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सबगुरु राशिफल : 22 जुलाई शुक्रवार को आपके भाग्य में क्या होगा बदलाव

सबगुरु न्यूज। मार्गशीर्ष मास, कृष्ण पक्ष, नवमी तिथि, वार शुक्रवार, सम्वत 2079, वर्षा ऋतु, रवि दक्षिणायन, सुबह 09.32 बजे बाद दशमी तिथि प्रारम्भ।

मेष :- आज आप धार्मिक या शुुुभ प्रसंग में शामिल हो सकते हैं। रिस्की कार्यों से दूर रहें। आपके कार्य सरलतापूर्वक पूर्ण होते रहेंगे। कार्यक्षेत्र में उच्च अधिकारियों को प्रोत्साहन मिल सकता है। यह न केवल आपका मन हल्का करेगा, बल्कि आप दोनों के बीच मतभेद दूर करने में भी मदद करेगा। अपने परिवार के साथ रुखा व्यवहार न करें। यह पारिवारिक शान्ति को भंग कर सकता है। संभव है कि कोई आपसे अपने प्यार का इज़हार करे। कामकाज के मोर्चे पर यह एक मुश्किल दिन हो सकता है। प्रभावशाली लोगों के सहयोग आपका उत्साह दोगुना होगा। विवाद, मतभेद और दूसरों की आप में कमियाँ निकालने की आदत को नजरअंदाज करें।

वृषभ :- अपनी दीर्घकालीन योजनाओं के साथ आगे बढ़ो, जैसा कि पहलुओं का दृढ़ संकल्प और संरचना का पक्ष है नई चीजों की कोशिश करने से डरो मत, खासकर जब आप अपने पसंदीदा लोगों के साथ हों। कार्यक्षेत्र में कोई आपसे दुर्व्यवहार कर सकता है। इसलिए तैयार रहें और प्रतिक्रिया न करें। आपकी लगन और मेहनत पर लोग गौर करेंगे और आज इसके चलते आपको कुछ वित्तीय लाभ मिल सकता है। आपकी ऊर्जा का स्तर ऊँचा रहेगा क्योंकि आपका प्रिय आपने लिए बहुत सारी खुशी की वजह साबित होगा। अपने उद्देश्यों की ओर शान्ति से बढ़ते रहें और सफलता मिलने से पहले अपने पत्ते न खोलें।

सिंह :- नौकरी पेशा के लोगों लिए समय अनुकूल है। आज के दिन आप अत्यधिक संवेदनशील रह सकते हैं। कार्यक्षेत्र की बात की जाए तो आज का दिन कार्यक्षेत्र को लेकर आपके लिए अत्यधिक लाभकारी साबित होगा। आर्थिक लाभ की प्राप्ति होगी। किसी की वाणी तथा बर्ताव की वजह से आपके मन को चोट लग सकती है तथा माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें। आज आप बौद्धिक शक्ति से लेखनकार्य और सृजन कार्य अच्छी तरह से पूरे कर सकेंगे। आपका विचार किसी एक बात पर स्थिर नहीं रहेगा तथा उसमें लगातार परिवर्तन होता रहेगा। मित्रों से सहयोग मिल सकता है। यात्रा-प्रवास हो सके तो न करें।

कन्या :- आज स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही सेहत बिगाड़ सकती है। नकारात्मक विचारों को अपने पर प्रभावी न होने दें। आकस्मिक व्यय होने के संकेत हैं। मध्याह्न के बाद परिस्थिति में कुछ सुधार आ सकता है। स्वभाव में उग्रता रह सकती है। आज के दिन आपको मकान, वाहन, वगैरह के दस्तावेजों को अत्यंत संभालकर रखना होगा। परिवार का माहौल बिगड़े नहीं, इसके लिए वाद-विवाद टालें। माता का स्वास्थ्य बिगड़ेगा। धन-प्रतिष्ठा की हानि होगी। स्वास्थ्य को लेकर ज्यादा चिंता न करें, क्योंकि इससे आपकी बीमारी और बिगड़ सकती है। व्यापार धंधे के लिए भावी योजना सफलतापूर्वक संपन्न होगी।

तुला :- आज के दिन आप चिंता के बोझ से मुक्ति पा लेंगे बहुत अधिक रह सकती है। कला के क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए आज का दिन अत्यधिक लाभदायक सिद्ध होगा। आज के दिन आप परिजनों की तरफ से विशेष ध्यान देने की कोशिश करेंगे। इस समय आपके आर्थिक आयोजन भी पूरे होंगे आपकी इच्छा शक्ति को प्रोत्साहन मिलेगा, क्योंकि आप बहुत पेचीदा हालात से निकलने में कामयाब रहेंगे। भावुक फैसला लेते वक़्त अपनी तार्किकता न छोड़ें। अनुमान नुकसानदेह साबित हो सकता है, इसलिए हर तरह का निवेश करते वक़्त पूरी सावधानी बरतें। आज आपके प्रिय की मनोदशा ज्वार-भाटे की तरह उतार-चढ़ाव भरी होगी।

वृश्चिक :- कभी कभी वैवाहिक जीवन वाकई काफी खीझ पैदा कर सकता है लगता है कि आपके लिए आज कुछ कुछ वैसा ही दिन है। शारीरिक-मानसिक सुख बने रहेंगे। मित्रों और स्वजनों के साथ आज का दिन खूब आनंद और उल्लास से व्यतीत करेंगे। आज मन खुश और शांत रहेगा। जीवनसाथी के प्रति विशेष आकर्षण अनुभव करेंगे, जिससे मधुरता रहेगी। प्रवास की संभावना और आर्थिक लाभ के योग हैं। आज के दिन किसी से छेड़छाड़ या किसी से झगड़ा, वाद-विवाद करने से बचे, इससे भविष्य में आपको परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

धनु :- आपको आज के दिन विशेष रुप से हर प्रकार के कार्य में सफलता प्राप्त होगी लेकिन थोड़ा विलंब भी हो सकता है। धैर्य से काम करें आप अपने तमाम कार्य को जारी रखने की पूरी कोशिश करेंगे आर्थिक आयोजनों में अवरोध दूर होगा। किया गया हर कार्य सफलतापूर्वक पूरा होगा। घर परिवार और निजी जिंदगी से जुड़े कुछ खास काम आज आपके हो सकते हैं। कार्यक्षेत्र में सफलता के योग है। कफ्यूजन दूर करने के लिए दिमाग में नया तरीका आ सकता है। विद्यार्थी के लिए आज का दिन अति उत्तम रहेगा। आज आपको अचानक कही यात्रा करने के लिए जाना पड़ सकता है। इसलिए आज तैयार रहे।

मकर :- आज साधारण सी बात दांपत्य जीवन में कलह का कारण बन सकती है। सांसारिक विषयों पर अपने व्यवहार को उदासीन बनाए रखें। वाद-विवाद से बचें। सामाजिक दृष्टि से अपमानित हो सकते हैं। चिंता के भार से स्वास्थ्य को हानि पहुंचेगी। वाद-विवाद से किसी के साथ संघर्ष हो सकता है। कोर्ट-कचहरी के कार्य में सावधानीपूर्वक कदम उठाएं। भावनाओं के प्रवाह में बहकर आप कोई अविचारी कार्य न कर बैठें, इसका ध्यान रखें। वाणी और व्यवहार में संयम तथा विवेक बनाए रखने की सलाह है। अपने अतिरिक्त खर्चों पर रोक लगाए नहीं तो आपको भविष्य में बहुत सारी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

कुंभ :- आज उधार मांगने वाले लोगों को नजरअंदाज करें। अपनी बातों पर काबू रखें, क्योंकि इसके चलते बड़े बुजुर्ग आहत महसूस कर सकते हैं। बेकार की बातें करके समय बर्बाद करने से बेहतर है कि आप शांत रहें। आज आप अपने आसपास के लोगों के इरादे आसानी से समझ सकते हैं। कोई करीबी व्यक्ति आज आपको बात-बात में खास जानकारी दे सकते हैं। हर चुनौती को अलग करते हुए लगे रहने का समय है। अपने कामकाजी जीवन में अपने संपर्कों का फायदा उठाने में सफल हो सकते हैं। कफ्यूजन की स्थिति कार्यक्षेत्र में निर्मित हो सकती है।

मीन :- आज वही होगा जो आप चाहेंगे। आर्थिक मामलों में मजबूती मिलेगी। आज आप खुद में बदलाव महसूस करेंगे। नौकरी की दिशा में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। नए अवसर पर खुले मन से विचार करना होगा। खुद को किसी भी गलत और गैर जरूरी चीज से दूर रखें, क्योंकि आप उसकी वजह से मुश्किल में फँस सकते हैं। अगर आप किसी विवाद में उलझ जाएँ तो तल्ख़ टिप्पणी करने से बचिए। आपका जीवन-साथी थोड़ा अजीब व्यवहार कर सकता है। लेकिन सब्र का बांध न टूटने दें। स्त्री वर्ग अपनी वाणी पर काबू रखें।

राजनाथ सिंह, अमित शाह ने द्रौपदी मुर्मू के आवास पर जाकर दी बधाई

नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राष्ट्रपति चुनाव में जीत हासिल करने पर द्रौपदी मुर्मू को बधाई दी है। सिंह और शाह ने मुर्मू के आवास पर जाकर उन्हें बधाई दी और इसे देश के लिए गौरवान्वित करने वाला पल बताया।

सिंह ने ट्वीट कर कहा कि राष्ट्रपति चुनाव में प्रभावी जीत दर्ज करने के लिए द्रौपदी मुर्मू जी को बधाई। वह गांव, गरीब, वंचितों के साथ-साथ झुग्गी-झोपड़ियों में भी लोक कल्याण के लिए सक्रिय रही हैं। आज वह उनके बीच से निकल कर सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंची हैं। यह भारतीय लोकतंत्र की ताकत का प्रमाण है।

शाह ने कहा कि एक अति सामान्य जनजातीय परिवार से आने वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन प्रत्याशी द्रौपदी मुर्मू जी का भारत का राष्ट्रपति चुना जाना पूरे देश के लिए अत्यंत गौरव का पल है, उन्हें बधाई देता हूं। यह विजय अन्त्योदय के संकल्प को चरितार्थ करने और जनजातीय समाज के सशक्तीकरण की दिशा में एक मील का पत्थर है।

द्रौपदी मुर्मू जी जिन विषम परिस्थितियों से संघर्ष करते हुए आज देश के इस सर्वोच्च पद पर पहुंची हैं, वह हमारे लोकतंत्र की अपार शक्ति को दर्शाता है। इतने संघर्षों के बाद भी उन्होंने जिस निःस्वार्थ भाव से खुद को देश और समाज की सेवा में समर्पित किया, वह सभी के लिए प्रेरणादायी है। उल्लेखनीय है कि मुर्मू ने राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को पराजित कर जीत दर्ज की है।

कोविंद ने द्रौपदी मुर्मू को बधाई दी

राष्ट्रपति रामनाथ काेविंद ने पदी मुर्मू को राष्ट्रपति चुनाव में जीत दर्ज करने के लिए बधाई दी है। कोविंद ने गुरूवार को राष्ट्रपति चुनाव की मतगणना में मुर्मू के विजयी होने पर ट्वीट संदेश में कहा कि द्रौपदी मुर्मू को देश का 15वां राष्ट्रपति निर्वाचित होने पर हार्दिक बधाई। उल्लेखनीय है कि मुर्मू विपक्ष के साझा उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को हराकर राष्ट्रपति निर्वाचित हुई हैं। कोविंद का कार्यकाल 24 जुलाई को समाप्त हो रहा है।

‘फर्श से अर्श’ तक की यात्रा की कहानी हैं द्रौपदी मुर्मू

‘फर्श से अर्श’ तक की यात्रा की कहानी हैं द्रौपदी मुर्मू

द्रौपदी मुर्मू ने रचा इतिहास, राष्ट्रपति चुनाव में दर्ज की रिकॉर्ड जीत

नई दिल्ली। द्रौपदी मुर्मू (64) देश की 15वीं राष्ट्रपति होंगी। वह इस पद पर पहुंचने वाली आदिवासी समाज की पहली नेता हैं। मुर्मू ने राष्ट्रपति पद के चुनाव में विपक्ष के साझा उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को भारी अंतर से हराया। मुर्मू देश की राष्ट्रपति बनने वाली दूसरी महिला है। इससे पहले प्रतिभा पाटिल देश की पहली महिला राष्ट्रपति चुनी गई थी।

मतगणना के नतीजों के औपचारिक घोषणा होने से पहले ही राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) उम्मीदवार मुर्मू ने विपक्षी उम्मीदवार के खिलाफ काफी बड़ी बढ़त बना ली थी और उन्हें देशभर से बधाईयां मिलनी शुरू हो गई थीं।

राष्ट्रपति चुनाव के निर्वाचन अधिकारी और राज्यसभा के महासचिव पीसी मोदी ने गुरूवार देर रात मतगणना पूरी होने के बाद मुर्मू को निर्वाचित घोषित किया। उन्होंने कहा कि मुर्मू को पहली प्राथमिकता वाले 2824 मत मिले हैं जबकि सिन्हा को पहली प्राथमिकता वाले 1877 मत मिले हैं। उन्होंने कहा कि द्रौपदी मुर्मू के मत मूल्य 676803 जबकि सिन्हा के मत मूल्य 380177 रहे।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति चुनाव में जीत के लिए 528491 मत मूल्य की जरूरत थी जबकि मूर्मू को इससे कहीं अधिक मत मिले हैं। उन्होंने कहा कि इसलिए निर्वाचन अधिकारी की हैसियत से मुर्मू को देश की नई राष्ट्रपति निर्वाचित घोषित करता हूं। राष्ट्रपति चुनाव में गत सोमवार को मत डाले गए थे। मोदी ने बताया कि चुनाव में कुल 4754 मत पड़े थे जिनमें से 4701 वैध पाए गए थे जबकि 53 निरस्त पाए गए थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत ने देश के सूदूर पूर्वी इलाके के एक गांव में पैदा एक आदिवासी महिला को 1.3 अरब की आबादी वाले विशाल लोकतंत्र के सर्वोच्च पद के लिए चुन कर आज एक इतिहास रचा है।

इस चुनाव में मुर्मू को राजग में शामिल दलों के अलावा कई विपक्षी दलों के सांसदों और विधायकों का भी समर्थन मिला। मतगणना के रुझानों से यह झलक मिली कि जनप्रतिनिधियों का उनकी पार्टी लाइन से ऊपर उठकर समर्थन मिला है।

प्रधानमंत्री मोदी ने पार्टी लाइन से ऊपर उठकर मुर्मू का समर्थन करने वाले सांसदों और विधायकों को धन्यवाद देते हुए ट्वीटर पर कहा कि उनकी जीत हमारे लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत है।

मोदी और भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने मुर्मू को जीत की बधाई देने वाले पहले लोगों में थे। दोनों नेताओं ने नई दिल्ली में मुर्मू के निवास स्थान पर जाकर उन्हें पुष्प गुच्छ भेंट किया और जीत की बधाई दी। विपक्ष के उम्मीदवार सिन्हा ने मतगणना की अंतिम घोषणा से पहले ही मुर्मू को जीत की बधाई दे दी थी।

र्मू का जीवन संघर्ष पथ से शिखर पर पहुंचने की उतार-चढ़ाव भरी एक यात्रा की कहानी है। उन्होंने मयूरभंज जिले के आदिवासी गांव में जन्म लेकर जीवन के प्रारंभिक संघर्षों के बीच पढ़ाई और सरकारी नौकरी की और अध्यापन कार्य किया। उनका राजनीतिक जीवन 90 के उत्तरार्ध में शुरू हुआ, जब उन्होंने भाजपा की सदस्यता ली और स्थानीय निकाय में पार्षद बनीं।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का कार्यकाल 24 जुलाई को सम्पन्न हो रहा है। उनके बाद इस संवैधानिक पद और सेना के सर्वोच्च कमांडर का दायित्व मुर्मू के हाथ में होगा।

‘फर्श से अर्श’ तक की यात्रा की कहानी हैं द्रौपदी मुर्मू

सोनिया गांधी को ईडी के नोटिस के खिलाफ जयपुर में कांग्रेस का प्रदर्शन

जयपुर। कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के नोटिस के विरोध में राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा के नेतृत्व में जयपुर स्थित ईडी कार्यालय के बाहर प्रदेश कांग्रेस द्वारा धरना-प्रदर्शन किया गया।

धरने को सम्बोधित करते हुए डोटासरा ने कहा कि देश की आजादी से लेकर आज के स्वर्णिम भारत के निर्माण में कांग्रेस का योगदान सर्वविदित है। उन्होंने कहा कि जिस सोच एवं बलिदान की विचारधारा के आधार पर कांग्रेस ने देश की आजादी की लड़ाई लड़ी उसी भावना से कार्य करते हुए कांग्रेस ने 36 कौमों को साथ लेकर देश को आगे बढ़ाने तथा सामाजिक समरसता को कायम रखने का कार्य किया।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस की विचारधारा की इस महान विरासत को आगे बढ़ाने का काम साल दर साल कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी एवं कांग्रेस नेता राहुल गांधी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, एवं राजीव गांधी ने भारत को दुनिया में पहचान दिलाई, किन्तु देश का दुर्भाग्य है कि आज ऐसे लोग केन्द्रीय सत्ता में काबिज हुए हैं जो स्वतंत्रता आन्दोलन में जब कांग्रेस कार्यकर्ता अंग्रेजों से लड़ रहे थे तब ये लोग देश के खिलाफ जाकर अंग्रेजों की मुखबिरी कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि झूठे जुमले एवं नारे देकर भाजपा देश की सत्ता पर काबिज हुई, किन्तु सत्ता में आने के बाद इन्होंने केवल देश की सामाजिक समरसता के ताने-बाने तथा बाबा साहब द्वारा दिये गये संविधान पर चोट पहुंचाने के साथ लोकतंत्र को कमजोर करने का काम किया है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कांग्रेस मुक्त भारत बनाने का नारा दिया है, किन्तु देश को कांग्रेस मुक्त तो नहीं कर पाए, लेकिन कांग्रेस के प्रमुख नेताओं को परेशान-हैरान करने का कार्य करने लग गए।

डोटासरा ने कहा कि देश में अनेक वर्षों तक कांग्रेस की सरकार रही हैं, किन्तु मोदी को अपने आठ साल के शासन में पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकारों के खिलाफ उंगली उठाने हेतु एक मुद्दा भी नहीं मिला, इसलिए नेशनल हैराल्ड का तथ्यहीन मुद्दा उठाया है जबकि स्वतंत्रता आन्दोलन में देश की जनता की आवाज बनने के साथ आजादी की लड़ाई में प्रमुख भूमिका नेशनल हैराल्ड ने निभाई है।

ED ने सोनिया गांधी को पूछताछ के लिए फिर 25 जुलाई को बुलाया

जीएसटी को लेकर कांग्रेस समेत विपक्ष पर सरकार का करारा पलटवार

‘फर्श से अर्श’ तक की यात्रा की कहानी हैं द्रौपदी मुर्मू

नई दिल्ली। भारत के पन्द्रहवें राष्ट्रपति का दायित्व संभालने जा रहीं आदिवासी महिला द्रौपदी मुर्मू का जीवन ‘फर्श से अर्श’ तक की यात्रा की एक कहानी है।

चौसठ वर्षीय मुर्मू ने इस यात्रा में कई उतार-चढ़ाव देखे, उन्होंने सार्वजनिक जीवन भारतीय जनता पार्टी के एक साधारण कार्यकर्ता और स्थानीय निकाय के पार्षद के रूप में शुरू किया और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के सर्वोच्च पद का दायित्व संभालने जा रही हैं।

मुर्मू का जन्म ओडिशा के मयूरभंज जिले के पिछड़े एवं आदिवासी इलाके के छोटे से गांव बैदापोसी में हुआ था। उन्होंने गृह जिले में ही प्रारंभिक शिक्षा हासिल की। इसके बाद उन्होंने भुवनेश्वर के रामादेवी महिला महाविद्यालय से स्नातक डिग्री ली।

ओडिशा सरकार में करीब पांच साल बतौर क्लर्क की नौकरी करके मुर्मू ने अपने कैरियर की शुरुआत की। इसके बाद वह रायरंगपुर के अरबिंदो इंटीग्रल एजुकेशन सेंटर में अध्यापिका बनीं, यहां तक उनका राजनीति से कोई वास्ता नहीं था। उन्होंने 1997 में भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की। उन्होंने उसी साल रायरंगपुर नगर पंचायत में पार्षद का चुनाव जीता।

देश के सबसे बड़े आदिवासी समूह ‘संथाल’ से ताल्लुक रखने वाली मुर्मू ने अपने काम से जनता के बीच पहचान बनाई और उन्हें वर्ष 2000 में ओडिशा की रायरंगपुर विधानसभा सीट से विधायक चुना गया। उन्होंने 2000-04 के दौरान मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के मंत्रिमंडल में पहले वाणिज्य एवं यातायात और बाद में मत्स्य एवं पशुपालन विभाग मंत्रालय का कार्यभार भी संभाला।

मुर्मू 2006 में ओडिशा भाजपा की अनुसूचित जनजाति इकाई की अध्यक्ष बनीं। वर्ष 2009 में उन्हें एक बार फिर रायरंगपुर सीट से विधायक चुना गया। उनका जीवन तब सहसा थम सा गया, जब 2009 में उनके बड़े पुत्र का रहस्यमय परिस्थितियों में निधन हो गया। कुछ वर्ष बाद उनका दूसरा बेटा और पति भी इस दुनिया को छोड़ गए। मुर्मू ने इसके बाद कई बार कहा कि उनके जीवन में अब कुछ नहीं बचा।

समय का पहिया घूमा और ‘ओडिशा की बेटी’ मुर्मू 2015 में पड़ोसी राज्य झारखंड की राज्यपाल बनाई गईं। उन्होंने यह ज़िम्मेदारी जुलाई 2021 तक संभाली। राजग ने कई नामों पर विचार-विमर्श कर पिछले महीने उन्हें राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया था। वह गुरुवार को विपक्ष के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को पराजित कर देश की प्रथम नागरिक बनीं।

राज्यसभा में विपक्ष की प्रतीक्षा, सरकार ने रोका विधेयक

नई दिल्ली। सरकार ने गुरुवार को राज्यसभा में विपक्ष की प्रतीक्षा में महत्वपूर्ण ‘सामूहिक संहार के आयुध और उनकी परिदान प्रणाली (विधि विरुद्ध क्रियाकलापों का प्रतिषेध) संशाेधन विधेयक 2022’ पर चर्चा रोक दी और सदन की कार्यवाही कल तक लिए स्थगित कर दी गई।

पीठासीन अधिकारी भुवनेश्वर कालिता ने भोजनावकाश के बाद सदन की कार्यवाही शुरू करते हुए ‘सामूहिक संहार के आयुध और उनकी परिदान प्रणाली (विधि विरुद्ध क्रियाकलापों का प्रतिषेध) संशाेधन विधेयक 2022’ पर चर्चा आरंभ कराने का प्रयास किया तो कांग्रेस के सदस्य खड़े हो गए और महंगाई तथा आवश्यक वस्तुओं पर जीएसटी की दर वृद्धि के मुद्दे पर चर्चा की मांग करने लगे।

कांग्रेस के समर्थन में आम आदमी पार्टी, वामदल, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी तथा विपक्षी दलों के सदस्य भी खड़े हो गये। कालिता ने हालांकि इसकी अनुमति नहीं दी तो कांग्रेस समेत प्रमुख विपक्षी दलाें के सदस्य सदन से बहिर्गमन कर गए। इसके बाद सदन में विधेयक पर चर्चा शुरू हो गई।

लगभग 40 मिनट की चर्चा के बाद संसदीय कार्यमंत्री वी मुरलीधरन ने कहा कि यह बहुत ही महत्वपूर्ण विधेयक है और सरकार इसपर सभी पक्षों के विचार लेना चाहती है। लेकिन विपक्षी दलों के सदस्य सदन में मौजूद नहीं है इसलिए विधेयक पर चर्चा रोक देनी चाहिए और बाकी चर्चा सोमवार को या अन्य किसी और दिन की जा सकती है। इससे विपक्षी दलों के सदस्यों को भी विधेयक पर अपने विचार रखने का मौका मिलेगा। उन्होंने कहा कि सरकार विधेयक को विपक्ष के सहयोग से पारित कराना चाहती है।

मुरलीधरन के विचार से पीठासीन अधिकारी ने सहमति व्यक्त की और सदन की कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित कर दी गई। इससे पहले संसदीय कार्य राज्य मंत्री ने सदन में मौजूद विदेशमंत्री एस जयशंकर से विचार विमर्श किया।

भारतीय जनता पार्टी के प्रकाश जावडेकर, वाईएसआरसीपी के अयोध्यारामी रेड्डी, राष्ट्रीय जनता दल के मनोज कुमार झा, जनतादल युनाईटेड के रामनाथ ठाकुर, तेलुगू देशम पार्टी के के. रवींद्र कुमार, अन्नाद्रमुक के एम. थंबीदुरई, बीजू जनता दल के प्रशांत नंदा और द्रमुक के पी. विल्सन ने विधेयक पर चर्चा में हिस्सा लिया। सभी सदस्यों ने विधेयक का समर्थन किया।

ED ने सोनिया गांधी को पूछताछ के लिए फिर 25 जुलाई को बुलाया

नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने नेशनल हेराल्ड मामले में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से गुरुवार को यहां पहले दौर की पूछताछ की और आगे की पूछताछ के लिए उन्हें 25 जुलाई को तलब किया है। जांच एजेंसी के अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

सोनिया गांधी से एजेंसी के मुख्यालय करीब तीन घंटे तक पूछताछ की गई। उन्हें ईडी के समन के खिलाफ पार्टी के कार्यकर्ताओं ने राजधानी दिल्ली और देश के अन्य स्थानों पर प्रदर्शन किए। दिल्ली में प्रदर्शनकारियों से निपटने के लिए पुलिस को काफी जद्दोजेहद करनी पड़ी। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर पानी की बौछार का भी प्रयोग किया।

एजेंसी ने कांग्रेस अध्यक्ष को धन शोधन निवारक अधिनियम के तहत इस मामले की जांच के सिलसिले में पहले 23 जून को तलब किया था, लेकिन उस समय वह कोरोना से संक्रमित होने के कारण स्वस्थ नहीं थीं, इसलिए उनसे पूछताछ कुछ समय के लिए टाल दी गई थी।

इस बीच कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता जयराम रमेश ने आज शाम दावा किया कि ईडी के पास आज की पूछताछ में सोनिया गांधी से पूछने के लिए कोई सवाल नहीं बचा था और अधिकारियों ने उन्हें जाने के लिए कह दिया था।

रमेश ने ट्वीट किया कि ईडी ने कहा हमारे पास कोई सवाल नहीं, आप जा सकती हैं, मगर सोनिया जी ने कहा कि आपके जितने सवाल हैं, पूछिए, मैं रात आठ-नौ बजे तक रुकने को तैयार हूं। मैं (जयराम रमेश) साफ कर दूं कि सोनिया जी ने पूछताछ खत्म करने का कोई निवेदन नहीं किया।

कांग्रेस नेता के अनुसार सोनिया गांधी ने कहा कि वह कोविड-19 से संक्रमित थी और उन्हें दवा लेने की जरूरत होती है, इसलिए उन्हें पहले ही अगली पूछताछ के बारे में बता दें। रमेश ने कहा कि एजेंसी ने कहा कि शुक्रवार को उनसे पूछताछ के लिए उनके पास कुछ नहीं है। इसपर कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि वह सोमवार को फिर आऩे को तैयार हैं।

ईडी के एक अधिकारी ने कहा कि सोनिया गांधी से पूछताछ की अगली तिथि उनके अनुरोध पर 25 जुलाई रखी गई है। इससे पहले उन्हें 26 जुलाई को बुलाया जा रहा था। इस मामले को लेकर ओडिशा विधानसभा में कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी सदस्यों के बीच बहस हुई, जिससे सदन को तीन बार स्थगित करना पड़ा।

अविवाहित होना गर्भपात रोकने का आधार नहीं : सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। सुप्रीमकोर्ट ने गुरुवार को कहा कि सिर्फ अविवाहित होने के कारण किसी महिला को गर्भपात से नहीं रोका जा सकता। न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने 25 वर्षीया एक अविवाहित महिला द्वारा दिल्ली हाईकोर्ट के 16 जुलाई के एक फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के बाद अपना यह फैसला सुनाया।

पीठ ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि एक महिला को सिर्फ इसलिए अपनी गर्भावस्था को समाप्त करने के अवसर से वंचित नहीं किया जा सकता है, क्योंकि वह अविवाहित है।

याचिकाकर्ता महिला ने हाईकोर्ट के आदेश पर सवाल उठाया था, जिसमें उसने अपने 24 सप्ताह के भ्रूण को उसकी (महिला की) सहमति से संबंध के आधार पर गर्भपात करने की अनुमति का अनुरोध अस्वीकार कर दिया गया था।

महिला ने अपनी याचिका में कहा था कि उसके लिए बच्चे को पालना मुश्किल था, क्योंकि उसके साथी ने उससे शादी करने से इनकार कर दिया था। याचिकाकर्ता ने यह भी कहा था कि वह अपने किसान माता-पिता के पांच भाई-बहनों में एक है।

महिला ने कहा था कि अविवाहित होने पर बच्चे को जन्म देने के कारण सामाजिक बहिष्कार और मानसिक पीड़ा का भी उसे सामना करना पड़ेगा। उसने यह भी कहा था कि वह सिर्फ एक कला स्नातक और उसके पास रोजी रोजगार का कोई जरिया नहीं है। लिहाजा वह बच्चे के पालन पोषण के लिए पर्याप्त साधन नहीं जुटा पाएगी।

शीर्ष न्यायालय अदालत की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि 2021 मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट में किए गए संशोधन में अविवाहित महिला को भी शामिल करने के लिए पति के बजाय पार्टनर शब्द का इस्तेमाल किया गया था।

शीर्ष अदालत ने कहा कि कानून का इरादा वैवाहिक संबंधों से उत्पन्न होने वाली स्थितियों के लाभों को सीमित करना नहीं था। वास्तव में नया कानून एक विधवा या तलाकशुदा महिला को 20-24 सप्ताह की अवधि में गर्भावस्था को समाप्त करने की अनुमति देता है।

दरअसल, उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा था कि याचिकाकर्ता को अवांछित गर्भधारण की अनुमति देना संसदीय मंशा के विरुद्ध होगा।

शीर्ष न्यायालय ने कहा कि अधिनियम के तहत लाभों से केवल महिला के अविवाहित होने के आधार पर इनकार नहीं किया जा सकता है। विवाहित और अविवाहित महिला के बीच के अंतर का उद्देश्य से कोई संबंध नहीं है। उच्च न्यायालय ने इस मामले में अनुचित प्रतिबंधात्मक दृष्टिकोण अपनाया था।

शीर्ष न्यायालय ने दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के प्रमुख को शुक्रवार को एमटीपी अधिनियम की धारा 3 (2) (डी) के प्रावधानों के तहत एक मेडिकल बोर्ड का गठन करने का निर्देश दिया है।

इसके साथ ही याचिकाकर्ता महिला की जांच के लिए मेडिकल बोर्ड का गठन करने का निर्देश दिया गया है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या उस महिला का गर्भपात उसके जीवन को खतरे में डाले बिना सुरक्षित रूप से किया जा सकता है। शीर्ष न्यायालय की पीठ ने कानून के प्रावधानों की व्याख्या पर केंद्र को नोटिस जारी किया।

उपराष्ट्रपति चुनाव के मतदान में हिस्सा नहीं लेगी तृणमूल कांग्रेस

कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस ने मार्गरेट अल्वा को उपराष्ट्रपति चुनाव में विपक्षी उम्मीदवार के रूप में चुने जाने पर आपत्ति जताते हुए गुरुवार को घोषणा की कि वह छह अगस्त को होने वाले मतदान से अलग रहेगी।

तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी की मौजूदगी में प्रेस कांफ्रेंस में पाटी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी नीत सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के उम्मीदवार जगदीप धनखड़ के खिलाफ विपक्ष के उम्मीदवार के रूप में मार्गरेट अल्वा का नाम उनकी पार्टी से परामर्श किए बिना घोषित किया गया था। उन्होंने कहा कि बैठक में उपस्थित संसद के दोनों सदनों के अधिकांश सांसदों ने चुनाव में मतदान से दूर रहने के पक्ष में अपनी राय व्यक्त की है।

बनर्जी ने कहा कि हमारे 85 प्रतिशत सांसदों ने चुनाव से दूर रहने के पक्ष में अपनी राय व्यक्त की है। इसलिए तृणमूल कांग्रेस उपराष्ट्रपति चुनाव में मतदान में हिस्सा नहीं लेगी। उन्होंने कहा कि अल्वा को विपक्षी उम्मीदवार के रूप में चुनने की पूरी प्रक्रिया के दौरान तृणमूल कांग्रेस से सलाह नहीं ली गई। उन्होंने कहा कि हमें किसी नाम से एलर्जी नहीं है। वास्तव में बनर्जी के साथ अल्वा के बहुत अच्छे व्यक्तिगत संबंध हैं, लेकिन इस तरह के राजनीतिक निर्णय व्यक्तिगत समीकरणों के आधार पर नहीं लिए जा सकते।

उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस ने देश के दूसरे सबसे बड़े पद के लिए विपक्ष के उम्मीदवार के तौर पर तीन-चार नामों का भी प्रस्ताव रखा था, लेकिन अंतिम चुनाव होने से पहले हमें पूरी तरह से अंधेरे में रखा गया था। हम विपक्षी उम्मीदवार के चयन के तरीके के खिलाफ हैं।

उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी वैचारिक कारणों से धनखड़ का समर्थन नहीं कर सकती। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में उन्होंने पिछले तीन वर्षों में लगातार बंगाल के लोगों पर हमला किया। इसलिए उनकी पार्टी ने सर्वसम्मति से राजग उम्मीदवार का समर्थन नहीं करने का फैसला किया है। उन्होंने हालांकि इस बात से सहमति नहीं जताई कि तृणमूल कांग्रेस के फैसले से भाजपा से मुकाबला करने में विपक्षी एकता टूट जाएगी।

यह पूछे जाने पर कि क्या उनकी पार्टी के फैसले से धनखड़ को अतिरिक्त फायदा होगा, बनर्जी ने पलटवार करते हुए कहा कि मुझे अंकगणित दिखाओ। हमारे फैसले से उन्हें क्या फायदा होता है। संभावनाएं पहले से ही उनके पक्ष में हैं। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी आने वाले दिनों में अपने भाजपा विरोधी रुख को और अधिक आक्रामक तरीके से आगे बढ़ाएगी।

इस बीच तृणमूल कांग्रेस के इस आश्चर्यजनक फैसले की कांग्रेस और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने कड़ी आलोचना की है। वहीं भाजपा ने भी देश के दूसरे सर्वोच्च पद के लिए लोकतांत्रिक चुनाव से दूर रहने के लिए तृणमूल कांग्रेस की खिंचाई की।

मुख्यमंत्री योगी से मिलने के बाद बोले दिनेश खटीक, आगे काम करता रहूंगा

लखनऊ। दलित होने के कारण विभाग में उपेक्षा का आरोप लगाते हुए इस्तीफे की पेशकश करने वाले उत्तर प्रदेश के जलशक्ति राज्यमंत्री दिनेश खटीक ने गुरूवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात करने के बाद कहा कि वह आगे भी काम करते रहेंगे।

खटीक ने आज शाम मुख्यमंत्री योगी से उनके सरकारी आवास पांच कालीदास मार्ग पर मुलाकात की। करीब 40 मिनट की इस मुलाकात के बाद बाहर निकले राज्यमंत्री ने पत्रकारों से संक्षिप्त बातचीत में कहा किजीरो टालरेंस पर मुख्यमंत्री जी काम कर रहे हैं और करते रहेंगे और आगे हम भी काम करते रहेंगे। मुख्यमंत्री के सामने मैने अपने विषय और मुद्दे रख दिए हैं और उन पर कार्रवाई होगी।

हालांकि दिनेश खटीक ने यह नहीं बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री योगी के सामने कौन से मुद्दे और विषय रखें है और उन्हे किस प्रकार की कार्रवाई मिलने का आश्वासन दिया है।

गौरतलब है कि दिनेश खटीक ने बुधवार को आरोप लगाया था कि दलित होने के कारण विभाग में उन्हें कोई महत्व नहीं दिया जाता है और उन्होने इसकी शिकायत केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह से करते हुए अपने इस्तीफे की भी पेशकश कर दी थी।

शाह को भेजे पत्र में खटीक ने कहा था कि जल शक्ति विभाग में दलित समाज का राज्य मंत्री होने के कारण मेरे किसी भी आदेश पर कोई कार्यवाही नहीं की जाती है, न ही मुझे किसी बैठक की सूचना दी जाती है, न ही विभाग में कौन-कौन सी योजनाएं वर्तमान में संचालित है तथा उस पर क्या कार्यवाही हो रही है इत्यादि कोई सूचना अधिकारियों द्वारा नहीं दी जाती है। जिसके कारण राज्य मंत्री को विभाग के बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं हो पाती है। सम्बंधित विभाग के अधिकारी राज्य मंत्री को केवल विभाग द्वारा गाड़ी उपलब्ध करा देना ही राज्य मंत्री का अधिकार समझते हैं।

खटीक का आरोप था कि उनके विभाग में स्थानांतरण सत्र में बहुत बड़ा भ्रष्टाचार किया गया है। उन्होंने अधिकारियों द्वारा उनकी बात को अनसुना करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी की भ्रष्टाचार के विरुद्ध ‘जीरो टारलेंस’ नीति को ध्यान में रखते हुए तबादलों में जब भ्रष्टाचार होने की बात उनके संज्ञान में आई, तब उन्होंने तबादलों की सूचना गत नौ जुलाई को अधिकारियों से मांगी, लेकिन अब तक उसका कोई जवाब नहीं मिला।