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राजस्थान की मुख्य सचिव ऊषा शर्मा से मिले सिरोही विधायक संयम लोढ़ा।
सिरोही। मुख्यमंत्री के सलाहकार और सिरोही विधायक संयम लोढ़ा ने शनिवार को मुख्य सचिव से मुलाकात की। इस दौरान माउंट आबू के बिल्डिंग बायलॉज़ के नोटिफिकेशन को लेकर भी बात की।
उन्होंने मुख्य सचिव उषा शर्मा को बताया कि माउंट आबू का जोनल मास्टर प्लान 2015 में लागू हो चुका है। मुख्यमंत्री गहलोत के प्रयास से इसका बायलॉज 2019 में लागू हो चुका है।
इसका एस टू ज़ोन की सीमा का निर्धारण भी 25 अप्रेल, 2022 को हो गया है। लेकिन, इसका गजट प्रकाशन माउंट आबू नगर पालिका द्वारा अब तक नहीं करवाने से लोगों को राहत नहीं मिल पा रही है।
उन्होंने सीएस से कहा कि इसका नोटिफिकेशन हो जाने से मुख्यमंत्री की मंशा के अनुसार जोनल मास्टर प्लान के प्रावधानों के अनुसार माउंट आबू के स्थानीय बाशिंदों के जर्जर भवनों की मरम्मत, रिनोवेशन, पुनर्निर्माण और नवनिर्माण की अनुमति मिल पाएगी। जिससे करीब 35 सालों से भवन निर्माण नहीं होने के बिखर चुके सामाजिक और आर्थिक ताने बाने को पुनर्जीवित करने का प्रयास शुरू हो सकेगा।
उल्लेखनीय है कि पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के सिरोही जिले में आगमन पर दो दिवसीय माउंट आबू प्रवास में माउंट आबू के अधिकारियों की कार्यप्रणाली से राजे को गहलोत शासन को घेरने का मौका मिला है। मुख्यमंत्री के सलाहकार के माउंट आबू को लेकर मुख्य सचिव के समक्ष जो चर्चा की गई है यदि उस पर शीघ्र अमल हुआ तो डेमेज कंट्रोल में काफी सहायक होगा।
कार्यकारी समिति गठित करने का दिया सुझाव
विधायक संयम लोढा ने सीएस से माउंट आबू में पर्यटकों के आकर्षण को बढाने के लिये डवलपमेंट के प्रोजेक्ट को गति देने को शीघ्र आबू विकास समिति के साथ साथ एक कार्यकारी समिति मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित की जाए। जिससे माउंट आबू में पर्यटकों के आकर्षण के लिये नियमित रूप से विकास कार्यों को आगे बढ़ाया जा सके।
साथ ही लोढा ने स्पोर्ट्स एडवेंचर गतिविधिया भी शुरू की बात कही इस पर मुख्य सचिव ने माउंट आबू को पर्यटन नक्शे में उभारने के लिए और वहां के लोगों को सम्बल देने के लोढ़ा के सुझावों पर शीघ्र अमल का आश्वासन दिया।
राजस्थान की मुख्य सचिव ऊषा शर्मा से मिले सिरोही विधायक संयम लोढ़ा।
सिरोही। विधायक संयम लोढा ने राज्य की मुख्य सचिव ऊषा शर्मा से शासन सचिवालय में मुलाकात की। इसमें सिरोही जिले के थाना बरलूट प्रकरण संख्या 48/2018 में हत्या के आरोप में झूठा फंसाए गए लखमाराम देवासी एवं गेमाराम गरासिया के मामले में दोषी पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर बर्खास्ती के लिए सीसीए नियम 16 अनुशासनात्मक कार्यवाही करने एवं दोनो पीडितों को 10-10 लाख पर मुआवजा देने की बात कही। इस पर मुख्य सचिव शर्मा ने लोढा को समुचित कार्यवाही का आश्वासन दिया।
लोढा ने बताया कि लखमाराम देवासी अभी जमानत पर है और गेमाराम गरासिया अभी भी सिरोही कारागृह में बंद है। लोढा ने मुख्य सचिव से कहां कि अपराध में बिना लिप्तता के पुलिस द्वारा वर्षो जेल में बंद करने से दोनो नागरिकों के मूलभूत अधिकारों का गम्भीर हनन हुआ है। उन्होंने कहां कि गेमाराम गरासिया हत्या के दिन बाली जेल में बंद था लेकिन उसे महीनों बाद एसओजी द्वारा इसमें फंसाया गया।
इससे पहले निर्दोष गिरफ्तार किए गए लखमाराम देवासी के मामले में तीन साल बाद 2021 में पुलिस ने जिला न्यायालय सिरोही में 169 की अर्जी प्रस्तुत कर कहां कि लखमाराम देवासी को गलत गिरफ्तार किया गया है। लोढा ने उन्हें बताया कि लखमाराम देवासी की गलत गिरफ्तारी के खिलाफ 2018 में भी उन्होंने देवासी समाज के लोगो के साथ भाजपा शासनकाल के दौरान बरलूट थाने का घेराव किया था।
उन्होंने कहां कि गेमाराम उर्फ गेमला के न्यायिक अभिरक्षा में होने के बावजूद हत्या में फंसाना पुलिस की आपराधिक मानसिकता को प्रदर्शित करता है। पुलिस ने जिस गैर कानूनी तरीके से इसमें काम किया है। उससे समाज में गहरा अविश्वास उत्पन्न हुआ है और यह प्रकट हुआ है कि पुलिस के लिए लोगों के अधिकार व संविधान कोई महत्व नही रखते।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष राजस्थान विधानसभा के कार्य संचालन नियम 131 के तहत उनके द्वारा यह मामला उठाए जाने पर भी सरकार ने गलती स्वीकार की थी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही के लिए पुलिस उप महानिरीक्षक जैसे अधिकारी से जांच कराने की घोषणा की थी। क्योंकि उक्त घटना दिवस पर स्वयं पुलिस अधीक्षक मौके पर आए थे और उनकी लिप्तता से ही यह अपराधिक कृत्य निर्दोष नागरिक के साथ हुआ।
लोढा ने मुख्य सचिव से कहां कि नागरिक अधिकारों के हनन के अनेक मामलो में सर्वोच्च न्यायालय ने पीडितो को आर्थिक मुआवजा दिलाया है। पूर्व इसरो वैज्ञानिक नामबी नारायणन को 50 लाख रूपए मुआवजा दिया गया। पुलिस की कार्यवाही संविधान के अनुच्छेद 21 व 22 का घोर उल्लंघन है।
सरकार का यह नैतिक दायित्व बनता है कि दो नौजवानों के चार साल की जिदंगी तबाह करने की वह जिम्मेदारी ले। यद्यपि मुआवजे का सीधा अभी तक कोई प्रावधान नही है लेकिन राजस्थान सरकार अपने नागरिकों के हितों के प्रति सजग है अत: राज्य सरकार इस संबंध में मुआवजा जारी करे।
लोढा ने मुख्य सचिव को पुलिस उप महानिरीक्षक द्वारा की गई जांच की प्रति देते हुए उनसे कहां कि उनकी रिपोर्ट में सारे तथ्यों का खुलासा हो चुका है। गृह विभाग ने भी पुलिस मुख्यालय से अब तक कार्यवाही नही करने पर जवाब तलब किया है। जांच रिपोर्ट के अनुसार स्पष्ट है कि गेमाराम की गिरफ्तारी पूरी तरह गलत और बरामदगी एक धोखा है।
इसी तरह लखमाराम की बिना साक्ष्य के गिरफ्तारी करना। सहायक निदेशक अभियोजन द्वारा साक्ष्य के संबंध में ठोस राय प्रदान नही करना एवं वास्तविक तथ्य सामने आने के बाद भी विधि सम्मत कार्यवाही पुलिस के द्वारा नही किया जाना प्रमाणित है।
श्रीनगर। केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में कुछ दिनों बाद अमरनाथ यात्रा शुरु होने वाली है। सेना ने शनिवार को कहा कि पिछले वर्ष के मुकाबले इस वर्ष वार्षिक तीर्थयात्रा के लिए ज्यादा खतरा बना हुआ है। गौरतलब है कि 43 दिवसीय अमरनाथ यात्रा 30 जून से शुरू होने जा रही है।
सेना के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा केन्द्रशासित प्रदेश में सुगम तीर्थयात्रा के लिए इस समय और अधिक सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। अधिकारी ने कहा कि इस साल खतरे की आशंका बढ़ गई है। हम आम तौर पर हर साल वार्षिक अमरनाथ यात्रा को निशाना बनाने वाले आतंकवादियों के बारे में इनपुट मिलते है, लेकिन इस वर्ष इस प्रकार के ज्यादा इनपुट्स मिल रहे हैं। इस साल खतरे की आशंका बढ़ गई है।
उल्लेखनीय है कि कोरोना महामारी के कारण दो साल के लंबे अंतराल के बाद इस बार अमरनाथ यात्रा का आयोजन हो रहा है। अधिकारियों को उम्मीद है कि पहले की तुलना में इस वर्ष तीर्थयात्रियों की संख्या में बड़ी ज्यादा बढ़ोतरी होगी और इस वार्षिक यात्रा में करीब छह से आठ लाख लोगों के हिस्सा लेने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष तीन से चार गुना ज्यादा सुरक्षा बलों के जवानों की तैनाती की गई है। अधिकारी ने हालांकि जोर देकर कहा कि वह यह नहीं कह रहे हैं कि उन्होंने सुरक्षा को सौ फीसदी फुलफ्रूफ इंतजाम किए हैं।
जम्मू से बर्फानी बाबा की गुफा तक यात्रियों को सुरक्षित पहुंचाने के लिए सुरक्षा के त्रिस्तरीय सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं। इसमें पुरुषों के अलावा सुरक्षा ड्रोन, सीसीटीवी कैमरे और रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन टैग होंगे।
उल्लेखनीय है कि इस महीने पूरे कश्मीर में 29 आतंकवादियों का सफाया किया गया है। पुलिस ने दावा किया है कि इनमें से दो आतंकवादी वार्षिक अमरनाथ यात्रा को निशाना बनाने की योजना बना रहे थे। एक संदिग्ध आतंकवादी संगठन ने कथित तौर पर इस यात्रा में हमले की धमकी दी है।
नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को कहा कि गुजरात दंगों के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से यह स्पष्ट हो गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर राजनीतिक षड्यंत्र के तहत आरोप लगाए गए थे और यह आरोप लगाने वाले लोगों को अब मोदी, देश और भारतीय जनता पार्टी से माफी मांगनी चाहिए।
शाह ने आज अपने एक साक्षात्कार के अंशों को सिलसिलेवार ट्वीट में सोशल मीडिया पर साझा करते हुए कहा कि न्यायालय के निर्णय से यह स्पष्ट हो गया है कि यह सभी आरोप राजनीतिक षड्यंत्र के तहत लगाए गए थे और अब आरोप लगाने वाले लोगों को मोदी से माफी मांगनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से ये फिर एक बार सिद्ध हुआ है कि नरेंद्र मोदी जी पर लगाए गए आरोप एक राजनीतिक षड्यंत्र था। मोदी जी बिना एक शब्द बोले, सभी दुखों को भगवान शंकर के विषपान की तरह 18-19 साल तक सहन करके लड़ते रहे। अब सत्य सोने की तरह चमकता हुआ बाहर आया है, यह गर्व की बात है।
हाल ही में कांग्रेस के नेता राहुल गांधी से प्रवर्तन निदेशालय द्वारा की गई पूछताछ के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा दिए गए धरने और विरोध प्रदर्शनों पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने एक अन्य ट्वीट में कहा कि लोकतंत्र में संविधान का सम्मान कैसे हो सकता है इसका आदर्श उदाहरण नरेंद्र मोदी जी ने प्रस्तुत किया है। मोदी जी से घंटों पूछताछ हुई लेकिन हमने कोई धरना-प्रदर्शन नहीं किया। झूठे आरोप लगाने वाले लोगों की अगर अंतरात्मा है तो उन्हें मोदी जी, भाजपा और देश से माफी मांगनी चाहिए।
एक अन्य ट्वीट में शाह ने कहा कि मैंने मोदी जी को इन सभी झूठे आरोपों के दर्द को सहन करते हुए बहुत करीब से देखा है। न्यायिक प्रक्रिया चल रही है इसलिए झूठे आरोपों पर भी कुछ ना बोलना…ये स्टैंड देश की न्याय प्रणाली में विश्वास रखने वाला नरेंद्र मोदी जी जैसा कोई मजबूत मन वाला व्यक्ति ही ले सकता था।
शाह ने कहा कि देश की जनता ने इन आरोपों को कभी स्वीकार नहीं किया और वह आज भी मोदी के साथ खड़ी है। उन्होंने ट्वीट किया कि कुछ पत्रकारों, एनजीओ और भाजपा विरोधी राजनीतिक दलों ने मोदी जी पर झूठे आरोप लगाकर एक संगठित गिरोह की तरह उन्हें प्रचारित किया। लेकिन देश की जनता ने इन आरोपों को कभी स्वीकार नहीं किया। लोकतंत्र में जनादेश का बड़ा महत्व है और इतने साल से देश की जनता दिल से मोदी जी के साथ खड़ी है।
लखनऊ। अगले महीने होने जा रहे राष्ट्रपति चुनाव में बहुजन समाज पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी की अगुवाई वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू का समर्थन करने की घोषणा की है।
उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बसपा अध्यक्ष मायावती ने शनिवार को यह जानकारी देते हुए कहा कि आदिवासी समाज को बसपा के आंदोलन का खास हिस्सा मानते हुए उनकी पार्टी ने मुर्मू को एक आदिवासी महिला होने के नाते समर्थन देने का फैसला किया गया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि बसपा ने राजग को नहीं बल्कि आदिवासी महिला उम्मीदवार का समर्थन किया है। साथ ही उन्होंने सत्ता पक्ष एवं विपक्ष पर बसपा को अलग थलग करने की राजनीतिक साजिश रचने का भी आरोप लगाया है।
गौरतलब है कि 18 जुलाई को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में आदिवासी समुदाय से ताल्लुक रखने वाली मुर्मू ने राजग उम्मीदवार के रूप में नामांकन किया है। वहीं विपक्षी दलों ने अपने साझा उम्मीदवार के रूप में पूर्व केन्द्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा का नाम घोषित किया है। सिन्हा 27 जून को नामांकन करेंगे। उत्तर प्रदेश में बसपा के दस सांसद और एक विधायक है।
मायावती ने एक बयान जारी कर अपनी पार्टी का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि बसपा, राष्ट्रपति चुनाव में अपना फैसला खुद लेने के लिए स्वतंत्र है। उन्होंने कहा कि इसके तहत ही, हमारी पार्टी ने आदिवासी समाज को अपनी मूवमेन्ट का खास हिस्सा मानते हुए, द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति पद के लिए अपना समर्थन देने का फैसला लिया है।
हमने यह अति-महत्वपूर्ण फैसला, बीजेपी व इनके एनडीए के पक्ष में नहीं और ना ही इनके विपक्ष यपूीए के विरोध में लिया है, बल्कि अपनी पार्टी व मूवमेन्ट को विशेष ध्यान में रखकर ही एक आदिवासी समाज की महिला को देश का राष्ट्रपति बनाने के लिए यह खास फैसला लिया है। मायावती ने यह भी कहा कि हालांकि वह (मुर्मू) कितना फ्री होकर व बिना किसी दबाव के कार्य कर पाएंगी, यह तो आगे चलकर, समय ही बताएगा।
मायावती ने भाजपा एवं अन्य विपक्षी दलों पर सर्वसम्मति से राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार चुनने की कोशिशों को महज प्रपंच करार देते हुए इस मुहिम में बसपा को अलग थलग रखने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि इस सम्बन्ध में भाजपा जहां सर्वसम्मति (आम-सहमति) से सत्ताधारी एनडीए गठबंधन के उम्मीदवार तय करने के लिए अपनी विपक्षी पार्टियों से संपर्क करने का दिखावा करती रही है, वहीं विपक्षी दल एक संयुक्त उम्मीदवार तय करने के लिए अपनी मनमानी बैठकें करते रहे। इन्होंने उस प्रक्रिया से बसपा को अलग-थलग रखा है। मायावती ने कहा कि यह इन दलों की जातिवादी मानसिकता को साबित करता है।
मायावती ने दलील दी कि बसपा, जनहित के लगभग हर ख़ास मामले में, भाजपा के खिलाफ, विपक्ष का हमेशा से सहयोग करती रही है। इसके बाद भी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री द्वारा दिनांक 15 जून को विपक्षी पार्टियों की बैठक में एकतरफा व मनमाने तौर पर केवल चुनिंदा पार्टियों को ही बुलाना और फिर उसके बाद शरद पवार द्वारा 21 जून को इसी प्रकार की बैठक में बसपा को नहीं बुलाना इनके यह जातिवादी इरादों काे स्पष्ट करता है।
उन्होंने कहा कि ऐसे में राष्ट्रपति व उपराष्ट्रपति चुनाव हेतु विपक्षी एकता का प्रयास गंभीर न होकर लाेगों को इसका केवल एक दिखावा ही ज्यादा लगता है, जिसका अंजाम भी सभी को मालूम है। जबकि इन्हीं विपक्षी पार्टियों ने बसपा को भाजपा की ‘बी टीम’ बताकर झूठा प्रचार खूब फैलाकर व माहौल बनाकर खासकर यूपी के पिछले विधानसभा आम चुनाव में हमारी पार्टी का भारी नुकसान ही नहीं किया, बल्कि इन्होंने एक विशेष समुदाय को बसपा के खिलाफ व सपा के पक्ष में इतना ज्यादा गुमराह किया कि सपा तो हारी ही हारी, अन्त में भाजपा यहां दोबारा से सत्ता में आ गई।
मुंबई। शिवसेना नेता एवं राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने दावा किया है कि उनकी पार्टी महाराष्ट्र विधानसभा में विश्वास मत हासिल करेगी।
राउत ने शनिवार को यहां संवाददाताओं को बताया कि उन्होंने वरिष्ठ भारतीय जनता पार्टी नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से भी कहा है कि वह शिवसेना विधायक एकनाथ शिंदे और अन्य विधायकों के विद्रोह के बाद राज्य में जारी राजनीतिक उथल-पुथल में हस्तक्षेप न करें। उन्होंने कहा कि अगर फडणवीस हस्तक्षेप करते हैं, तो एक बार फिर वह विफल हो जाएंगे और उनकी पार्टी की विश्वसनीयता खत्म हो जाएगी।
उन्होंने कहा कि हजारों शिवसैनिकों ने पार्टी के लिए अपना खून बहाया और अपने प्राणों की आहुति दी। शिवसेना को अपहृत नहीं किया जा सकता। एक बार जब शिवसेना के सभी बागी विधायक मुंबई लौट आएंगे, तो हम विधानसभा में बहुमत हासिल करेंगे।
मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के करीबी राउत ने कहा कि शिवसेना मजबूत है तथा और कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ठाकरे के साथ हैं। उन्होंने बताया कि कई मुद्दों पर चर्चा के लिए जल्द ही शिवसेना की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक होगी।
अजमेर। राजस्थान में अजमेर शहर भारतीय जनता पार्टी आपातकाल के 48वें वर्ष को आज काला दिवस के रूप में मना रही है।
भाजपा राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देशानुसार अजमेर शहर भाजपा से 25 जून 1975 को लगाए गए आपातकाल की युवा पीढ़ी को याद दिलाने के लिए स्थानीय गांधी भवन परिसर में महात्मा गांधी की मूर्ति के नीचे धरना प्रदर्शन का आयोजन किया गया।
धरना-प्रदर्शन में भाग ले रहे पार्टी नेताओं ने कहा कि देश में उस समय आपातकाल लागू कर सरकार ने विरोधियों को जेलों में डाल दिया और लोकतंत्र का गला घोंटते हुए मीडिया की आजादी पर भी प्रतिबंध लगा दिया था।
धरना-प्रदर्शन में सांसद भागीरथ चौधरी, पूर्व मंत्री एवं विधायक वासूदेव देवनानी एवं अनीता भदेल, महापौर बृजलता हाडा, शहर अध्यक्ष डा. प्रियशील हाडा, पूर्व न्यास अध्यक्ष धर्मेश जैन, पूर्व महापौर धर्मेंद्र गहलोत, धरना-प्रदर्शन संयोजक पार्षद जेके शर्मा सहित अनेक भाजपा पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद थे।
आपातकाल दिवस के मौके पर आज शाम मीसाबंदी लोकतंत्र सेनानियों का गौरव सम्मान समारोह भी आयोजित किया जाएगा जिसमें राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी शिरकत करेंगे।
सिरोही। सिरोही जिले में माउंट आबू के उपखण्ड अधिकारियों की कार्यप्रणाली ने पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को अशोक गहलोत सरकार और कांग्रेस पर हमलावर होने का मौका दिया। पिछले साढ़े तीन साल में गहलोत सरकार द्वारा माउंट आबू में लगाए गए उपखण्ड अधिकारियों के द्वारा कोई ऐसा माइलस्टोन काम नहीं किया गया है जिससे अशोक गहलोत सरकार यहां पर खुद को साबित कर सके।
इनकी कार्यप्रणाली यहां आने वाले दूसरे प्रदेश के पर्यटकों में गहलोत सरकार के विकास और जनहित की बजाय अव्यवस्था के ब्रांड अम्बेसडर के रूप में ज्यादा नजर आई।
माउंट आबू प्रवास के दौरान स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ मीटिंग में और बाद में होटल व्यवसाई द्वारा वसुंधरा राजे को बताया गया कि किस तरह स्थानीय अधिकारी बिल्डिंग बायलॉज के तहत स्थानीय लोगों को मिले अधिकारों का हनन कर रहे हैं और माउंट आबू में पिछले तीन सालों में एक भी डवलपमेन्ट काम नहीं किया गया है। जिससे राजे को ये कहने का मौका मिला कि ‘कांग्रेस की सरकार वैसे भी धीमी चलती है, कभी-कभी चलती ही नहीं है।’
माउंट आबू में भाजपा कार्यकर्ताओं की मीटिंग में जाती पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे।
तीन उपखण्ड अधिकारियों की शून्य उपलब्धि
माउंट आबू में पिछले तीन उपखण्ड अधिकारियों की यहां के विकास और जनहित को लेकर भूमिका में शून्य भूमिका रही है। नई पोस्टिंग ओर जो नवाचार की अपेक्षा एक नए अधिकारी से सरकार और जनता को रहती है उसमें ये नए आईएएस अधिकारी पूरी तरह से फेल रहे हैं।
गौरव सैनी से लेकर वर्तमान उपखण्ड अधिकारी कनिष्क कटारिया तक लंबे समय तो आयुक्त का कार्य भी इन्हीं के पास रहा है। दोनों पद रहते हुए भी ये लोग एक काम काम ऐसा नहीं करवा पाए जिससे अन्य राज्यों से आए पर्यटकों में ये सन्देश जाए कि कांग्रेस की कोई डवलपमेंटल अप्रोच है।
हां, अभिषेक सुराणा के उपखण्ड अधिकारी रहते हुए महात्मा गांधी की मूर्ति जरूर लगी, लेकिन वो भी ऐसी थी कि कहीं से गांधी लग नहीं रहे। वैसे इस समय आयुक्त का पदभार सुराणा के पास नहीं था।
वसुंधरा राजे के कार्यकाल में लगे उपखण्ड अधिकारियों में से अरविंद पोसवाल ने टोल नाके से एमके चौराहे तक गमलों और पौधों लगवाए जो इस मार्ग के दोनो तरफ सौंदर्य बढ़ा रहे हैं। जिनके बाद सुरेश ओला ने नक्की परिक्रमा पथ जैसे एक विजनरी प्रोजेक्ट दिया जिसे लोग आज भी सराहते हैं।
उसी कार्य को राजे के कार्यकाल में रविन्द्र गोस्वामी ने आगे बढ़ाया और रोज गार्डन का काम शुरू करवाया। ये बात अलग है कि ये काम गहलोत सरकरा में पूरा हुआ और इसके उदघाटन का श्रेय कांग्रेस ले गई। लेकिन इस प्रोजेक्ट का विजन गहलोत सरकार द्वारा लगाए उपखण्ड अधिकारियों का नहीं था। इतना ही नहीं उस समय लगे कलेक्टर्स ने भी माउंट आबू में नवाचार करने और लोगों की समस्याओं के निस्तारण में पूरी भूमिका निभाई।
इस तरह अटकाए गहलोत सरकार में काम
माउंट आबू में गौरव सैनी, अभिषेक सुराणा और कनिष्क कटारिया के समय में कोई भी डवलपमेंटल वर्क नहीं किया गया न ही नगर पालिका में किसी तरह का कोई काम हुआ। जिसके कारण गहलोत सरकार और कांग्रेस के पास माउंट आबू को लेकर वसुंधरा राजे के हमले का कोई जवाब नहीं है। भाजपा शासन में वसुंधरा राजे सरकार ने न सिर्फ जोनल मास्टर प्लान लागू किया बल्कि बिल्डिंग बायलॉज़ को भी सिर्फ 7 दिन के न्यूनतम समय में गजट नोटिफिकेशन करवा दिया।
लेकिन इस बिल्डिंग बायलॉज में कुछ तकनीकी खामियां रह गईं थी। कांग्रेस सरकार आई तो लोकसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बामनवाड़ जी में बिल्डिंग बायलॉज लागू करवा दिया। लेकिन, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बायलॉज को आयुक्त के पद पर रहते हुए गौरव सैनी ने अटका दिया और कनिष्क कटारिया ने 25 अप्रैल 2022 को बिल्डिंग बायलॉज़ को अंतिम रूप मिल जाने पर भी उसको नोटिफिकेशन के नाम और अटका दिया, जिसे वर्तमान आयुक्त शिवपालसिंह भी ये जानते हुए अटकाए हुए हैं कि ये मुख्यमंत्री की मंशा है।
गंदगी का आलम है है कि सालाना 5 करोड़ रुपए कमाकर देने वाली नक्की पर जहां तीन समय सफाई होकर कचरा उठाना चाहिए वहां सुबह सात-आठ बजे तक कचरे का ढेर सड़ांध मारता रहता है और सफाई नहीं होती। सूरत से आए एक पर्यटक ने माउंट आबू को अपना सबसे फेवरेट हिल स्टेशन बताते हुए सबगुरु न्यूज से हुई बात में इस खूबसूरत जगह पर बदहाल ट्रैफिक और गंदगी के आलम पर दुख जताया।
इस गंदगी को लेकर भी वसुंधरा राजे ने कांग्रेस को आड़े हाथों लिया था। कुल मिलाकर उपखण्ड अधिकारियों और आयुक्तों ने माउंट आबू में मरणासन्न पड़ चुकी भाजपा को खाद देने के लिए वो हर काम कर दिया जिससे गहलोत सरकार और कांग्रेस को विफल साबित करने के भाजपा के 2023 के एजेंडे को खाद मिल सके। गहलोत सरकार में बस एक काम बड़े मन से किया और वो है सत्त्ताधारी नेता के बेटे के नाम से आवेदित लिमबड़ी कोठी में अपने संरक्षण में ईएसजेड के प्रावधानों के विपरीत जाकर निर्माण कार्य करवाने का।
मैड्रिड। स्पेन के उत्तरी अफ्रीकी क्षेत्र मेलिला में प्रवासियों और सीमा अधिकारियों के बीच दो घंटे की झड़प के बाद सीमा में घुसने के लिए मची भगदड़ में कम से कम 18 लोगों की मौत हो गई और कई घायल हो गए।
वीओए न्यूज ने मोरक्को और स्पेनिश अधिकारियों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में बताया कि करीब दो हजार प्रवासियों ने शुक्रवार को सीमा पर एक ऊंचे बाड़ पर धावा बोल दिया, जिसके कारण सुरक्षा बलों के साथ झड़पें हुई। इसी दौरान वहां मची भगदड़ में 18 लोगों की मौत हो गई जबकि कई अन्य घायल हुए हैं।
मोरक्को के गृह मंत्रालय ने इससे पहले बताया था कि घटना में पांच प्रवासियों की मौत हुई है और 76 अन्य घायल हुए हैं। बाद में 13 और लोगों के मारे जाने की जानकारी दी गयी। मोरक्को के सुरक्षा बलों के लगभग 140 सदस्य भी घायल हुए हैं, जिनमें पांच की हालत गंभीर बताई गई है। सभी घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
ओस्लो। नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में शनिवार तड़के एक बंदूकधारी ने दो नाइटक्लब के बाहर गोलीबारी की जिससे कम से कम दो लोगों की मौत हो गयी और 14 अन्य घायल हो गए। ओस्लो की पुलिस ने ट्विटर पर यह जानकारी दी।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि घटना की सूचना मिलने के पांच मिनट बाद एक संदिग्ध हमलावर को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने हालांकि उसकी पहचान का खुलासा नहीं किया गया है। द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक दो नाइट क्लबों में से एक लंदन पब ओस्लो में समलैंगिक नाइटलाइफ़ का केंद्र है।