चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल की ऊंची इमारतों में मतदान बूथ स्थापित करने की मंजूरी दी

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कोलकाता। चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के विरोध के बावजूद में बहुमंजिले आवासीय परिसरों में मतदान बूथ स्थापित करने की मंजूरी दी है।

आयोग ने कई महीनों से चल रहे विवाद के बीच यह कदम उठाया है।
सूत्रों के अनुसार, कुल सात जिलों में 69 बहुमंजिले आवासीय परिसरों की पहचान की गई है। 300 से अधिक पंजीकृत मतदाता वाले परिसरों में मतदान बूथ स्थापित किए जाएंगे।

पश्चिम बंगाल में मुख्य चुनाव अधिकारी के कार्यालय के अधिकारियों के अनुसार दक्षिण कोलकाता के दो और उत्तर कोलकाता के आठ आवासीय परिसरों में मतदान बूथ स्थापित किए जाएंगे। जिलों की बात करें तो दक्षिण 24 परगना में सबसे अधिक 25 ऐसे परिसर होंगे। इसके बाद उत्तर 24 परगना में 22 होंगे। हावड़ा में चार, पूर्व बर्दवान में तीन और हुगली में पांच आवासीय परिसरों में मतदान बूथ स्थापित किए जाएंगे।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने पहचान छिपाने की शर्त पर जानकारी दी कि जहां मतदाताओं की संख्या 300 से अधिक है, वहां मतदान बूथ स्थापित किए जाएंगे। आयोग ने रिपोर्टों और सर्वेक्षणों की समीक्षा के बाद अंतिम निर्णय लिया है।
इससे पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निजी ऊंची आवासीय परिसरों में मतदान बूथ स्थापित करने के प्रस्ताव का विरोध निष्पक्षता और सुरक्षा संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए किया था।

अधिकारियों ने कहा कि विवाद तब शुरू हुआ, जब चुनाव आयोग ने राज्य प्रशासन को मतदान भागीदारी में सुधार के लिए मतदान बूथ स्थापित करने के लिए उपयुक्त आवासीय परिसरों की पहचान करने का निर्देश दिया। सीईओ के कार्यालय ने जिला चुनाव अधिकारियों (डीईओ) से योग्य आवासीय परिसरों पर रिपोर्ट मांगी थी।

एक अधिकारी ने बताया कि बार-बार याद दिलाने के बावजूद डीईओ समय सीमा के भीतर रिपोर्ट पेश करने में विफल रहे। पहले डाटा और आवेदनों की कमी के कारण सीईओ कार्यालय ने योजना से पीछे हटने का फैसला किया था।

हालांकि आयोग के दबाव में इस मुद्दे को 30 दिसंबर को आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में उठाया गया। इसकी अध्यक्षता आयोग के उपचुनाव आयुक्त ज्ञानेश भारती ने की। इसमें मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल और उत्तर व दक्षिण 24 परगना के जिलाधिकारियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

आयोग ने मतदान बूथों को स्थापित करने के लिए आवासीय परिसरों की पहचान के लिए अपनी टीम बनाने का निर्णय लिया और लंबी चर्चाओं के बाद आयोग ने 69 आवासीय परिसरों पर ध्यान केंद्रित किया, जहां बूथ स्थापित किए जा सकते हैं।

दिलचस्प तथ्य यह है कि इस प्रस्ताव को लेकर तेज राजनीतिक मतभेद देखने को मिले हैं। तृणमूल कांग्रेस ने यह तर्क देते हुए लगातार इस कदम का विरोध किया है कि मतदान बूथ आमतौर पर सरकारी विद्यालयों में स्थापित होते हैं और निजी आवासीय परिसरों के अंदर बूथों से चुनावी निष्पक्षता और सुरक्षा से समझौता हो सकता है।

वहीं भाजपा ने यह दावा करते हुए समर्थन किया है कि बड़े आवासीय परिसरों के मतदाता अक्सर कथित धमकी के कारण मत डालने से बचते हैं। पार्टी ने तर्क दिया है कि आवासीय परिसरों के अंदर बूथ स्थापित करने से अधिक भागीदारी सुनिश्चित होगी।