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अखिलेश यादव की चिट्ठी के बाद शिवपाल की भरोसेमंदों के साथ मंत्रणा शुरू

इटावा। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव की चिट्ठी के बाद चाचा शिवपाल सिंह यादव अपने खास एवं भरोसेमंद सहयोगियों के साथ आगे की रणनीति के बारे में मंत्रणा कर रहे हैं मगर भतीजे के पत्र पर उन्होने खामोशी की चादर ओढ़ ली है।

अपने गृह नगर इटावा के सैफई में प्रवास कर रहे शिवपाल ने अपनी पार्टी के खास और भरोसे के लोगो से गहन मंत्रणा सैफई से लेकर इटावा तक विभिन्न स्तर पर की है। सैफई में अपने पिता के नाम बने एसएस मेमोरियल स्कूल में गहन वार्ता के बाद अपने चौगुुर्जी आवास पर आज पूर्वाहन और हेवरा मे पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के नाम पर स्थापित कालेज में अपने लोगों से शिवपाल मंथन करने में जुटे हुए हैं।

शिवपाल सिंह जिन जिन कार्यकर्त्ताओं से मंथन चिंतन कर रहे वे पूरी तरह से ना केवल चुप्पी साधे हुए हैं बल्कि शिवपाल सिंह यादव भी अभी कुछ भी बोलने के लिए तैयार नहीं है। पहले शिवपाल ने सोच समझ कर जबाब देने के लिए बात कही थी लेकिन रविवार को भी वह खामोश बने हुए हैं। शिवपाल सिंह यादव की खामोशी कईयों किस्म के सवाल भी खडे कर रही है। कुछ लोग इस बात की तस्दीक रहे हैं कि शिवपाल अखिलेश की चिट्ठी के बाद काफी सोच समझ कर जवाब देने के मूड मे दिख रहे हैं, इसीलिए शिवपाल अभी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है।

शनिवार दोपहर में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने चाचा शिवपाल सिंह के लिए एक चिट्ठी जारी करते हुए लिखा कि आपको जहां ज्यादा सम्मान मिल रहा हो वहां आप जाने के लिए स्वतंत्र हैं। संक्षिप्त भाषा में लिखी गई चिट्ठी में एक तरह से सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने चाचा शिवपाल सिंह को पार्टी से बाहर जाने का अल्टीमेटम दे दिया। जिस तरह राष्ट्रपति चुनाव में शिवपाल सिंह यादव ने खुलकर एनडीए प्रत्याशी द्रौपदी मुर्मू का समर्थन किया उससे कहीं ना कहीं एक बार फिर से चाचा शिवपाल और भतीजे अखिलेश यादव में दूरियां बढ़ती हुई नजर आईं।

अखिलेश यादव ने जिस समय शिवपाल सिंह के लिए लेटर जारी किया उस वक्त शिवपाल सैफई स्थित अपने हेंवरा डिग्री कालेज में दोपहर में आराम कर रहे थे। लेटर की सूचना मिलते ही आनन-फानन में शिवपाल सिंह ने इटावा में अपनी पार्टी के खास लोगों और विश्वसनीय लोगों को मंत्रणा के लिए सैफई बुला लिया। लगभग एक घंटे चली मंत्रणा के बाद शिवपाल सिंह यादव अपने लोगों के साथ हेंवरा डिग्री कालेज से निकलकर सैफई में अपने पिता के नाम बने एसएस मेमोरियल में लोगों के साथ बातचीत करने पहुंच गए।

रविवार सुबह अपने चौगुर्जी स्थित आवास पर शिवपाल ने सैकडों लोगों से मेल मुलाकात शिवपाल सिंह यादव ने की लेकिन इस मुलाकात के बीच लोगों से उन्होंने क्या बात की इस बात की पुष्टि नहीं हो पा रही है क्योंकि ना तो शिवपाल के समर्थक कुछ भी बोलने को तैयार हैं और ना ही शिवपाल कुछ भी बोल रहे हैं।

सम्मान और स्वतंत्र होने की अखिलेश की चिट्ठी के बाद शिवपाल की खामोशी किसी के पल्ले नहीं पड रही है क्योंकि इससे पहले शिवपाल लगातार अखिलेश पर सम्मान ना देने के साथ साथ बात ना सुनने की बात करते रहे थे।

विधानसभा चुनाव मे समाजवादी गठबंधन के सत्ता से दूर होने के बाद शिवपाल अखिलेश पर निशाना साधने लगे हैं। शिवपाल सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कई मौके पर तारीफ करना भी अखिलेश को रास नहीं आया तभी तक अखिलेश इस बात को खुले मंच पर बोल चुके है कि उनके चाचा की चिंता भाजपा को सबसे ज्यादा है। अखिलेश का शिवपाल पर यह ऐसा तंज था जिसको लेकर राजनैतिक हल्को मे चर्चाए शुरू हो गई।

दरअसल 26 मार्च को लखनऊ मे सपा गठबंधन की बैठक में शिवपाल को ना बुलाए जाने को लेकर बिफरे शिवपाल अखिलेश पर आग बबूला बने हुए हैं लेकिन राष्ट्रपति चुनाव को लेकर विपक्ष के उम्मीवार यशवंत सिन्हा को आडे हाथों लिए जाने से भी अखिलेश बेहद गुस्से में बने हुए हैं क्योंकि शिवपाल ने खुल कर कहा कि वो एनडीए की राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार द्रोपदी मुर्मू के पक्ष में मतदान करेंगे।

अखिलेश अपने परिवार को नहीं संभाल पा रहे हैं, तो हमें कहां से संभालेंगे : ओमप्रकाश राजभर

जबलपुर में कथित पत्रकार ने युवती की गोली मारकर की हत्या

जबलपुर। मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले के बरेला थाना क्षेत्र में अपने को पत्रकार बताने वाले एक युवक ने अपनी प्रेमिका की गोली मारकर हत्या कर दी है। हत्या की वारदात को अंजाम देने के बाद कथित पत्रकार द्वारा नर्मदा नदी में कूंदकर आत्महत्या की संभावना व्यक्त की गई है।

उप पुलिस अधीक्षक बरेला अपूर्वा किलेदार ने बताया कि कल शाम ग्राम मंगेली नर्मदा पुल में एक कार लावारिस अवस्था में मिली। कार की पिछली सीट में एक युवती की रक्त रंजित लाश पड़ी हुई थी। सीने में गोली मारकर युवती की हत्या की गई थी। कार का रजिस्ट्रेशन बजरंग नगर निवासी विजय कुमार लाल के नाम पर था। संपर्क करने पर उसने बताया कि कार इंदिरा नगर निवासी बादल पटेल लेकर गया था।

बादल पटेल खुद को पत्रकार बताता है और ब्लैकमेलिंग के आरोप में पुलिस ने उसके खिलाफ कार्रवाई की थी, जिसके कारण उसको जेल भी जाना पड़ा था। लड़की की शिनाख्त अनिभा केवट उमर (25) के रूप में हुई है। कल दोपहर बादल उसे आईटी पार्क स्थित ऑफिस से लेकर गया था।

मृतिका के भाई ने बताया कि दोनों के बीच में पिछले तीन साल से लव अफेयर था। बादल की शादी 8 साल पहले हो गई थी। बादल को शक था कि युवती का किसी और से लव अफेयर था। पुलिस को कार से पिस्टल गोली के खाली खोखे, मोबाइल तथा एक माइक आईडी मिली है। इसके अलावा कार के पास चप्पल भी मिली है।

हत्या की घटना को अंजाम देने के बाद बादल द्वारा आत्महत्या करने पुल से नदी में छलांग लगाने की संभावना को देखते हुए गोताखोरों की मदद से उसकी तलाश करवाई जा रही है। उसके संबंध में दोस्तों और रिश्तेदारों से भी पूछताछ जारी है। अभी तक उसके संबंध में सुराग नहीं मिला है और उसकी तलाश जारी है।

अखिलेश अपने परिवार को नहीं संभाल पा रहे हैं, तो हमें कहां से संभालेंगे : ओमप्रकाश राजभर

जौनपुर। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि समाजवादी पार्टी गठबंधन टूट चुका है, अखिलेश यादव अपने चाचा शिवपाल और भाभी अपर्णा यादव तक को नहीं संभाल पाए। अखिलेश अगर अपने परिवार को नहीं संभाल पा रहे हैं तो हमें कहां से संभालेंगे, वो अपने सामने किसी की नहीं सुनते हैं।

राजभर ने रविवार को पार्टी के युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं की बैठक संबोधित करने के पूर्व पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अकेले कोई पार्टी सरकार नहीं बना सकती है, हमको भी कहीं न कहीं गठबंधन करना है। पार्टी नेताओं और विधायकों से राय लेंगे।

उन्होंने कहा कि कुछ पार्टी के नेताओं की राय और उनको व्यक्तिगत रूप से लगता है कि बसपा से बात करनी चाहिए। आज़मगढ़ उपचुनाव में बसपा ने अच्छा प्रदर्शन किया है, मायावती अखिलेश यादव से ज्यादा क्षेत्र में रहती हैं। चुनाव में अखिलेश यादव टिकट देने में भी पक्षपात करते थे। सुबह से लेकर शाम तक अलग-अलग लोगों को टिकट दिया करते थे।

निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉक्टर संजय निषाद की तरफ से एनडीए में आने की बात पर ओमप्रकाश राजभर ने तीखा व्यंग कसा और कहा कि संजय निषाद भारतीय जनता पार्टी के मालिक नहीं है। राजभर ने कहा कि यूपी में एसी की राजनीति की हवा खराब हो गई है, एसी आराम करने के लिए बनाई गई थी, लेकिन यूपी में कुछ नेताओं को एसी की हवा रास आ गई है।

राजभर ने कहा कि मैंने अखिलेश से कहा था कि कुछ दिन नॉन एसी की हवा ली जाए लेकिन मेरी बात नहीं सुनी गई। अमित शाह और मायावती भी एसी में रहती हैं लेकिन वह अपने कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करती रहती हैं। साल 2024 के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि वह बसपा से बात करने के मूड में हैं। उन्होंने कहा कि मुझे मुख्यमंत्री योगी ने फोन किया और राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू से मिलने के लिए बोला था, मैं उनसे मिलने चला गया, ये बात भी अखिलेश को नागवार लगी।

खुद को मिली वाई कैटगरी सुरक्षा के बारे में कहा कि मेरे ऊपर हमला हुआ था, नौ मुकदमे आजमगढ़ गाजीपुर लखनऊ में लिखे गए हैं, जो लोगों ने चुनाव के दौरान मेरे ऊपर हमला हमला किया था वो पकड़े गए तब से सुरक्षा मिली है।

स्कॉटलैंड क्रिकेट बोर्ड के सभी सदस्यों का इस्तीफ़ा

एडिनबर्ग। स्कॉटलैंड में क्रिकेट के शासी निकाय क्रिकेट स्कॉटलैंड के पूरे बोर्ड ने सोमवार को जारी होने वाली नस्लभेद जांच रिपोर्ट के प्रकाशन से पहले इस्तीफा दे दिया है। क्रिकेट स्कॉटलैंड ने रविवार को यह जानकारी दी।

उल्लेखनीय है कि स्कॉटलैंड क्रिकेट में नस्लभेद के आरोपों की जांच के लिए समिति का गठन किया गया था, जिसकी रिपोर्ट सोमवार को प्रकाशित होगी। स्कॉटलैंड के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज़ माजिद हक़ ने स्काई स्पोर्ट्स न्यूज़ के साथ साक्षात्कार में आरोप लगाया था कि स्कॉटलैंड क्रिकेट संस्थागत रूप से नस्लवादी है, जिसके बाद जांच के आदेश दिए गए थे।

खबरों के अनुसार जांच रिपोर्ट में सामने आया है कि स्कॉटलैंड क्रिकेट के अंदर व्यापक स्तर पर नस्लवाद मौजूद है। क्रिकेट स्कॉटलैंड के प्रवक्ता ने यहां जारी बयान में कहा कि क्रिकेट स्कॉटलैंड तत्काल प्रभाव से स्पोर्ट्सकोटलैंड के साथ साझेदारी में काम करेगा ताकि आने वाले दिनों में संगठन और खेल के लिए उचित प्रशासन, नेतृत्व और समर्थन सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि क्रिकेट में नस्लवाद की रिपोर्ट के प्रकाशन के बाद इन व्यवस्थाओं की समीक्षा की जाएगी।

क्रिकेट स्कॉटलैंड के बोर्ड ने अपने त्याग पत्र में कहा कि नस्लवाद के बारे में उठाए गए मुद्दों के लिए एक संपूर्ण, निष्पक्ष और त्वरित समाधान देना, और खेल के शासन को बदलना और आधुनिक बनाना क्रिकेट स्कॉटलैंड जैसे छोटे संगठन के लिए अपने आप में दो बड़ी चुनौतियां हैं। हम स्पोर्ट्सकोटलैंड से अब तक प्राप्त महत्वपूर्ण समर्थन को स्वीकार करते हैं, और हम जानते हैं कि वे तेजी से प्रगति सुनिश्चित करने के लिए साझेदारी में काम करना जारी रखेंगे।

उन्होंने कहा कि जब पिछले साल स्कॉटलैंड क्रिकेट में नस्लभेद की जांच के आदेश दिए गए थे, तब वे इसके ‘पूर्णतः पक्षधर’ थे। बोर्ड ने कहा कि समीक्षा ने अद्वितीय स्तर का जुड़ाव हासिल किया है और हमें विश्वास है कि यह वास्तव में परिवर्तनकारी होगा, न केवल क्रिकेट स्कॉटलैंड और क्रिकेट के लिए, बल्कि यह स्कॉटिश खेल और सामान्य रूप से समाज को बदलाव का एक महत्वपूर्ण मौका प्रदान करेगा।

उन्होंने कहा कि बोर्ड इस समीक्षा के निष्कर्षों को पूरी तरह से लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है ताकि स्कॉटलैंड में क्रिकेट के खेल को समावेशी बनाया जा सके। हम सभी को वास्तव में खेद है और हम स्कॉटलैंड क्रिकेट में नस्लवाद या किसी भी तरह का भेदभाव अनुभव करने वाले सभी लोगों से सार्वजनिक रूप से माफ़ी मांगते हैं।

स्मृति ईरानी के खिलाफ अमेठी में आपत्तिजनक पोस्टर वायरल

अमेठी। केन्द्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी सांसद स्मृति ईरानी और उनकी पुत्री के खिलाफ उनके संसदीय क्षेत्र अमेठी में कुछ अराजक तत्वों ने आपत्तिजनक पोस्टर वायरल किया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

ईरानी और उनकी बेटी जोईश ईरानी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी के साथ पोस्टर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल पोस्टर में स्मृति ईरानी से इस्तीफे की मांग की गई है। पोस्टर किसने वायरल किए हैं, पुलिस इसकी पड़ताल कर रही है।

अपर पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार पांडे ने बताया कि मामले की जानकारी मिली है जिसकी जांच कराई जा रही है। इन दिनों केंद्रीय मंत्री की बेटी जोईश ईरानी को लेकर राजनीति जोरों पर है और इस मामले को लेकर भाजपा और कांग्रेस एक दूसरे पर हमलावर हैं, ऐसे में अमेठी में पोस्टर वायरल होने पर राजनीतिक गलियारे में हलचल बढ़ गई है।

भाजपा की स्थानीय इकाई ने ट्वीट किया कि अमेठी की हार को अभी तक न भुला पाने वाली कांग्रेस ने राजनैतिक प्रतिशोध में 18 वर्ष की बेटी को बदनाम करने का कुत्सित प्रयास किया है।

सावन महोत्सव : प्रभात फेरी हरि संकीर्तन करते पहुंची कोटेश्वर महादेव मंदिर

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अजमेर। संन्यास आश्रम के अधिष्ठाता स्वामी शिव ज्योतिष आनंद महाराज के पावन सान्निध्य में बीते 15 साल से नियमित चल रही प्रभात फेरी श्रावण मास के पावन अवसर पर रविवार को फाई सागर रोड स्थित कोटेश्वर महादेव मंदिर पहुंची।

प्रभात फेरी परिवार के संयोजक उमेश गर्ग ने बताया कि कोटेश्वर पहुंचकर संन्यास आश्रम के वेद पाठी बालकों ने वैदिक मंत्रों से महादेव का अभिषेक किया गया। इस अवसर पर प्रभातफेरी परिवार के टीकम शर्मा, आलोक माहेश्वरी, सुनीता शर्मा, किरण वर्मा ने अपने मधुर भजनों से लाभान्वित किया।

महादेव मंदिर पर समाजसेवी दिनेश खंडेलवाल एवं मीनाक्षी खंडेलवाल ने पुष्प वर्षा से स्वागत कर प्रसाद वितरित किया गया। सावन महोत्सव के तहत प्रभात फेरी के सदस्यों द्वारा कोटेश्वर की पहाड़ी पर सावन के झूले एवं शंकर भगवान के भजन प्रस्तुत कर भरपूर नृत्य का आनंद लिया। सभी लहरिया परिधान में अनुपम छवि अनुपम लीला का दर्शन कराया।

प्रभात फेरी में अतुल गुप्ता, सत्यनारायण अग्रवाल, माला गुप्ता, अमर सिंह कुमावत, कैलाश जोशी, सुनील गर्ग, राजेश अग्रवाल, पुनीत गर्ग सहित भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

हैदराबाद में छात्रावास की इमारत से गिरने से इंजीनियरिंग छात्रा की मौत

हैदराबाद। तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के इब्राहिमपट्टनम में शनिवार रात छात्रावास की इमारत से गिरने से इंजीनियरिंग की छात्रा की मौत हो गई।

पुलिस ने आज बताया कि इंजीनियरिंग छात्रा की पहचान राम्या के रूप में हुई है। वह वानापर्थी की रहने वाली थी। वह छात्रावास में रहकर दत्ता इंजीनियरिंग कॉलेज में द्वितीय वर्ष का इंजीनियरिंग कोर्स कर रही थी।

उसने बताया कि शनिवार रात दुर्घटनावश छात्रावास की दूसरी मंजिल से गिरने से छात्रा के सिर पर गंभीर चोट लग गई थी। उसे तुरंत निकट के स्थानीय अस्पताल में ले जाया गया जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरु कर दी हैं।

आईडिया ऑफ इंडिया-13: कंडीशनल स्टे को स्थायी रोक बताना आबू से ज्यादा अधिकारियों की मुसीबत

माउंट आबू में जोनल मास्टर प्लान में नो कंस्ट्रक्शन जोन में स्थित लिमबड़ी कोठी।के सबसे ऊपरी।माले से पतरे हटाकर डाली गई आरसीसी।
माउंट आबू में जोनल मास्टर प्लान में नो कंस्ट्रक्शन जोन में स्थित लिमबड़ी कोठी।के सबसे ऊपरी माले से पतरे हटाकर डाली गई आरसीसी।

सिरोही। बात करीब एक पखवाड़े पहले की है। बुधवार का दिन था। माउंट आबू नगर पालिका परिसर में एक बात निकली तो दूर तक जाने की बजाय वहीं पर सकारात्मक चर्चा चल निकली। अपने मकान की अनुमति के आवेदक ने जब ये कहा कि भवन निर्माण समिति की बैठक हो जाए तो उन्हें अनुमति मिल जाए। इस पर वहीं मौजूद दूसरे नगर पालिका पीड़ित ने कहा कि बैठक होकर अनुमति कैसे मिलेगी कोर्ट से स्टे हुआ है।

यहीं से इस स्टे के होने और नहीं होने की चर्चा निकल पड़ी। तो वे कौनसे कथित स्टे हैं जिनकी आड़ में माउंट आबू नगर पालिका लोगों तक राहत पहुंचने देने को अटका रहे हैं। यदि नगर पालिका अधिकारियों द्वारा बताए स्टे को वाकई रोक मान लें तो एक आदेश माउंट आबू के वर्तमान और पूर्व उपखण्ड अधिकारियों और आयुक्तों को मुसीबत में डाल देगा और दूसरा नगर पालिका आयुक्त को।

क्योंकि जिस न्यायालय का डर बताकर उपखण्ड अधिकारी और आयुक्त माउंट आबू के लोगों को इतना शोषित कर रहे हैं यदि उन्हीं दबे कुचले लोगों में से एक बागी ‘करो या मरो’ कि सोच से उसी न्यायालय में पहुंच गया तो इन अधिकारियों कृत्य खुद उन्हीं पर भारी पड़ जाएंगे।

इसे बताते हैं पहला स्टे

नगर पालिका के पूर्व आयुक्त जितेंद व्यास ने माउंट आबू के उपखण्ड अधिकारी और खुद उनके लिए एक समस्या खड़ी कर दी। उच्च न्यायालय में आए एक रिप्रेसजेंटेशन के जवाब में उन्होंने लिखा था कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के 10 मार्च 2021 के निर्णय के अनुसार माउंट आबू को जोनल मास्टर प्लान अभी लागू नहीं हो पाया है।

सम्भवतः नगर पालिका ने इस गलतफहमी में ये पत्र लिखकर आवेदक के निर्माण के आवेदन को निरस्त कर दिया हो कि लिमबड़ी कोठी के अलावा अन्य किसी के प्रति उनकी कोई जवाबदेही नहीं है।

वैसे ऐसा है नहीं। क्योंकि जिस 10 मार्च के निर्णय का इसमें जिक्र किया गया है उसमें माउंट आबू के मूल मास्टर प्लान में विवादित रही सम्पतियों का निर्णय था। इसमें से कुछ सम्पत्तियों को एनजीटी ने निर्माण योग्य क्षेत्र में मानते हुए जोनल मास्टर प्लान को मोडिफाई करने को कहा था। इसमें कहीं भी ये नहीं लिखा है कि मोडिफिकेशन होने तक शेष सम्पूर्ण जेडएमपी पर स्टे रहेगा।

यदि एक बारगी मान भी लें कि ऐसा है तो इस स्थिति में 25 जून 2009 के निटिफिकेशन के अनुसार ज़ेडएमपी के लंबित रहने तक अनुमतियां मोनिटरिंग कमेटी देगी। मोनिटरिंग कमेटी 2019 से ही पुनर्गठित नहीं हुई है। ऐसे में लिमबड़ी कोठी को वर्तमान उपखण्ड अधिकारी और उनसे पहले के एसडीएम व खुद जितेद्र व्यास द्वारा मरम्मत के नाम पर जारी की गई बेहिसाब निर्माण सामग्री के आदेश और टोकन अवैध हो जाते हैं।

यदि मोनिटरिंग कमेटी को उनके पदेन सदस्यों के माध्यम से यथावत मान भी लेते हैं तो इसमें एक और भारी कमी रह जाती है, जिसका जिक्र अगली खबर में इन अधिकारियों को न्यायालय में कठघरे में खड़े कर देने वाले दस्तावेजों के साथ करेंगे।

हाईकोर्ट वाले दूसरे स्टे की इबारत

नगर पालिका भवन निर्माण समिति की बैठक नहीं आयोजित करने के पीछे एक और स्टे की दलील दे रहा है। जिसे पढ़े और समझे बिना माउंट आबू नगर पालिका के और संघर्ष समिति के सदस्य इस पर यकीन कर रहे हैं। ये आदेश भी 10 मार्च 2021 का ही है। माउंट आबू के ही अतानु जाना, विमल डेंगला, दरिया कंवर आदि की रिट पर राजस्थान हाई कोर्ट के न्यायाधीश पुष्पेंद्र सिंह ने एक अंतरिम आदेश दिया था, जिसमें ये लिखा था…

‘In the meanwhile, the respondent municipal board is directed that it shall not grant any construction permission whatsoever to any party without prior permission of this court till next date.’

अर्थात, तब तक प्रतिवादी नगर पालिका को ये निर्देश दिए जाते हैं कि वो किसी भी पार्टी को अगली तिथि तक न्यायालय की पूर्व अनुमति के निर्माण की अनुमति जारी नहीं करेगी।

इस इंटरिम आदेश के बाद दो तारीखें पड़ी। जिनमें से किसी में भी ये नहीं लिखा है कि पूर्व में दिए स्टे को यथावत रखा जाता है। ऐसे में इस अंतरिम आदेश की अगली तिथि को ही ये कंडीशनल स्टे खत्म हो जाता है। लेकिन, नगर पालिका के पूर्व अधिकारी ये दलील देते रहे कि ये स्टे अब भी एक्जिस्ट कर रहा है। नगर पालिका में सबकुछ बोर्ड के अधीन होता है और जब इस बोर्ड के अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष और सदस्यों यानी पार्षद ही भ्रमित हो जाएं तो फिर उस शहर का उद्धार असम्भव है।

एक बारगी ये मान भी लिया जाए कि हाई कोर्ट का ये वाला स्टे एक्जिस्ट कर रहा है। तो ये स्टे कंडीशनल है। मतलब कि इसके अनुसार न्यायाधीश ने जो निर्देश दिए हैं उसमें ये है कि न्यायालय की पूर्व में अनुमति लेकर निर्माण इजाजत दी जा सकती है।

यानी भवन निर्माण समिति की बैठकें आयोजित करके उसमें  नव निर्माण, पुनर्निर्माण, परिवर्द्धन, परिवर्तन, मरम्मत आदि की लंबित पत्रवलियों को निस्तारित करके हाई कोर्ट की सम्बंधित बेंच को भेजकर उनसे अनुमति जारी करने के आदेश लाए जा सकते हैं।

वैध बेहतर घर और व्यावसायिक भवन मौलिक अधिकार है इसलिए न्यायालय ने भी पूर्णतः रोक नहीं लगाकर उनकी अनुमति लेकर निर्माण इजाजत देने के निर्देश दिए हैं। ये बात अलग है कि शांति धारीवाल के कहे अनुसार एकाधिकार मिलने से तानाशाह हुए माउंट आबू के उपखण्ड अधिकारी और आयुक्त न्यायालय से दो कदम आगे जाकर इस माउंट आबू के लोगों के इस मौलिक अधिकार पर पूर्णतः पाबन्दी लगा देते हैं।

मैथ्यू हडसन-स्मिथ करना चाहते थे सुसाइड, अब विश्व चैंपियनशिप में जीता पदक

यूजीन। विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप की 400 मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीतने वाले ब्रिटेन के मैथ्यू हडसन-स्मिथ ने खुलासा किया है कि वह कोरोना महामारी के दौरान चोट, कर्ज और अकेलेपन के कारण मानसिक तनाव से जूझ रहे थे और आत्महत्या करना चाहते थे।

हडसन-स्मिथ ने शुक्रवार को 44.66 सेकंड में दौड़ को पूरा करते हुए तीसरा स्थान हासिल किया, जबकि अमेरिका के माइकल नॉर्मन और ग्रेनाडा के किरानी जेम्स क्रमशः पहले व दूसरे स्थान पर रहे।

हडसन-स्मिथ ने विश्व चैंपियनशिप में ब्रिटेन का चौथा पदक जीतने के बाद कहा कि मैं 2021 में बुरी तरह मानसिक तनाव से जूझ रहा था। यह बात बहुत लोगों को नहीं पता है, लेकिन मैंने आत्महत्या करने की कोशिश तक की थी।

उन्होंने कहा कि मैं दौड़ते हुए भी अपने दुख के बारे में ही सोचता था। मैं प्रतियोगिताओं में यह जानते हुए हिस्सा लेता था कि मैं अपना 100 प्रतिशत नहीं दे पा रहा हूं। आपके ऊपर बहुत दबाव होता है क्योंकि कई लोगों को आपसे बेहतर की उम्मीद होती है।

ब्रिटिश खिलाड़ी ने बताया कि वह पिछले वर्ष ओलंपिक में हिस्सा नहीं ले पाये जिसके बाद उनके प्रायोजकों ने उन्हें एक-एक करके छोड़ना शुरू कर दिया और अमेरिका में रहते हुए वह कर्ज़ के तले दबते गए।

उन्होंने कहा कि मैं कई कारणों से ओलंपिक में नहीं जा पाया। कोविड के दौरान मैं अमेरिका में फंसा हुआ था। मुझे अमरीका पसंद है लेकिन मैं अपने परिवार के साथ रहना चाहता था। वह मुश्किल वक्त था।

मुझे याद है कि मैंने कई लोगों से खेल छोड़ने के बारे में बात की थी। मेरी मां और अन्य लोगों ने कहा था कि मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए। अब मैंने अपना ऋण भी चुका दिया है, प्यूमा मेरा नया प्रायोजक है और अब मैंने यह पदक भी जीत लिया है। हडसन-स्मिथ ने कहा कि अपना पहला मेडल जीतने के बाद उनका आत्मविश्वास लौट आया है।

उन्होंने कहा कि मैंने अपना नाम देखा और मैं ज़मीन पर गिर गया। ये तीन साल बेहद मुश्किल रहे हैं। विश्व मंच पर यह मेरा पहला पदक है। बहुत से लोग यहां से आगे बढ़ते हैं। कुछ भी संभव है।

लड़कियों के स्कूल हमेशा के लिए नहीं अस्थायी रूप से किए गए बंद : तालिबान

काबुल। अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने छठी से ऊपर की कक्षाओं वाले देश भर के सभी लड़कियों के स्कूल बंद करने के अपने फैसले का यह कहते हुए बचाव किया है कि यह फैसला स्थायी नहीं बल्कि यह रोक अस्थायी है।

अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल कहर बल्खी ने कहा कि लड़कियों के स्कूलों पर लगाई गई यह रोक अस्थायी है, स्थायी नहीं। इसे कभी भी प्रतिबंध की संज्ञा नहीं दी गई है।

इस मामले पर विश्वव्यापी आलोचना का शिकार हो रही अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के पक्ष में तर्क देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि अधिकतर अफगानियों की सोच शिक्षा और महिलाओं को लेकर बहुत कड़ी रही है और इसी कारण लड़कियों के स्कूलों को बंद किया गया है।

समाज का एक बड़ा तबका महिलाओं को लेकर बहुत कड़ी सोच रखता है कि महिलाएं क्या कर सकती हैं और क्या वे नहीं कर सकती हैं और इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार एक समझ विकसित करने की कोशश कर रही है और ऐसा क्रमश: किया जा रहा है।

यह उन लोगों के लिए है जो अफगान नागरिक या व्यक्ति के कुछ आधारभूत इस्लामी अधिकार और मानवाधिकार को नहीं समझ पाते। यह ऐसे लोगों को समझाने के लिए है। यह समाज के उस हिस्से में ज्ञान के अभाव के कारण है। बल्खी ने कहा कि वे इस मामले को सुलझाने का प्रयास कर रहे हैं।

इस बीच पिछले 11 से भी अधिक महीनों से स्कूल बंद होने के कारण घर पर बैठी लड़कियों ने तालिबान से एक बार फिर से स्कूल खोले जान की मांग की है। अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अफगानिस्तान की सत्ता पर जब से तालिबान का कब्ज़ा हुआ है तब से देश में महिलाओं के अधिकारों पर लगातार कुठाराघात हो रहा है।