कोलकाता। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने शनिवार को अपने आधिकारिक आवास सह कार्यालय का नाम ‘राज भवन’ से बदलकर ‘लोक भवन’ कर दिया।
सन 1803 में निर्मित, यह भवन भारत में कंपनी शासन के दौरान गवर्नमेंट हाउस और बाद में ब्रिटिश राज के नाम से जाना जाता था। सन 1858 में ईस्ट इंडिया कंपनी से ब्रिटिश राजशाही को सत्ता हस्तांतरण के बाद, यह बेलवेडियर एस्टेट से स्थानांतरित होकर भारत के वायसराय का आधिकारिक निवास बन गया।
सन 1911 में भारतीय राजधानी के तत्कालीन कलकत्ता से नई दिल्ली स्थानांतरित होने पर, यह बंगाल के राज्यपाल का आधिकारिक निवास बना और अगस्त 1947 में स्वतंत्रता के बाद से, यह पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के आधिकारिक निवास के रूप में कार्य कर रहा है और इसे राजभवन के नाम से जाना जाता था।
यह कदम केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश के बाद उठाया गया है। इसके तहत देश भर के सभी ‘राजभवन’ और ‘राज निवास’ का नाम बदलकर क्रमशः ‘लोक भवन’ और ‘लोक निवास किया जाना है।
यह बदलाव लोकतांत्रिक संस्थाओं में लोक भागीदारी के केंद्र सरकार के दृष्टिकोण के अनुरूप है और इसका उद्देश्य भवन की औपनिवेशिक काल की विशिष्टता की आभा को खत्म कर इसे नागरिकों के लिए अधिक सुलभ बनाना है।
राज्यपाल के आधिकारिक ‘एक्स’ हैंडल को पहले ही नए नाम, लोक भवन, कोलकाता को दर्शाने के लिए नया कर दिया गया है। यह कदम राज्यपाल बोस द्वारा मार्च 2023 में शुरू की गई जन राजभवन पहल का विस्तार है, जिसने ऐतिहासिक भवन तक आम जनता की पहुँच को संभव बनाया था।
बोस ने पत्रकारों से कहा कि यह ऐतिहासिक स्थल अब आम लोगों का स्थान बन गया है और जो भी आना चाहता है, उसका हमेशा स्वागत है। नाम बदलने के बाद, बोस ने विक्टोरिया मेमोरियल सहित शहर के कुछ स्थानों का दौरा किया और आम लोगों के साथ बातचीत की।


