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वरिष्ठ नेता रामदास कदम ने शिव सेना से इस्तीफा दिया

रत्नागिरी। उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना को बड़ा झटका देते हुए वरिष्ठ नेता रामदास कदम ने सोमवार को पार्टी से इस्तीफा दे दिया।

मुख्यमंत्री बने एकनाथ शिंदे के विद्रोह के बाद, शिव सेना के कई नेता विद्रोही नेता शिंदे का समर्थन कर रहे हैं और अब रत्नागिरी के वरिष्ठ नेता कदम शिव सेना प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पर नाराजगी व्यक्त करते हुए पार्टी से इस्तीफा दे दिया। दिलचस्प बात यह है कि कदम के पुत्र एवं गिहागर-दापोली के विधायक योगेश कदम, पहले से ही शिंदे के शिविर में हैं।

पिछले कई दिनों से कदम, ठाकरे की कार्यशैली से नाखुश थे, लेकिन उनके पुत्र ने भी विद्रोही समूह का समर्थन किया लेकिन कदम, ठाकरे का समर्थन कर रहे थे। कदम को विधान परिषद का टिकट नहीं मिला। वह दिवंगत शिव सेना प्रमुख बाल ठाकरे के सक्रिय शिवसैनिक थे और 2005 से 2009 के दौरान विपक्ष के नेता थे, जबकि देवेंद्र फडनवीस सरकार में पर्यावरण मंत्री थे।

ठाकरे को लिखे अपने त्याग पत्र में कदम ने दावा किया कि दिवंगत बाल ठाकरे ने उन्हें शिव सेना नेता के रूप में चुना था, लेकिन उनके (बाला साहब ठाकरे) के निधन के बाद किसी भी पद का कोई मूल्य नहीं था, जबकि मुख्यमंत्री बनने के बाद ठाकरे उनके (कदम) और अन्य वरिष्ठ नेताओं को विश्वास में लेना चाहिए था।

कदम ने अपने पत्र में यह भी कहा कि उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि उन्होंने (उद्धव ठाकरे) संवाददाताओं के सामने बात नहीं करने का आदेश क्यों दिया।

जयपुर में क्रीड़ा भारती की अखिल भारतीय चिंतन बैठक संपन्न

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जयपुर। क्रीड़ा भारती की तीन दिवसीय अखिल भारतीय चिंतन बैठक जयपुर में आयोजित की गई। इसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरकार्यवाह भैयाजी जोशी, क्रीड़ा भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष गोपाल सैनी, राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष एवं विधायक चेतन्य काश्यप तथा राष्ट्रीय महामंत्री राज चौधरी सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।

15 से 17 जुलाई तक आयोजित तीन दिवसीय बैठक में क्रीड़ा भारती के आगामी कार्यक्रमों को लेकर विचार विमर्श हुआ। बैठक में क्रीड़ा भारती हरियाणा प्रांत के अध्यक्ष और ओलंपिक पदक विजेता योगेश्वर दत्त, इंदौर के अर्जुन पुरस्कार विजेता कुश्ती कोच व मालवा प्रांत अध्यक्ष कृपाशंकर बिश्नोई सहित 25 प्रांतों के 50 से अधिक प्रतिनिधि मण्डल ने भाग लिया। बैठक का समापन रविवार को हो गया।

ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में पूजा की याचिका पर सुनवाई को सहमत सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय वाराणसी में श्री काशी विश्वनाथ मंदिर से सटे विवादित ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में कथित रूप से पाए गए ‘शिवलिंग’ के दर्शन-पूजन की अनुमति की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करेगा।

मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना की अध्यक्षता वाली पीठ ने सोमवार को विशेष उल्लेख के दौरान वकील विष्णु शंकर जैन की शीघ्र सुनवाई की गुहार स्वीकार करते हुए कहा कि वह याचिका पर 21 जुलाई को सुनवाई करेगा।

शीर्ष न्यायालय में सुनवाई के दौरान जैन ने कहा कि याचिका में ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के अंदर पाए गए शिवलिंग की पूजा और दर्शन के अलावा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार (जीपीआर) सर्वेक्षण और कार्बन डेटिंग करने का निर्देश देने की भी मांग की गई है।

उन्होंने पीठ से इस मामले को 21 जुलाई को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का अनुरोध करते हुए कहा कि मुस्लिम पक्ष द्वारा सर्वेक्षण को चुनौती देने वाली अपील पर वाराणसी की जिला अदालत अदालत में 21 जुलाई को सुनवाई है। इसके बाद शीर्ष अदालत ने 21 जुलाई को मामले को सूचीबद्ध करने के जैन के अनुरोध को स्वीकार कर लिया।

शीर्ष न्यायालय ने गधा 20 मई को हिंदू पक्षों द्वारा ज्ञनवापी मस्जिद में पूजा के अधिकार की मांग करने वाली याचिका की कार्यवाही वाराणसी के जिला न्यायाधीश को स्थानांतरित कर दी थी।

शीर्ष न्यायालय ने हालांकि 17 मई के अपने अंतरिम आदेश में शिवलिंग की सुरक्षा का निर्देश दिया था। साथ ही, मुसलमानों को नमाज अदा करने की व्यवस्था अगले 8 सप्ताह तक जारी रखने को कहा था।

सात महिला याचिकाकर्ताओं ने 16 मई 2022 के एडवोकेट कमिश्नर की देखरेख में किए गए सर्वेक्षण के दौरान कथित रूप से पुराने मंदिर परिसर के भीतर मौजूद शिवलिंग के दर्शन एवं प्रतीकात्मक पूजा के लिए श्री काशी विश्वनाथ ट्रस्ट की वेबसाइट पर लाइव स्ट्रीम के वास्ते उपकरण स्थापित करने के लिए केंद्र सरकार को निर्देश देने की गुहार लगाई गई है।

आत्मनिर्भरता बेहद जरूरी, देश की रक्षा अब सीमाओं तक सीमित नहीं : मोदी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज कहा कि देश की रक्षा अब सिर्फ सीमाओं तक सीमित न होकर बल्कि बहुत व्यापक हो गई है इसलिए रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बहुत जरूरी है जिसे ध्यान में रखकर सरकार एक नए रक्षा इकोसिस्टम का विकास कर रही है।

मोदी ने सोमवार को यहां नौसेना के पहले स्वावलंबन सेमिनार को संबोधित करते हुए कहा कि मौजूदा दौर में राष्ट्रीय सुरक्षा के खतरे बहुत व्यापक हो गए हैं और युद्ध के तौर-तरीके भी बदल रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले हम सिर्फ जमीन, समुद्र और आकाश तक ही अपने डिफेंस की कल्पना करते थे। अब दायरा अंतरिक्ष की तरफ बढ़ रहा है, साइबरस्पेस की तरफ बढ़ रहा है, आर्थिक, सामाजिक स्पेस की तरफ बढ़ रहा है। जैसे-जैसे भारत ग्लोबल स्टेज पर खुद को स्थापित कर रहा है, वैसे-वैसे दुष्प्रचार तथा अपप्रचार के माध्यम से लगातार हमले हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि देश को आत्मनिर्भरता हासिल कर हमारे हितों को हानि पहुंचाने वाली ताकतें चाहे देश में हों या फिर विदेश में, उनकी हर कोशिश को नाकाम करना है। उन्होंने कहा कि इसके लिए हर नागरिक को जागरूक करना भी आवश्यक है।

इस मौके पर 75 स्वदेशी प्रौद्योगिकी तथा उत्पादों को देश को समर्पित किए जाने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह पहला कदम है और इस संख्या को लगातार बढाने के लिए काम करना है। उन्होंने कहा कि आपका लक्ष्य होना चाहिए कि भारत जब अपनी आजादी के 100 वर्ष का पर्व मनाए, उस समय हमारी नौसेना एक अभूतपूर्व ऊंचाई पर हो।

आजादी से पहले देश के रक्षा क्षेत्र की मजबूती का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि हमारी तोपों और मशीनगनों को श्रेष्ठ माना जाता था और बहुत बड़ी संख्या में इनका निर्यात किया जाता था। उन्होंने कहा कि हमारी होवित्जर तोपों, इशापुर राइफल फैक्ट्री में बनी मशीनगनों को श्रेष्ठ माना जाता था। हम बहुत बड़ी संख्या में एक्सपोर्ट किया करते थे। लेकिन फिर ऐसा क्या हुआ कि एक समय में हम इस क्षेत्र में दुनिया के सबसे बड़े आयातक बन गए?

भारत का रक्षा क्षेत्र आज़ादी से पहले भी काफी मजबूत हुआ करता था। आज़ादी के समय देश में 18 आयुध फैक्ट्री थीं, जहां तोप समेत कई तरह के सैनिक साजो-सामान हमारे देश में बना करते थे। दूसरे विश्व युद्ध में रक्षा उपकरणों के हम एक अहम सप्लायर थे।

उन्होंने कहा कि इस स्थिति से बाहर निकलने के लिए सरकार बीते दशकों से सीख लेते हुए नए इकोसिस्टम का विकास कर रही है। उन्होंने कहा कि इसके लिए रक्षा अनुसंधान एवं विकास को निजी क्षेत्र, अकादमिक जगत, एमएसएमई और स्टार्ट अप के लिए खोल दिया गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने रक्षा क्षेत्र की कंपनियों को नई ताकत दी है और प्रौद्योगिकी संस्थानों को रक्षा अनुसंधान और नवाचार से जोड़ा जा रहा है।

मोदी ने कहा कि सरकार ने रक्षा बजट को बढाया है और इसे विकास के काम में लाने के लिए कदम भी उठाए हैं। स्वदेशी कंपनियों से खरीद की जा रही है जिससे रक्षा आयात लगभग 21 प्रतिशत कम हुआ है जिससे भारत रक्षा आयातक के बजाय एक बड़े निर्यातक की भूमिका में आ रहा है।

प्रश्न पत्र वितरण की गड़बड़ के चलते NEET परीक्षा दोबारा होने की संभावना

श्रीगंगानगर। राजस्थान के श्रीगंगानगर में साधुवाली छावनी में स्थित आर्मी पब्लिक स्कूल के केंद्र पर रविवार को नीट परीक्षा के दौरान हिंदी और अंग्रेजी माध्यम के प्रश्न पत्रों के गलत वितरण के चलते हुई गड़बड़ी के कारण यह परीक्षा अब दोबारा आयोजित किए जाने की संभावना है।

नीट परीक्षा के लिए सिटी को-ऑर्डिनेटर द्वारा इसकी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को अनुशंसा की गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार आर्मी स्कूल में हुए ‘नीट’ परीक्षा के संबंध में वहाँ के केंद्र अधीक्षक ने पर्यवेक्षक एसडी लॉ कॉलेज के प्राचार्य डॉ आरपी वर्मा और एसडी पीजी लॉ कॉलेज प्रो राहुल कुमार को अपनी रिपोर्ट भेज दी है। केंद्र अधीक्षक ने शुरू से आखिर तक जो कुछ हुआ, उन तथ्यों का हवाला देते हुए अपनी ओर से इस परीक्षा केंद्र पर नीट परीक्षा फिर से करवाने की सिफ़ारिश की है।

ऑब्जर्वर डॉ आरपी वर्मा ने बताया कि उन्होंने भी परीक्षा करवाने वाली एजेंसी को रिपोर्ट भेज कर आर्मी स्कूल के सेंटर पर फिर से नीट परीक्षा करवाने की सिफ़ारिश की है। इस बारे में एक रिपोर्ट इस परीक्षा के लिए नियुक्त सिटी को-ऑर्डिनेटर को भी भेजी गई है। जानकारी के मुताबिक सिटी को-ऑर्डिनेटर ने यह परीक्षा दोबारा करवाए जाने की अनुशंसा की है।

गौरतलब है कि आर्मी पब्लिक स्कूल के इस केंद्र में रविवार को दोपहर की पारी में नीट की परीक्षा देने के लिए 936 विद्यार्थी उपस्थित हुए। इनमें से 236 विद्यार्थी हिंदी माध्यम से परीक्षा देने वाले थे दोपहर दो बजे परीक्षा आरंभ होने पर हिंदी माध्यम के विद्यार्थियों को अंग्रेजी का प्रश्न पत्र वितरित कर दिया गया।

यह गड़बड़ होने का पता चलते ही प्रश्न पत्र वापस ले लिए गए। इन विद्यार्थियों के लिए केंद्र अधीक्षक, पर्यवेक्षक और सिटी को-ऑर्डिनेटर ने हिंदी के प्रश्न पत्र उपलब्ध करवाने के लिए काफी प्रयास किए लेकिन प्रश्न पत्रों की व्यवस्था नहीं हो पाई।

इसी बीच शाम 5.20 बजे परीक्षा का समय समाप्त हो गया। यह विद्यार्थी परीक्षा नहीं दे पाए थे। बाद में विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों ने कल देर रात तक छावनी गेट के सामने हंगामा किया।

वेस्ट इंडीज़ के पूर्व कप्तान देनेश रामदीन ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को कहा अलविदा

एंटिगुआ। वेस्ट इंडीज़ के पूर्व कप्तान और विकेटकीपर बल्लेबाज़ देनेश रामदीन ने सोमवार को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से सन्यास लेने की घोषणा की। वह फ्रेंचाइज़ी क्रिकेट खेलना जारी रखेंगे।

रामदीन ने इंस्टाग्राम का रुख करते हुए कहा कि मैं बेहद खुशी के साथ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से अपने सन्यास की घोषणा करना चाहता हूं। पिछले 14 साल एक सपने के सच होने जैसे थे। मैंने त्रिनिदाद एवं टोबैगो और वेस्ट इंडीज़ के लिये क्रिकेट खेलकर अपने बचपन के सपने को पूरा किया। मेरे करियर ने मुझे दुनिया घूमने, भिन्न संस्कृतियों से दोस्त बनाने, और अपनी पहचान पर गर्व करने का अवसर दिया।

उन्होंने कहा कि मैं हालांकि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से अपने सन्यास की घोषणा कर रहा हूं, लेकिन अभी पेशेवर क्रिकेट से सन्यास नहीं ले रहा। मैं दुनियाभर में फ्रेंचाइज़ी क्रिकेट खेलना जारी रखूंगा।

रामदीन ने अपने करियर में 74 टेस्ट, 139 एकदिवसीय और 71 टी20 मैच खेले। उन्होंने इस दौरान चार टेस्ट शतक और दो एकदिवसीय शतक लगाये। रामदीन ने 2015 में जेसन होल्डर द्वारा बदले जाने से पहले तीनों प्रारूपों में टीम की कप्तानी भी की।भारत के खिलाफ 2019 में हैदराबाद में खेला गया टी20 रामदीन के अंतरराष्ट्रीय करियर का अंतिम मैच था।

रामदीन ने अपने सफर के साथियों को धन्यवाद देते हुए कहा कि मैं इस अवसर पर उन सभी लोगों को धन्यवाद देना चाहता हूं जिन्होंने मेरे 14 साल के करियर पर प्रभाव डाला। मेरे परिवार, मेरी खूबसूरत पत्नी जेनेल और हमारे बच्चों को विशेष रूप से उन सभी बलिदानों के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं जो आपने मेरे अंतरराष्ट्रीय करियर के दौरान लंबे समय तक दूर रहने के लिए दिये थे।

ऑलराउंडर बेन स्टोक्स ने वनडे क्रिकेट से लिया संन्यास

सहारनपुर : BSP MLC के रेप आरोपी पुत्र अब्दुल वहीद को भेजा गया जेल

सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में नाबालिग से रेप के आरोपी और धोखाधड़ी समेत आधा दर्जन मुकदमों में वांछित 25 हजार के इनामी पूर्व बसपा एमएलसी महमूद अली पुत्र अब्दुल वहीद निवासीं गांव एव थाना मिर्जापुर पोल को सोमवार को मिर्जापुर पुलिस ने सहारनपुर की अदालत में पेश किया जहां से उसे जेल भेज दिया गया।

एसएसपी विपिन टाडा ने आज पत्रकारों को बताया कि सहारनपुर के विशेष पुलिस दल ने शनिवार देर शाम महमूद अली को नवी मुंबई के थाना नेरूल अंतर्गत फ्लेट नंबर 601, साईं अपार्टमेंट से गिरफ्तार किया था। पुलिस उसे ट्रांजिट रिमांड पर थाना मिर्जापुर लेकर आई। जहां जनरल डायरी में उसकी गिरफ्तारी दर्ज कर सोमवार दोपहर सहारनपुर कोर्ट में पेश किया।

एसएसपी ने बताया कि महिला थाना सहारनपुर में महमूद अली के खिलाफ आईपीसी की धारा 376 डी, 323, 354 क,354 ख, 342 और 7/8 पोक्सो एक्ट में मामला दर्ज है। एक मुकदमा थाना सदर बाजार सहारनपुर में दर्ज है। धोखाधड़ी और जालसाजी के चार मुकदमें थाना मिर्जापुर में दर्ज है।

चार दिन पूर्व ही महमूद अली पर 25 हजार का इनाम घोषित किया गया था। महमूद अली मिर्जापुर पोल स्थित ग्लोकल यूनिवर्सिटी के संचालकों में भी शामिल है। इसी तरह के मामलों में उसके बड़े भाई पूर्व बसपा एमएलसी और बहुचर्चित खनन कारोबारी इकबाल उर्फ बाल्ला अभी फरार है।

एसएसपी ने बताया कि पुलिस गिरफ्तार महमूद अली से पूछताछ करेगी। कुछ मामलों में उन्होंने हाईकोर्ट से स्टे लिया हुआ है। एसएसपी ने बताया कि फरार हाजी इकबाल की गिरफ्तारी पर भी 25 हजार का इनाम घोषित किया गया है। सर्विलांस के जरिए और मुखबिरों की सहायता से पुलिस इकबाल बाल्ला तक भी पहुंचने का प्रयास कर रही है।

सूत्रों ने बताया कि इकबाल बाल्ला मजबूत राजनीतिक संरक्षण में पनाह लिए हुए है। दोनों भाइयों के पुलिस और कानून से बचने के सभी प्रयास नाकाम हो चुके हैं। कई केंद्रीय एजेंसियां इन लोगों की वर्षों से जांच कर रही है लेकिन किसी भी एजेंसी ने इस परिवार के सदस्यों को कभी गिरफ्तार करने की ज़हमत नहीं उठाई।

पूर्व एसएसपी आकाश तोमर और मौजूदा एसएसपी विपिन टाडा ने इस परिवार के रसूखदार और ऊंची पहुंच वालों पर हाथ डाला और जेल के सलाखों के पीछे भेजने का काम किया।

केवल 25 किलो तक की पैकिंग के खाद्यान्न पर ही लगेगा GST : वित्त मंत्रालय

नई दिल्ली। पैकिंग वाले खाद्य पदार्थाें जैसे दूध, पनीर, दही, आटा, चावल आदि पर पांच प्रतिशत जीएसटी के आज से प्रभावी होने के बीच सरकार ने स्पष्ट किया है कि केवल 25 किलोग्राम तक की पैकिंग वाले खाद्यान्न पर ही जीएसटी लगेगा।

पैकिंग वाले खाद्यान्न के जीएसटी के दायरे में लाये जाने का हो रहे विरोध के बीच वित्त मंत्रालय ने इस संबंध में स्पष्टीकरण जारी किया है जिसमें कहा गया है कि 25 किलोग्राम तक की पैकिंग पर ही जीएसटी लगेगा। उसने कहा है कि यदि किसी खाद्यान्न का 10 -10 किलो के पैकेट को एक साथ पैक किया जाता है तो उसे 10 यूनिट मानकर उस पर पांच प्रतिशत जीएसटी लगेगा।

इसबीच कन्फ़ेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने यह स्पष्टीकरण जारी किए जाने पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह टैक्स केवल 25 किलो तक की पैकिंग पर ही लगेगा। 25 किलो से ऊपर की पैकिंग पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। इस स्पष्टीकरण से थोक विक्रेता जीएसटी से बाहर हो जाएंगे जो एक बड़ी राहत होगी।

वहीँ जो लोग इस टैक्स के दायरे में आएंगे उनके दिए हुए टैक्स का इनपुट क्रेडिट मिल जाएगा वहीं लूज माल देने पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। इस बड़ी राहत के लिए कैट ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, जीएसटी परिषद और केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर बोर्ड के अध्यक्ष विवेक जौहरी को धन्यवाद दिया है कि उन्होंने कैट द्वारा उठाए गए मुद्दों पर स्पष्टीकरण देकर मामले को सरल बना दिया।

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया ने बताया कि आज से अनेक वस्तुओं पर 5 प्रतिशत या उससे अधिक कर लग रहा है जिससे इन वस्तुओं के महंगे होने की पूरी संभावना है जिसका बोझ सीधे तौर पर आम आदमी पर पड़ेगा। आज से सभी प्रकार के सूखे एवं तरल खाद्यान्न सहित पैकेज्ड दही, लस्सी, बटर मिल्क महंगे होंगे क्योंकि इन वस्तुओं पर अब 5 प्रतिशत जीएसटी लगेगा जो कि पहले नहीं था।

चेकबुक जारी किए जाने पर बैंकों की ओर से लिए जाने वाले शुल्क पर अब 18 प्रतिशत जीएसटी लगेगी। इसके साथ ही हॉस्पिटल में 5000 रुपए (ग़ैर आईसीयू) से अधिक किराये वाले कमरों पर 5 प्रतिशत जीएसटी लगेगी। होटलों के 1000 रुपए प्रति दिन से कम किराए वाले रूम पर जीएसटी 12 प्रतिशत लगेगी जो कि अब तक नहीं थी।

एलईडी लाइट्स, एलईडी लैंप पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगेगी जो कि पहले नहीं लगती थी। ब्लेड, कैंची, पेपर, पेंसिल्स शार्पनर, चम्मच, कांटे वाले चम्मच, स्किमर्स व केक सर्वर्स इत्यादि वस्तुओं जिन पर पहले 12 प्रतिशत जीएसटी लगता था अब 18 प्रतिशत जीएसटी लगेगा।

माउंट आबू: CM गहलोत के अधिकारी गुजरात पंहुचा रहे हैं कांग्रेस का कुशासन सन्देश, धरने और अनशन जारी

माउंट आबू में आम आदमी को न्याय के समर्थन और खास लोगों को नवाजने के विरोध में अनशन पर बैठे होटल व्यवसाई विजय लालवानी।
माउंट आबू में आम आदमी को न्याय के समर्थन और खास लोगों को नवाजने के विरोध में अनशन पर बैठे होटल व्यवसाई विजय लालवानी।

सिरोही। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की मंशा के विपरीत काम करके गहलोत के अधिकारियो ने राजस्थान के साथ गुजरात की जनता को भी कमजोर सरकार का सन्देश देना शुरू कर दिया है। उनकी कार्यप्रणाली स्पष्ट जता रही है कि सिर्फ कांग्रेस के कुछ आला नेताओं को खुश करके अधिकारी राज्य के आम लोगो पर कुशासन का चाबुक चलाने के लाइसेंस अशोक गहलोत सरकार से ले चुके हैं। इसका सन्देश अब स्वायत्त शासन के जयपुर से माउंट आबू तक के अधिकारी देने लगे हैं।

अशोक गहलोत गुजरात चुनाव से पहले गुजरात में कांग्रेस के वरिष्ठ पर्यवेक्षक बनाए गए हैं। लेकिन, माउंट आबू में गहलोत सरकार के अधिकारी जिस तरह से कांग्रेस के चुनिंदा नेताओं के व्यसायिक लाभ के लिए स्थानीय लोगों के लिए नियमों की गलत व्याख्या करके उन्हें 34 साल बाद भी प्रताड़ित कर रहे हैं, उससे माउंट आबू में एक के बाद अनशनों औऱ धरनो का दौर शुरू हो गया है।

एक सप्ताह के भीतर माउंट आबू में तीसरा अनशन शुरू हो गया है। माउंट में सबसे ज्यादा गुजरात के पर्यटक आते हैं और उनके माध्यम से गहलोत सरकार के अधिकारियों का जन उत्पीड़न का सन्देश गुजरात लेकर जा रहे हैं।

माउंट आबू में दोहरे मापदण्ड अपनाकर गहलोत शासन के अधिकारियों द्वारा फैलाये कुशासन को लेकर लगाया गया अनशन स्थल पर लगाया बैनर।
माउंट आबू में दोहरे मापदण्ड अपनाकर गहलोत शासन के अधिकारियों द्वारा फैलाये कुशासन को लेकर लगाया गया अनशन स्थल पर लगाया बैनर।

एक सप्ताह में तीसरा धरना

माउंट आबू में 34 सालों से मकानों के निर्माण, पुनर्निर्माण, मरम्मत आदि की अनुमति नहीं मिल रही है। लेकिन, कथित रूप से सरकार के बड़े नेता के करीब माने जाने वाले नेता के पुत्र की होटल उपखण्ड अधिकारियों और आयुक्तों ने पुनर्निर्माण करवा दी। जबकि आम आदमी को एनजीटी और हाइकोर्ट के नाम पर माउंट आबू उपखण्ड अधिकारी और नगर पालिका आयुक्त अटकाए हुए हैं। आम आदमी को अनुमति नहीं देने को लेकर शैतानसिंह आदि ने सिरोही में सांकेतिक धरना हुआ था।

इसी दौरान कांग्रेस नेता के द्वारा कथित रूप से सीवेज लाइन को कब्जा करके जमीन पर अतिक्रमण करने की पीड़ित बताकर महिला व्यवसाई मंजू गुरबानी ने अनशन किया था। इस दौरान पिंडवाड़ा विधायक समाराम गरासिया ने गहलोत सरकार को बेशर्म बताकर ट्वीट भी किया था, जिसे बाद में उन्होंने हटा दिया। चर्चा ये भी है कि विधायक द्वारा गहलोत सरकार विरोधी इस ट्वीट को हटवाने के पीछे जालोर-सिरोही क्षेत्र और माउंट आबू के स्थानीय उन्हीं की पार्टी के दो नेताओं की भूमिका है।

हाल में ही स्वयत्तशासन मंत्री के ही कथित करीब माने जा रहे एक और व्यक्ति की बिल्डिंग को नियमित करने के आदेश जारी करने के आरोप स्वायत्त शासन मंत्रालय और माउंट आबू नगर पालिका आयुक्त द्वारा करने के आरोप लगे हैं। जिस व्यक्ति को ये कथित अनुमति मिली है, पिछले शासन में उनके यहां स्वयत्तशासन मंत्री की आवाजाही भी रही थी।

राजनीतिक हलको में चर्चा ये भी है कि माउंट आबू के ही प्रकरण को उठाते हुए सिरोही विधायक संयम लोढ़ा द्वारा स्वयत्तशासन मंत्री पर ‘आपके प्रिय स्थान’ टिप्पणी करने के कारण सम्भवतः उनका इस कार्यकाल में यहां आना नहीं हुआ। इस अनुमति के प्रकरण को लेकर एक और होटल व्यवसाई विजय कुमार ने माउंट आबू के सामूहिक हितो की मांग को लेकर अनशन शुरू कर दिया है।

फेल हुए संघर्ष समिति के भाजपाई

माउंट आबू के लोगों को उनका जायज हक दिलवाने के लिए संघर्ष समिति बनाई गई थी। निःसन्देह इसने वसुंधरा राज में तो जोनल मास्टर प्लान के रूप में लोगों को उनका हक काफी हद तक दिलवा दिया। लेकिन, हाल में पुनर्गठन के बाद ये संघर्ष समिति एकदम नकारा साबित होती नजर आ रही है।

सूत्रों के मुताबिक इसकी बैठक में एक योजना के तहत ये कोशिश की गई कि इसे आम जनता की बजाय भाजपा के नेताओं की लीडरशिप रहे ताकि यदि निर्माण अनुमतियां मिलनी शुरू हो भी जाए तो श्रेय भाजपा के मिले कांग्रेस को नहीं। लेकिन ये भाजपा के नेता नगर पालिका माउंट आबू के जनप्रतिनिधि और संघर्ष समिति के पदाधिकारियों की दोहरी भूमिका में पूर्णतया विफल रहे। माउंट आबू के लोगों को राहत पहुंचाने के सारे अधिकार माउंट आबू नगर पालिका के पास आ चुके हैं ऐसे में भाजपा की चुप्पी शक के दायरे में है।

माउंट आबू भाजपा की चुप्पी का राज सांसद देवजी पटेल के हाल में वायरल हुए वीडियो में खुलता दिख रहा है। जिसमें ये सन्देश साफ है कि हम कांग्रेस और भाजपा नेताओं का काम माउंट आबू में हो रहा है, बाकी स्थानीय लोग अपना अपना देख लेवें। माउंट आबू नगर पालिका और संघर्ष समिति के भाजपा नेता सांसद के वायरल्ड वीडियो के सन्देश की रीति का अनुकरण करते ज्यादा नजर आ रहे हैं। इसलिए शायद अब संघर्ष समिति और भाजपा को दरकिनार कर धरनों के माध्यम से अलग अलग लोग अपने अपने स्तर पर धरना देने लगे हैं।

वैसे सोमवार को अनशन पर बैठे विजय कुमार द्वारा संघर्ष समिति ने अध्यक्ष को दिया गया ज्ञापन सोशल मीडिया पर वायरल होकर अध्यक्ष को ये सन्देश देता ज्यादा दिखाई दे रहा है कि ‘रहने दो भाई साहब, आपसे नहीं होगा हम आबुवासी खुद अपनी-अपनी देख लेंगे।’ क्योंकि संघर्ष समिति का अध्यक्ष न होते हुए भी विजय कुमार ने अनशन के माध्यम से व्यापक माउंट आबू की बात कही है, जिसकी जिम्मेदारी संघर्ष समिति अध्यक्ष को सौंपी गई थी।

ऑलराउंडर बेन स्टोक्स ने वनडे क्रिकेट से लिया संन्यास

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लंदन। घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट के व्यस्त कार्यक्रम से होने वाली चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए इंग्लैंड के टेस्ट कप्तान और सुपरस्टार ऑलराउंडर बेन स्टोक्स ने वनडे क्रिकेट से संन्यास लेने का निर्णय लिया है।

2019 के वनडे विश्व कप विजेता स्टोक्स ने ट्विटर पर बयान जारी करते हुए कहा कि मंगलवार को डरहम में साउथ अफ़्रीका के ख़िलाफ़ सीरीज़ का पहला मैच उनके वनडे करियर का अंतिम मैच होगा।

स्टोक्स को इसी साल इंग्लैंड की टेस्ट टीम की कमान सौंपी गई थी। उन्होंने कहा कि तीनों फ़ॉर्मेट खेलना उनके लिए सही नहीं है और उन्हें लगा कि वह आने वाले उभरते खिलाड़ियों का स्थान रोक रहे हैं।

स्टोक्स को इस साल घर पर इंग्लैंड के सभी छह वनडे मैच खेलने थे। इसके बाद उम्मीद थी कि वह भारत और दक्षिण अफ़्रीका के विरुद्ध टी20 मैचों में भी राष्ट्रीय टीम का प्रतिनिधित्व करेंगे जिसके बाद उन्हें द हंड्रेड प्रतियोगिता में हिस्सा लेना था। हालांकि अब उन्होंने टेस्ट क्रिकेट को अपना सब कुछ समर्पित करने के लिए और टी20 प्रारूप के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के मद्देनज़र यह निर्णय लिया है।

अपने बयान में स्टोक्स ने कहा कि मैं अब इस प्रारूप में टीम के अपने साथियों को अपना 100 प्रतिशत नहीं दे सकता हूं। यह एक मुश्किल निर्णय रहा है और इंग्लैंड के लिए खेलने के हर एक पल ने मुझे आनंद दिया है। इस दौरान टीम के साथ मेरा सफ़र बेहतरीन रहा।

उन्होंने आगे कहा कि यह निर्णय लेना जितना कठिन था, इस तथ्य से निपटना उतना कठिन नहीं है कि मैं अपने साथियों को अब इस प्रारूप में अपना 100% नहीं दे सकता। इंग्लैंड की शर्ट, इसे पहनने वाले किसी भी खिलाड़ी से इससे कम की हक़दार नहीं है।

तीनों प्रारूपों में खेलना अब मेरे लिए सही नहीं है। न केवल मुझे लगता है कि मेरा शरीर व्यस्त कार्यक्रम के कारण उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पा रहा है बल्कि मेरा मानना है कि मैं एक ऐसे खिलाड़ी की जगह रोक रहा हूं जो जॉस (बटलर) तथा इस टीम को अपना 100 प्रतिशत दे सकता है। अब समय आ गया है कि कोई और बतौर क्रिकेटर आगे बढ़े और वह यादें बनाए जो मैंने पिछले 11 सालों में बनाई है।

मैं टेस्ट क्रिकेट को अपना सब कुछ दूंगा और अब इस फ़ैसले के बाद मैं टी20 क्रिकेट के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का पालन कर पाऊंगा। मैं जॉस बटलर, मैथ्यू मॉट, सभी खिलाड़ी और सपोर्ट स्टाफ़ के लिए भविष्य में सफलता की कामना करता हूं। हमने पिछले सात वर्षों में सफ़ेद गेंद की क्रिकेट में लंबा सफ़र तय किया है और भविष्य बहुत उज्ज्वल है।

स्टोक्स ने आगे कहा कि मैंने अब तक खेले गए 104 मैचों का आनंद लिया है। अब मेरे पास आनंद लेने के लिए एक और मैच है और विशेषकर अपने घरेलू मैदान डरहम पर मैं अपना अंतिम मैच खेलने जा रहा हूं।

इंग्लैंड टीम के दर्शक हमेशा मेरे साथ रहे हैं और आगे भी रहेंगे। आप विश्व के सर्वश्रेष्ठ प्रशंसक हैं। मैं आशा करता हूं कि हम मंगलवार को जीत के साथ दक्षिण अफ़्रीका सीरीज़ में अच्छी शुरुआत करेंगे।

पिछले एक महीने में स्टोक्स, इंग्लैंड के विश्व कप विजेता टीम से वनडे क्रिकेट को अलविदा कहने वाले दूसरे सदस्य हैं। उनसे पहले टीम के कप्तान इयोन मॉर्गन ने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया था। इस फ़ैसले के बाद मॉट और बटलर के लिए अगले साल भारत में अपने ख़िताब को बचाने का कार्य और कठिन हो गया है।

भारत के विरुद्ध वनडे सीरीज़ में चौथे नंबर पर बल्लेबाज़ी करते हुए स्टोक्स ने कुल 48 रन बनाए और केवल तीन ओवर गेंदबाज़ी की। उनके जाने से इंग्लैंड की एकादश में एक बड़ा स्थान खाली हो गया है जिसकी पूर्ति वह सैम करेन के साथ कर सकते हैं। सैम करेन, भारत सीरीज़ के दौरान सबस्टिट्यूट थे और स्टोक्स की तरह एक तेज़ गेंदबाज़ी ऑलराउंडर हैं।

ईसीबी के पुरुष क्रिकेट के निदेशक रॉब की ने स्टोक्स के फ़ैसले को निस्वार्थ बताया और कहा कि इससे इंग्लैंड को दीर्घकालिक लाभ होगा। उन्होंने कहा कि बेन स्टोक्स का वनडे क्रिकेट में एक अविश्वसनीय अंतर्राष्ट्रीय करियर रहा है, जिसकी परिणति 2019 आईसीसी पुरुष क्रिकेट विश्व कप फ़ाइनल में उनके मैच जिताऊ प्रदर्शन में हुई।

रॉब ने आगे कहा कि मुझे पता है कि यह एक कठिन निर्णय रहा होगा, लेकिन मैं पूरी तरह से समझता हूं कि वह इस निष्कर्ष पर क्यों पहुंचे हैं। मुझे यकीन है कि जब हम पीछे मुड़कर बेन के करियर को देखेंगे तो यह निर्णय उनके 120 से अधिक टेस्ट खेलने और आने वाले कई सालों तक टी20 और विश्व कप में इंग्लैंड की मदद करने का मुख्य कारण होगा।

ईसीबी के अंतरिम मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्लेयर कॉनर ने कहा कि बेन न केवल दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में से एक हैं, बल्कि एक प्रेरणादायक व्यक्ति भी हैं। इसलिए हमारी वनडे टीम उन्हें याद करेगी। हालांकि टेस्ट कप्तानी और क्रिकेट में आज के व्यस्त कैलेंडर के साथ, हम उनके फ़ैसले को पूरी तरह से समझते हैं और उनका सम्मान करते हैं। हम आने वाले कई वर्षों तक उन्हें इंग्लैंड की शर्ट में देखने के लिए उत्सुक हैं।