधिके बेहतर करने मनोवृति कार्यो में विलंब करेगी आज आप जैसा भी करेंगे वह अन्य लोगो की अपेक्षा पहले ही बेहतर रहेगा। भ्रम में पड़कर स्वयं का नुकसान कर लेंगे लेकिन फिर भी आज का दिन आर्थिक रूप से हर हाल में संतोषजनक रहेगा पूर्व नियोजित खर्च भी होंगे महिलाएं दिखावे के कारण आवश्यकता से अधिक खर्च करेंगी जिससे घरेलू कलह का कारण बन सकती है। संध्या के समय मनोरंजन के अवसर मिलने से मानसिक थकान मिटेगी। आज कुछ ऐसी घटनाएं घटेंगी जिनकी निकट भविष्य में पुनरावृति होगी।

मीन (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)

आज के दिन आप अतिआत्मविश्वास की भावना से ग्रसित रहेंगे यह घरेलू कलह एवं व्यवसाय में हानि का कारण बन सकती है।आज आप स्वयं को हर कार्य में श्रेष्ठ दिखाने का प्रयास करेंगे जिस कारण किसी से वर्चस्व को लेकर तकरार होने की संभावना है। मन इच्छित कार्य ना होने से क्रोध आएगा। व्यवसायी वर्ग को पूर्व में किए निवेश का लाभ दुगना होकर मिलेगा परन्तु नवीन कार्यो में धन उलझ सकता है। धार्मिक कार्यो में दिखावे अथवा स्वार्थवश सहभागिता देंगे। सामाजिक क्षेत्र पर सम्मान में कमी आ सकती है, बोलचाल में संयम रखें। विद्यार्थ वर्ग आज मानसिक दुविधा में रहने से श्रेष्ठ प्रदर्शन से चूकेंगे। घर मे मन कम ही लगेगा।

सम्पूर्ण विश्व पर भारत की संस्कृति, धर्म का सकारात्मक प्रभाव : सुधांशु त्रिवेदी

जयपुर। प्रखर राष्ट्रीय चिंतक डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि विकास में सरकार के साथ-साथ आमजन की भागीदारी भी जरूरी है। आज ज्यादातर लोग यह सोचते हैं कि हमारे बच्चे पढ़-लिखकर अच्छी कमाई करने लगें, लेकिन पढ़ाई लिखाई और कमाई हमारे लिए विकास की गारंटी नहीं है।

केवल विकास की तरफ ध्यान दिया तो विनाश की ओर ले जा सकता है, इसलिए विवेक का प्रयोग करें। उन्होंने कहा कि मेक इन इंडिया के बाद हर चीज भारत में बनने लगी है। आज ब्रह्मोस मिसाइल तक बन रही है। उसके बाद भी कोई कहता है कि विकास का सरूर नहीं दिख रहा है तो उन्हें नजारे देखने के लिए नजर बदलने की जरूरत है।

डॉ. त्रिवेदी रविवार को भारत विकास परिषद की ओर से भारत के विकास में हमारी भूमिका विषय पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आज देश में हर क्षेत्र में विकास हो रहा है। उन्होंने कहा कि स्वाधीनता के 75 वर्ष पूर्ण हुए हैं। हमने एक लंबी यात्रा पूरी की है। 2047 में जब हम स्वाधीनता का शताब्दी वर्ष मनाएंगे तब भारत अपने भव्यतव रूप में पहुंचे, भारत का वास्तविक स्थान था, वो पुनः प्राप्त हो इसका संकल्प लेना होगा।

इस संकल्प कालखंड के 25 वर्षों को अमृत काल कहा गया है। जब विकास की बात करते हैं तो इस बात की भी ध्यान करना होगा कि जब अमृत सागर मंथन से निकला था तो इससे पहले विष भी निकला था। उन्होंने कहा कि कहां कहां पर विष रोपा जा रहा है, कहां कहां पर विष बोया जा रहा है। इसका अपने विवेक से निर्धारण कर सकेंगे तो निश्चित रूप से अमृत काल से अमृत तत्व का मार्ग प्रशस्त होगा।

उन्होंने कहा कि देश में 2014 के बाद विकास के विचार को नया आयाम मिला। विश्व में भारत ही ऐसा देश है, जिसकी संस्कृति, ज्ञान और धर्म का व्यापक सकरात्मक प्रभाव पूरी दुनियां पर पड़ा है। योग दिवस इसका उदाहरण है, संयुक्त राष्ट्र संघ में विश्व के 173 देशों ने योग का समर्थन देकर इसे अपनाया।

मार्क्सवादी इतिहासकारों पर निशाना साधते हुए डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि इनमें से किसी ने भी वैदिक संस्थान में जाकर अध्ययन नहीं किया और वैदिक संस्कृति पर टिप्पणी कर डाली। इस मानसिकता से बाहर निकालने की जरूरत है। भारत में भाषा और शब्दों के माध्यम से लोगों में कुत्सित मानसिकता भरी जा रही है, नई पीढ़ी को इससे बचाना होगा।

उन्होंने कहा कि मेक इन इंडिया के बाद हर चीज भारत में बनने लगी है। एक जमाना था जब यूपी में कट्टे बना करते थे और आज ब्रह्मोस मिसाइल बन रही है। उन्होंने कहा कि भारत एक मात्र ऐसा देश है, जहां 13वीं शताब्दी से पहले किसी नरसंहार का उल्लेख नहीं है। जो नरसंहार के उदाहरण मिलते हैं, वे 13वीं शताब्दी के बाद के हैं। इसके बाद क्यों नरसंहार और मारने काटने की प्रवृत्ति भारत में आ गई?

उन्होंने हमारे अंदर कैसी मानसिकता बिठाई, कहा गया कि हम गुलाम हो गए थे। हमें पढ़ाया गया कि महाराणा प्रताप हल्दी घाटी का युद्ध हार गए थे। लेकिन युद्ध हारने के चार निर्धारित मापदंड है। वह मार दिया गया हो, वह बंदी बना लिया गया हो, उसने टैक्स देना शुरू कर दिया हो और कम से कम दरबार में जाकर हाजिरी लगा दी हो। महाराणा प्रताप में इन चारों में एक भी काम नहीं किया। फिर किस आधार पर यह निष्कर्ष निकाल दिया गया कि प्रताप युद्ध हार गए थे।

सनातन धर्म संस्कृति के पालन से ही समाज का कल्याण संभव : धर्मेन्द्र राठौड

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अजमेर। राजस्थान पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष धर्मेंद्र राठौड़ ने कहा कि सनातन धर्म संस्कृति के पालन से ही समाज का कल्याण संभव है।

राठौड़ आज अजमेर के निकटवर्ती तीर्थराज पुष्कर में अखिल विश्व गायत्री परिवार राजस्थान गायत्री शक्तिपीठ द्वारा आयोजित दशम पुष्कर अखंड अरण्य तीर्थ प्रदक्षिणा पदयात्रा शुभारंभ पर धर्मसभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि पुष्कर से बढ़कर पृथ्वी पर कोई दूसरा बड़ा तीर्थ नहीं। यहां आने मात्र से इंसान के जन्म से लेकर वर्तमान तक के पाप नष्ट होते हैं।

इस मौके पर पूर्व राज्यसभा सांसद ओंकार सिंह लखावत ने कहा कि गायत्री शक्ति आधुनिक युग में धार्मिक कुरीतियों को दूर कर आमजन को संस्कारित करने का प्रयास कर रही है। हम सभी को सनातन धर्म की संस्कृति को बढ़ावा देने का प्रयास करना चाहिए।

इस मौके पर पुष्कर स्थित चित्रकूट धाम के पाठकजी महाराज, लाडली घर आश्रम के कृष्णानंद महाराज, निर्मल आश्रम के डॉ स्वामी महाराज भी उपस्थित रहे। पदयात्रा को संयुक्त रुप से हरे पत्तों की झंडी दिखाकर रवाना किया गया। पदयात्रा का समापन 28 जुलाई को होगा।

पार्थ चटर्जी की करीबी अर्पिता मुखर्जी एक दिन की ईडी हिरासत में

कोलकाता। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पश्चिम बंगाल के मंत्री और शिक्षक भर्ती घोटाला के आरोपी पार्थ चटर्जी की करीबी महिला सहयोगी अर्पिता मुखर्जी को शनिवार को गिरफ्तार कर रव‍िवार को अदालत में पेश क‍िया। अदालत से अर्पिता मुखर्जी की रिमांड की मांग की। अदालत ने अर्पिता मुखर्जी को एक दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया।

अर्पिता को सोमवार को विशेष अदालत में पेश किया जाएगा। दरअसल ईडी ने पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग की भर्ती में अनियमितता घोटाला पर एजेंसी की चल रही जांच के सिलसिले में अर्पिता मुखर्जी के घर से भारी मात्रा में नकदी, सोना और अन्य कीमती सामान बरामद क‍िया है।

केंद्रीय एजेंसी के अधिकारियों की ओर से अर्पिता की पृष्ठभूमि की जांच से पता चला है कि पश्चिम बंगाल के वाणिज्य और उद्योग मंत्री और तृणमूल कांग्रेस के महासचिव पार्थ चटर्जी की विश्वासपात्र हैं और करीबी सहयोगी के रूप में काम कर रही हैं।

एजेंसी के सूत्रों के मुताबिक अपनी वर्तमान स्थिति तक पहुंचने के लिए एक ओडिया अभिनेत्री के तौर पर शुरूआत करने वाली अर्पिता हमेशा शॉर्टकट तरीके अपनाती हैं। ईडी ने इस सिलसिले में पार्थ चटर्जी को भी शनिवार को गिरफ्तार किया है। ईडी के सूत्रों ने कहा कि ज्यादा महत्वाकांक्षा के चलते अर्पिता ने अपनी विधवा मां मिनोती मुखर्जी को कोलकाता के उत्तरी बाहरी इलाके में बेलघरिया में अपने पैतृक फ्लैट में ही छोड़ दिया।

इस बीच, ईडी के सूत्रों ने बताया कि अर्पिता मुखर्जी के स्वर्गीय पिता केंद्र सरकार के कर्मचारी थे, जिनका निधन उनकी सेवानिवृति से पहले हो गया था। उस समय अर्पिता को अनुकंपा के आधार पर नौकरी की पेशकश भी की गई थी। लेकिन उसने इनकार कर दिया और दावा किया कि वह मॉडलिंग और अभिनय में अपना करियर बनाना चाहती है। यह पता चला है कि ओडिया फिल्मों में मॉडलिंग और अभिनय के अपने शुरुआती सालों के दौरान वह अपनी मां के संपर्क में थी।

लगभग छह साल पहले पार्थ चटर्जी के साथ एक रियल एस्टेट प्रमोटर की ओर से संपर्क में आने के बाद से अर्पिता की जिंदगी बदल गई। इसके तुरंत बाद उन्हें पार्थ चटर्जी के साथ कई सार्वजनिक कार्यक्रमों में देखा गया और यहां तक कि एक दुर्गा पूजा उद्घाटन कार्यक्रम में भी देखा गया, जहां पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी मौजूद थीं। इसके तुरंत बाद अर्पिता अपने डायमंड पार्क कॉम्प्लेक्स के पॉश आवास में रहने लगी।

ईडी ने शुक्रवार को कहा कि उसने कथित शिक्षक भर्ती घोटाले में पश्चिम बंगाल के मंत्री पार्थ चटर्जी की एक करीबी सहयोगी अर्पिता मुखर्जी के परिसरों पर छापेमारी में 20 करोड़ रुपए की नकदी जब्त की है। ईडी ने एक बयान में कहा क‍ि इस धन के एसएससी घोटाले से जुड़े होने का संदेह है। नोट गिनने वाली मशीन के माध्यम से नकदी की गिनती के लिए जांच टीम बैंक अधिकारियों की मदद ले रही है।

ईडी के अधिकारियों की एक टीम ने कथित शिक्षक भर्ती घोटाले की जांच के सिलसिले में शुक्रवार को पश्चिम बंगाल के दो मंत्रियों-पार्थ चटर्जी और परेश अधिकारी के अलावा उनके सहयोग‍ियों के घरों पर छापेमारी की।

ईडी ने कहा कि अर्पिता मुखर्जी के परिसर से 20 से अधिक मोबाइल फोन भी बरामद किए गए हैं, जिसके उद्देश्य और उपयोग का पता लगाया जा रहा है। बयान में कहा गया कि ईडी ने चटर्जी के अलावा शिक्षा राज्य मंत्री परेश सी अधिकारी, विधायक माणिक भट्टाचार्य और अन्य के परिसरों पर छापा मारा।

इस बीच रविवार सुबह ईडी के अधिकारी केंद्रीय सशस्त्र बलों के जवानों के साथ, अर्पिता को मेडिकल चेक-अप के लिए कोलकाता के दक्षिणी बाहरी इलाके जोका में केंद्र सरकार की ओर से संचालित ईएसआई अस्पताल ले गए। वहां उसने मीडियाकर्मियों से बात की और कहा कि वह निर्दोष है। लेकिन मुझे कानून पर भरोसा है।

पार्थ चटर्जी के दोषी पाए जाने पर होगी कड़ी कार्रवाई : टीएमसी

ओडिशा : बालासोर में नाबालिग लड़की को प्रेमी ने जिंदा जलाया

बालासोर। ओडिशा के बालासोर जिले के खैरा थाना क्षेत्र में एक भयावह घटना में एकतरफा प्यार में असफल होने पर एक व्यक्ति ने रविवार की सुबह एक नाबालिग लड़की को कथित तौर पर जिंदा जला दिया। आरोपी की पहचान खैरा प्रखंड के बरिंगिया गांव निवासी 37 वर्षीय दयानिधि जेना के रूप में हुई है।

रिपोर्टाें के मुताबिक आरोपी ने आठवीं कक्षा की छात्रा को सुबह करीब आठ बजे आग के हवाले कर दिया। नाबालिग लड़की गंभीर रूप से झुलस गई और ग्रामीणों के बचाने से पहले ही उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

लड़की की चीख सुनकर कुछ ग्रामीण हालांकि मौके पर पहुंचे और आरोपी को काबू कर लिया।
इसके बाद आरोपी ने कथित तौर पर जहर खा लिया और खैरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रारंभिक प्रवेश के बाद अब जिला मुख्यालय अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है।

आरोप है कि आरोपी ने लड़की के बाल भी काट दिए थे। घटना के बाद मौके पर लाइटर के अलावा कुछ बाल और जहर की बोतल भी बरामद की गई है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी को हिरासत में ले लिया। पीड़ित लड़की का शव बरामद कर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है।

पुलिस ने कहा कि जघन्य अपराध के सही कारण का पता लगाने के लिए मामले में आगे की जांच की जा रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि उसी गांव की रहने वाली मृतक आरोपी के संपर्क में आई क्योंकि वह उसकी पत्नी से निजी ट्यूशन लेने के लिए उसके घर जाती थी।

जेना ने जब नाबालिग लड़की को प्रपोज किया तो उसने मना कर दिया। गुस्से में जेना ने कथित तौर पर जघन्य अपराध किया जब वह कुछ सामान लाने के लिए बाजार में गई थी। वह कथित तौर पर उसे खींचकर शौचालय में ले गया और चौंकाने वाली व भयावह घटना को अंजाम देते हुए मिट्टी का तेल डालकर उसे जिंदा जला दिया।

कोटा : मकान से दिनदहाड़े नकदी-जेवर सहित 25 लाख की चोरी

कोटा। राजस्थान में कोटा के आरकेपुरम थाना क्षेत्र में एक मकान में दिनदहाड़े चोरों ने नकदी एवं जेवर सहित करीब 25 लाख से ज्यादा की चोरी की वारदात को अंजाम दिया।

चोर इतने शातिर थे कि पुलिस उनकी पहचान नहीं कर पाए इसलिए मकान में लगे सीसीटीवी कैमरे की एलईडी भी साथ ले गए। हालांकि डीवीआर को देखने पर बाइक सवार दो युवक वारदात को अंजाम देेने के लिए मकान में आते-जाते दिखाई दे रहे है।

कोटा के आरकेपुरम निवासी पीड़ित अर्जुन सिंह गौड़ झालावाड़ जिले के खानपुर क्षैत्र की ग्राम पंचायत के सरपंच है जो शुक्रवार को सरपंच संघ की मीटिंग में भाग लेने के झालावाड़ गए थे। जाते समय करीब 11 बजे पत्नी व बच्चों को रंगबाड़ी में अपने किसी रिश्तेदार के यहां छोड़कर गये थे।

शाम को छह बजे करीब पत्नी वापस घर लौटी तो घर के ताले टूटे पड़े थे। पत्नी ने अंदर जाकर देखा तो कमरों में रखी अलमारी टूटी पड़ी थी और बैड का सामान बिखरा पड़ा था। बदमाश सात लाख रुपए नकद, करीब 35 तोला सोने की ज्वैलरी सहित घर में लगे सीसीटीवी कैमरे की एलईडी चुरा ले गए।

सूचना पर मौके पर पुलिस पहुंची और घटनास्थल का मौका मुआयना किया। पुलिस ने डीवीआर के अन्य स्थान पर लगाकर देखा तो दो बाइक सवार युवक घर में घुसते एवं चोरी कर जाते दिखाई दे रहे है। पुलिस के अनुसार करीब 25 लाख की चोरी होनी बताई जा रही है।

अलवर : बोरवेल में गिरे व्यक्ति के 5वें दिन निकले टुकडे, अंतिम संस्कार किया

अलवर। राजस्थान में अलवर जिले के बहरोड़ थाना क्षेत्र के गांव जखराना में पिछले पांच दिन से बोरवेल में गिरे एक अधेड व्यक्ति के शव को आज टुकेडे के रूप में अंग निकालकर अंतिम संस्कार किया।

सूत्रों के अनुसार बोकी (बोरिंग खोदने के लिए पानी का प्रेशर डालकर मिट्टी निकालने वाली मशीन) लगाकर शरीर के 10 से 12 विभिन्न अंग बाहर निकले। तहसीलदार द्वारका प्रसाद तिवारी ने बताया कि शव से निकले हुए शरीर के अंग में घुटने की हड्डी, सिर के बाल, त्वचा, हाथ का पंजा, अंगुलियां, लिवर, पेट की आंत सहित विभिन्न अंग बाहर निकाले, जिन्हें बाल्टी में भरकर परिजनों को सुपुर्द किया, लेकिन सज्जन सिंह 55 के शव को पूरा नहीं निकाला जा सका।

गौरतलब है कि गत 19 जुलाई से सज्जन सिंह अपने घर से लापता था और 21 जुलाई को परिजनों को तलाश करते हुए सज्जन सिंह की बॉडी कुएं में मिली। 20 जुलाई को बेटे संदीप ने थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई। परिजनों एवं ग्रामीणों ने पुलिस को सज्जन सिंह के कुएं में पड़े होने की सूचना दी। थानाधिकारी वीरेंद्र पाल मौके पर पहुंचे। जहां कुएं के उपर लोहे का जाल हटा हुआ था और सज्जन सिंह के मोबाइल का कवर मिला। उसकी सूचना सिविल डिफेंस और एसडीआरएफ को दी गई।

अलवर से दोपहर बाद सिविल डिफेंस के 10 एवं एसडीआरएफ के 10 सदस्यों की टीम पहुंची। दोनों टीमों ने 22 जुलाई को सुबह से लेकर शाम तक प्रयास किए, लेकिन शव को बाहर नहीं निकाला जा सका। बार-बार प्रयास से शव के उपर मिट्टी जा गिरी। जिसे साफ करने के लिए पानी डाला, तो पानी नीचे नहीं गया और कीचड़ हो गई। शुक्रवार दोपहर को ही एनडीआरएफ को सूचना दे दी गई।

शुक्रवार की रात को ही अजमेर से चलकर एनडीआरएफ की 14 सदस्यों की टीम रात 11 बजे पहुंची। शनिवार सुबह आठ बजे से शव को निकालने के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं, लेकिन अभी तक शव को बाहर निकाला नहीं गया है।

सज्जन सिंह के परिजनों और ग्रामीणों ने प्रशासनिक अधिकारियों को एक मेजर नामा पेश किया। जिसमें कहा गया कि अगर पूरा शव नहीं निकल पा रहा, तो उसके कुछ अवशेष ही बाहर निकाल दिए जाएं, जिससे वे अंतिम संस्कार कर अपनी प्रक्रिया को पूरी कर सके। इस पर सज्जन सिंह के शव के टुकड़े के रूप में अंग निकाले। इसके बाद परिजनों ने रविवार को सुबह सज्जन सिंह के शरीर के अंगों का अंतिम संस्कार किया गया।

मौके पर मौजूद डॉक्टर ने डीएनए टेस्ट के लिए अंगों के सैंपल लिए। जिसके बाद ऑपरेशन बंद हुआ। सज्जन सिंह के परिजनों के संतुष्ट होने के बाद रात करीब 12 बजे पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी संसाधनों को लेकर वापस लौटे।

संत विजयदास आत्मदाह मामले में भाजपा की जांच कमेटी पसोपा गांव पहुंची

भरतपुर। राजस्थान के भरतपुर में डीग क्षेत्र में आत्मदाह करने बाले संत विजयदास की मौत के मामले में जांच के लिए भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा द्वारा बनाई गई चार सदस्यीय कमेटी आज पसोपा गांव पहुंची।

भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री और प्रदेश प्रभारी अरुण सिंह, सीकर सांसद स्वामी सुमेधानंद सरस्वती, पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद सत्यपाल सिंह, उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक सांसद बृजलाल यादव की इस कमेटी के दौरे के दौरान सांसद बाबा बालकनाथ ने कलक्टर एवं संभागीय आयुक्त के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए कमेटी के सदस्यों के सामने शिकायत दर्ज कराई। सांसद बालकनाथ ने कहा कि जिला कलक्टर एवं संभागीय आयुक्त ने सभी गांव वालों को उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज होने की धमकी दी थी।

बालकनाथ ने आरोप लगाया कि गांव वालों को धमकी दी जा रही है कि बाबा तो गया, लेकिन तुम गांव वालों में से कोई कुछ भी किसी को बोलेगा तो तुम्हारे खिलाफ पेट्रोल लाने का, माचिस देने का, बाबा को भड़काने का मुकदमा लगाएंगे। तुम्हारे जवान बच्चों के खिलाफ भी मुकदमा लगाएंगे, फिर वो नौकरी पर नही लग पाएंगे। इस दौरान बाबा बालकनाथ ने कमेटी के सामने एकत्रित हुई भीड़ से पुछा कि तुम को धमकाया गया था ना, तो भीड़ में खड़े लोगों ने एक स्वर में हां कहा।

इस बीच राष्ट्रीय महामंत्री और प्रदेश प्रभारी अरुण सिंह ने कहा कि ब्रज क्षेत्र के तीर्थ स्थल पहाड़ों को बचाने के लिए भगवान श्रीकृष्ण की क्रीड़ास्थली और आदि बद्री और कनकांचल पहाड़ों को बचाने के लिए संतों को 550 दिन से भी ज्यादा आंदोलन करना पड़ा। संतों को पूरा विश्वास हो गया की माफियाओं का पूरा जाल यहां पर है और प्रदेश सरकार का पूरा संरक्षण उनके ऊपर है। यहां पर अवैध खनन चलता रहेगा। इससे कनकांचल और आदि बद्री पर्वत बचेगा नहीं।

इससे हैरान और परेशान होकर बाबा हरि बोल दास ने पिंडदान किया। दूसरे संत बाबा नारायण दास टावर पर चढ़े, संतों का मानना था की, सद्बुद्धि सरकार को आ जाए। इससे परेशान होकर संत विजय दास ने आत्मदाह किया। सरकार के लोग एक-एक व्यक्ति को डराने और धमकाने का काम कर रहे हैं।

कोटा में पहली मूसलाधार से कई इलाके हुए जलमग्न

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कोटा। राजस्थान के कोटा में मानसून सत्र में शुक्रवार और शनिवार को हुई मूसलाधार बरसात ने शहर के आवासीय क्षेत्रों में पानी की समुचित निकासी की व्यवस्था नहीं होने से सभी और पानी भर गया तथा लोगों को भारी परेशानी का सामना हुआ।

बरसात के पहले कोटा के दोनों नगर निगम के महापौर और अधिकारियों ने जल निकासी के पुख्ता प्रबंध होने के दावे किए थे। इन मात्र दो दिनों की मूसलाधार बरसात में कोटा शहर के जवाहर नगर सहित तलवंड़ी,केशवपुरा,महावीर नगर जैसे एक दर्जन से भी अधिक बड़े आवासीय क्षेत्रों की मुख्य सड़कों सहित भीतरी सड़कों को पानी से लबालब कर दिया।

जवाहर नगर सहित नदी पार के कुन्हाड़ी इलाके में सड़कों पर पानी भरने की समस्या काफी गंभीर हो गई और यह वह इलाके हैं जिनमें न केवल कोटा के प्रमुख कोचिंग संस्थानों के शैक्षणिक परिसर हैं बल्कि छात्रों के कई दर्जन हॉस्टल होने के अलावा यहां के आवासीय क्षेत्रों में भी हजारों की संख्या में प्रदेश के दूसरे हिस्सों सहित अन्य राज्यों बिहार, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, गुजरात, उत्तराखंड, झारखंड सहित दक्षिणी राज्यों से आए कई हजार छात्र निवास करते हैं और इन्हें ही कोटा के अर्थ तंत्र की रीड की हड्डी माना जाता है।

शहर के दोनों नगर निगम के अधिकारियों-जनप्रतिनिधियों के बड़े-बड़े दावों के बावजूद नए-पुराने कोटा शहर के कई आवासीय क्षेत्रों में गंदे पानी के निकास के लिए नालों की सफाई की व्यवस्था नहीं की गई जबकि स्मार्ट सिटी परियोजना में शामिल कोटा शहर में साफ-सफाई पर करोड़ों रुपए सालाना खर्च करने का दावा किया जाता है, लेकिन तेज बरसात होने के बाद आवासीय क्षेत्रों में गंदे पानी के नाले उफ़न पड़े हैं और पानी नालों की सीमाओं को लांघकर न केवल मुख्य सड़क मार्गाे बल्कि भीतरी गलियों तक में पहुंच गया। यही नहीं, कई आवासीय क्षेत्रों में नालों से सड़कों पर आया गंदा पानी घरों के भीतर तक घुस गया जिसके कारण नालों की गंदगी घरों में पहुंच गई।

शनिवार और रविवार के इन दिन ही दो दिनों में कोटा में राजस्थान शिक्षक पात्रता परीक्षा (रीट) आयोजित की गई है जिसके लिए कोटा में 94 केंद्र स्थापित किए गए थे। इस परीक्षा में शामिल होने के लिए राजस्थान सहित दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश आदि राज्यों से भी छात्र कोटा पहुंचे थे लेकिन मूसलाधार बरसात के कारण कोटा के कई परीक्षा केंद्रों के पास बने जल प्लावन के हालात की वजह से इन परीक्षार्थियों को अकथनीय परेशानियों का सामना करना पड़ा।

इस मूसलाधार वर्षा और सड़कों पर जल प्लावन का कहर परीक्षार्थियों पर किस कदर टूटा, इसका अनुमान इससे लगाया जा सकता है कि हजारों छात्र परीक्षा से वंचित रह गए। कोटा में बने 94 केंद्रों में शनिवार को पहले लेवल की परीक्षा देने के लिए कुल 38 हजार 650 परीक्षार्थी पंजीकृत थे, लेकिन इनमें से केवल 22 हजार 147 ही परीक्षा देने पहुंच पाए।

यानी 16 हजार 503 परीक्षार्थी अनुपस्थित रहे जबकि दूसरे लेवल की परीक्षा के लिए पंजीकृत 34 हजार 721 में से 25 हजार 702 ही परीक्षार्थी ही परीक्षा दे सके। 9019 अनुपस्थित रहे। सभी तो नहीं लेकिन कुछ परीक्षार्थी मूसलाधार वर्षा के कारण परीक्षा देने से वंचित रह गए थे।

आलनिया बांध पर चली चादर

कोटा के समीप आलनिया बांध में बरसाती पानी की भरपूर आवक होने से बांध में आज चादर चल पड़ी जिससे किसानों मे चेहरे खुशी से झूम उठे।

पूर्व संसदीय सचिव भवानीसिंह राजावत ने इस मौके पर आज आलनिया बांध पर पहुंचे किसानों को लड्डू खिलाकर मुंह मीठा करवाया। राजावत ने बताया कि आलनिया बांध से कोटा जिले में दरा-मंड़ाना इलाके के 40 गांवों को सिंचाई के लिये पानी मिलता है जिससे इस इलाके में खुशहाली आई है।

राजावत ने बताया कि आलनिया बांध मे पानी की क्षमता बढ़ाने के लिए पहले डायवर्जन चौनल का पानी आलनिया में डाला गया है व उसके बाद 1.5 करोड़ रूपए की लागत से आलनिया बांध का नहरी तंत्र ठीक करवाने का काम शुरू करवाया। केन्द्र सरकार से 11 करोड़ रूपए नहरी तंत्र की मजबूती के लिए मंजूर करवाए गए थे जिससे निर्माण कार्य प्रारम्भ करवाया गया जो अब पूरा होने जा रहा है।

इससे आलनिया बांध का नहरी तंत्र मजबूत होगा एवं आलनिया की नहरों से एक इंच भी भू उपयोग के बिना रिसाव नहीं होगा। अब तो किसान दो की जगह तीन फसलों के लिए पानी ले सकेंगे। हालांकि आलनिया डेम में सात फीट मिट्टी(सिल्ट)जमा है जिसे अबकी बार बांध खाली होते ही मिट्टी निकालने का काम होगा। इसके बाद आललनिया बांध में पानी की भराव क्षमता ओर ज्यादा बढ़ सकेगी।