नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस में ममता बनर्जी के नेतृत्व को एक बड़ा झटका देते हुए पार्टी के 20 लोकसभा सदस्यों ने रविवार को नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी में विलय की घोषणा की और अध्यक्ष ओम बिरला से मिल कर सदन में के सदस्य के रूप में लग बैठने की अनुमति दिये जाने का अनुरोध-पत्र दिया।
बिड़ला से मुलाकात के बाद इस गुट की ओर कहा गया कि वे सदन में अलग बैठेंगे और प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के साथ सहयोग करेंगे। बिरला से लोकसभा अध्यक्ष के निवास पर मुलाकात से निकल कर ममता की चार दशक की सहयोगी रहीं वरिष्ठ सदस्य और बागी गुट की नेता काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर चुने गए 20 सदस्यों ने आज लोक सभा अध्यक्ष से मुलाकात कर के उन्हें सदन में अलग बैठने की अनुमति देने का अनुरोध-पत्र दिया है। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष से मिले इस समूह में 20 सदस्य है और उनकी संख्या, सदन में पार्टी के सदस्यों की कुल संख्या के दो-तिहाई से अधिक है।
काकोली घोष ने कहा हम नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी में विलय कर रहे हैं। आगे बढ़ते हुए, हम राष्ट्र के लिए कार्य करेंगे और प्रधानमंत्री के नेतृत्व में राजग के साथ मिलकर काम करेंगे। इस मुलाकात के बाद गुट में शामिल सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने कहा कि बागी नेताओं ने नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी के साथ विलय किया है, यह एक राजनीतिक पार्टी है, एक मान्यता प्राप्त क्षेत्रीय पार्टी है। असली तृणमूल कांग्रेस कौन है, यह अदालत में तय होगा। इससे पहले, टीएमसी के बागी नेता दिल्ली में भाजपा नेता भूपेंद्र यादव से मिले थे।
सूत्रों ने बताया कि अलग हुए समूह के लोक सभा सदस्यों में 19 के नाम गिनवाए जिनमें जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया, खलीलुर्रहमान, यूसुफ पठान,अबू ताहेर खान, पार्थ भौमिक, काकोली घोष दस्तीदार, बापी हल्दर, सायोनी घोष, माला रॉय, सुदीप बंद्योपाध्याय, रचना बनर्जी, मिताली बेग, दीपक अधिकारी, कालीपद सोरेन, जून मालिया,अरुप चक्रवर्ती, डॉ. शर्मिला सरकार, असित कुमार मल, शताब्दी रॉय शामिल हैं।
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल विधान सभा में तृणमूल कांग्रेस की करारी पराजय के बाद पार्टी सदस्यों में सुप्रीमो ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व के प्रति भारी नाराजगी दिख रही है। लोकसभा में 28 सदस्यों के साथ तृणमूल कांग्रेस (99) और समाजवादी पार्टी (37) के बाद तीसरा सबसे बड़ा दल था।
इससे पहले सांसद अभिषेक बनर्जी ने बिरला को एक पत्र लिखकर आग्रह किया कि वे पार्टी के भीतर किसी भी विभाजित या अलग हुए समूह को मान्यता न दें। बनर्जी ने अपने पत्र में स्पष्ट रूप से तर्क दिया है कि तृणमूल कांग्रेस राजनीतिक और कानूनी दोनों ही दृष्टिकोण से एक एकल और एकीकृत राजनीतिक दल है। उन्होंने कहा कि लोकसभा में पार्टी का संसदीय दल मूल संगठन का एक अविभाज्य हिस्सा है और सांसदों का कोई भी समूह उसी राजनीतिक दल के भीतर रहते हुए अलग से मान्यता का दावा नहीं कर सकता है।
बनर्जी ने लिखा कि तृणमूल कांग्रेस एक अविभाज्य राजनीतिक दल है। कानूनी तौर पर भी केवल एक ही तृणमूल कांग्रेस है। उन्होंने आगे लिखा कि लोकसभा में पार्टी का केवल एक ही मान्यता प्राप्त नेता और एक ही व्हिप है, जिनकी नियुक्ति पार्टी के संगठनात्मक नेतृत्व की मंजूरी से की गई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सांसद एकतरफा तरीके से कोई समानांतर समूह नहीं बना सकते और न ही सदन में अलग मान्यता की मांग कर सकते हैं।
यह पत्र रविवार शाम को राज्यसभा सांसद सागरिका घोष और लोकसभा सांसद कीर्ति आजाद द्वारा बिरला के आवास पर पहुंचाया गया था। संसद काकोली घोष ने बाद में एक समाचार चैनल से बातचीत में कहा कि हम राजग के साथ जुड़ना चाहते हैं। आगे की रणनीति के बारे में पूछे जाने के बारे में उन्होंने कहा समूह के सदस्य इस पर विचार करेंगे।



