राजस्थान हाईकोर्ट ने नवोदय विद्यालय के रसोई सहायकों को नियमित करने का दिया आदेश

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अजमेर/जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने नवोदय विद्यालयों में वर्षों से कार्यरत रसोई सहायकों को नियमित करने का आदेश दिया है।

यह फैसला सुनाते हुए न्यायाधीश आनंद शर्मा ने मंगलवार को कहा कि नवोदय विद्यालय केवल शिक्षा देने वाली संस्था ही नहीं बल्कि एक संगठित संस्थान है जहां नियमित श्रमिक कार्यरत हैं। ऐसे में विद्यालयों को श्रम कानूनों के दायरे से बाहर नहीं रखा जा सकता।

मामला नवोदय विद्यालय, अजमेर से जुड़ा था, जहां दो रसोई सहायक धनराज चौधरी और अमर सिंह वर्ष 1993 से लगातार सेवाएं दे रहे थे। दशकों तक पूर्णकालिक कार्य के बावजूद उन्हें नियमित नियुक्ति नहीं दी गई। उन्होंने श्रम न्यायालय में गुहार लगाई, जिसने उनके पक्ष में निर्णय देते हुए नियमितीकरण का आदेश दिया। इसके बाद विद्यालय प्रशासन ने इसे उच्च न्यायालय में चुनौती दी।

न्यायाधीश आनंद शर्मा ने अपने विस्तृत निर्णय में कहा कि विद्यालय प्रशासन द्वारा लंबे समय से निरंतर और स्थायी कार्य करवाकर भी कर्मचारियों को अस्थायी रखना औद्योगिक विवाद अधिनियम का सीधा उल्लंघन है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि नवोदय विद्यालय संगठन (एनवीएस) एक ऐसी संस्था है जो भोजन, सफाई, रसोई प्रबंधन और अन्य नियमित सेवाओं के लिए श्रमिक नियुक्त करती है, इसलिए इसे उद्योग के रूप में मानना पूर्णतः उचित है।

उच्च न्यायालय ने श्रम न्यायालय के पूर्व आदेश को बहाल करते हुए निर्देश दिया कि दोनों कर्मचारियों को 1993 से सेवा की निरंतरता मानते हुए नियमित कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। साथ ही, उन्हें तीन वर्ष का बकाया वेतन, सभी वित्तीय लाभ, वरिष्ठता और पेंशन सम्बन्धी अधिकार प्रदान करने के आदेश दिया। यह पूरी प्रक्रिया तीन महीने में पूरी की जाएगी।