उदयपुर। राजस्थान में उदयपुर में आयोजित एक सामूहिक विवाह समारोह में रविवार को देश के विभिन्न राज्यों से आए 51 दिव्यांग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के 51 जोड़े विवाह बंधन में बंध गए।सामूहिक विवाह में शामिल जोड़ों में 25 दिव्यांग और 26 आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के हैं।
यह दो दिवसीय कार्यक्रम नारायण सेवा संस्थान के तत्वावधान में आयोजित हुआ। संस्थान के अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने पत्रकारों को यह जानकारी देते हुए बताया कि इस समारोह में विभिन्न राज्यों से आए इन जोड़ों ने वैदिक मंत्रोच्चारण और पवित्र अग्नि की साक्षी में सात फेरे लेकर जीवन की नई यात्रा शुरू की।
उन्होंने बताया कि संस्थान में अब तक 2510 दिव्यांग एवं निर्धन युवक-युवतियों के विवाह सम्पन्न कराए जा चुके हैं। संस्थान की ओर से प्रत्येक जोड़े को नई गृहस्थी बसाने के लिए कुछ सामान जैसे पलंग, बिस्तर, अलमारी, बर्तन, गैस चूल्हा, डिनर सेट, पंखा और अन्य आवश्यक सामग्री उपहार स्वरूप भेंट की गई।
रविवार को विवाह बंधन बंधे जोड़ों में ऐसे कई युवक-युवतियां शामिल थे जिन्होंने विभिन्न प्रकार की दिव्यांगता के बावजूद जीवन से हार नहीं मानी। कोई पैरों से दिव्यांग है, कोई एक हाथ या पैर से, तो कुछ दृष्टिबाधित हैं। जीवन की कठिन राहों से गुजरने वाले ये जोड़े अब एक-दूसरे का सहारा बनकर नए सपनों के साथ आगे बढ़ेंगे। अधिकतर जोड़ों ने संस्थान में ही नि:शुल्क सर्जरी, कृत्रिम अंग, कैलिपर्स और पुनर्वास सेवाएं प्राप्त कीं और कौशल प्रशिक्षण के माध्यम से आत्मनिर्भरता की राह पकड़ी।
गुजरात के बनासकांठा जिले के विजय गमार ने उदयपुर के चिखला गुड़ा की मंजू को जीवनसंगिनी चुना, जो पैरों से दिव्यांग हैं। विजय का कहना है कि मंजू भले ही शारीरिक रूप से दिव्यांग हों, लेकिन उन्हें विश्वास है कि वे उनके जीवन को खुशियों और उम्मीदों से भर देंगी।
समारोह के मुख्य अतिथि दर्शना मेहता, यश मेहता और ओम प्रकाश सोनी सहित संस्थान संस्थापक पद्मश्री कैलाश ‘मानव’, कमला देवी, वंदना अग्रवाल, पलक अग्रवाल सहित अनेक अतिथि, दानदाता और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद थे।




