आबूरोड में बजरी की अवैध वसूली से भाजपा ग्रामीण मंडल में भी नाराजगी

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आबूरोड में बजरी की लीज राशि को अवैध वसूली।

सबगुरु न्यूज-आबूरोड। आबूरोड में बिना एनवायरमेंट क्लीयरेंस और प्रोसीड टू कंसेंट लेटन के एलआईओ पर ही बजरी की अवैध वसूली करने के मामले में आबूरोड ग्रामीण के भाजपा नेताओं में भी नाराजगी है।

पार्टी सूत्रों के अनुसार हाल ही में आबूरोड के भाखर मंडल की बैठक में एक वरिष्ठ कायकर्ता ने इस पर नाराजगी जताई थी। उन्होंने कहा था कि बजरी की अवैध वसूली भाजपा को पंचायती राज चुनावों में भारी पडेगी। पार्टी सूत्रों ने बताया कि इसी बैठक में जिला संगठन के भी एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने इससे सहमति जताई थी। बैठक में प्रतिनिधियों ने कहा कि बजरी के ट्रेक्टरों के पीछे तीन-तीन जीपें लग जाती हैं। बिना अधिकार के उन्हें पकडती हैं और वसूली करती हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार बैठक में ये भी आरोप लगाया गया था कि ट्रैक्टरों को पकडकर अवैध वसूली करने वाले लोग संगठन के ही एक जनप्रतिनिधि के लोग होने की दलील भी देते हैं, इससे ग्रामीण क्षेत्रों में संगठन के खिलाफ असंतोष पनप रहा है।

-पहले लेते थे हजार फिर किया छह सौ

कांग्रेस के धरने में संयम लोढा ने आरोप लगाया था कि बजरी की लीज नहीं होने के बावजूद कुछ लोग आबूरोड में बजरी की अवैध रूप से लीज वसूली कर रहे हैं। उस समय उन्होंने आरोप लगाया था कि ये लोग बिना लीज के ही एक हजार रुपये प्रति ट्रेक्टर वसूल रहे हैं। सूत्रों अनुसार इस धरने में ये मुद्दा उठने के बाद इन लोगों ने ये वसूली एक हजार से घटाकर छह सौ रुपये कर दी है।

– मोबाइल रखवाते हैं बाहर

आबूरोड में बजरी की तीन साइटों के साइट प्लान की खनि विभाग के द्वारा स्वीकृति होकर एलओआई जारी हुई है। इस एलओआई को ही आधार बनाकर वसूली की जा रही है। ये वसूली सडक पर नहीं करके लूनियापुरा से हाइवे जाने वाले मार्ग की एक काॅलोनी में एक मकान के पहले माले पर करते हैं। यहां पर हर ट्रेक्टर वाला नहीं जा सकता है। ऐसे में वसूली करने वाले नेताओं के सरपरस्तों ने आठ-दस के समूह पर एक प्रतिनिधि नियुक्त कर दिया है।

प्रतिदिन प्रति ट्रेक्टर के अनुसार ट्रैक्टर चालक राशि इस प्रतिनिधि को दे देते हैं। ये प्रतिनिधि उक्त स्थान पर जाकर ये राशि जमा करवा देते हैं। सूत्रों के अनुसार इन प्रतिनिधियों के भी प्रथम माले पर पहुंचने से पहले मोबाइल आदि घर के बाहर ही रखवा लिया जाता है। प्रतिदिन ये लोग तीस से पचास हजार की अवैध वसूली करके सरकार को नोट और वोट दोनों का नुकसान पहुंचा रहे हैं।