प्रशासन की मेहनत पर संगठन ने फेरा पानी, CM के भाषण के दौरान आधा खाली हुआ पांडाल

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सिरोही में मुख्यमंत्री के भाषण के दौरान पांडाल छोड़कर जाते लोग खाली होती कुर्सियां।

सबगुरु न्यूज-सिरोही। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के किसान सम्मान निधि की पांचवी किश्त वितरण और ग्लोबल राजस्थान मीट के तहत ग्राम उत्थान शिविरों के शुभारम्भ के राज्य स्तरीय कार्यक्रम के लिए सिरोही आए। सिरोही के अरविंद पवेलियन में आयोजित किए जाने वाले इस कार्यक्रम में भीड़ जुटाने के लिए सिरोही, पाली और जालौर के अधिकारियों और नेताओं ने पूरी ताकत झोंक दी।

मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में भीड़ तो आ गई लेकिन, इस भीड़ को मुख्यमंत्री के भाषण के दौरान पांडाल में ही रोकने में सिरोही जिला भाजपा पूरी तरह से नाकाम रही। वो इन्हें रोकने के लिए वॉलेंटियर की व्यवस्था तक नहीं कर सकी। मुख्यमंत्री का भाषण आधा भी खत्म नहीं हुआ होगा कि आधे से ज्यादा पांडाल खाली हो चुका था।

सिरोही में मुख्यमंत्री भाषण दौरान सिरोही में एलईडी में प्रदर्शित हुआ बीकानेर कलेक्ट्रेट का खाली पड़ा वीसी कक्ष।

सिरोही में पूरे प्रदेश स्तर का कार्यक्रम था ऐसे में प्रदेश के सभी जिला मुख्यालय के कार्यक्रम स्थल और एनआईसी कार्यालय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से माध्यम से सीधे यहां से जुड़े हुए थे। मुख्यमंत्री के मंच पर चलने वाले डिस्प्ले में साढ़े तीन बजे बीकानेर एनआईसी की ऐसी तस्वीर आई जिसने पांडाल में गॉसिप को हवा दे दी। यहां के वीसी रूम की टेबल पर एकाध कार्मिक बैठे दिखे शेष कुर्सियां पूरी तरह से खाली नजर आईं। मीडिया के कैमरे इस पर गए तो तकनीशियन ने तत्परता दिखाई और उसकी जगह जालौर की एनआईसी को बीकानेर से रिप्लेस करके डिस्प्ले किया।

पुलिस अधीक्षक के प्रयास भी विफल

लोगों को बीच भाषण में जाते हुए देखकर पुलिस वाले उन्हें रोकने की कोशिश करते दिखे लेकिन, कोई रुका नहीं। क्या औरत क्या आदमी। नदी के रेले की तरह पांडाल छोड़ने की होड में शामिल थे। सिरोही पुलिस अधीक्षक तक ने उन्हें रोकने का प्रयास किया लेकिन, वो नहीं रुके। मीडिया के कैमरों को देखकर उन्हें भी फोन का कान पर लगाकर कैमरे की जद से बाहर होने की कवायद करनी पड़ी। पंडाल खाली होता रहा।

सिरोही में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के दौरान लोगों को फिर से बैठने का कहते सिरोही पुलिस अधीक्षक।

सिरोही के मंत्री, विधायक और जिलाध्यक्ष भी मंच से दर्शक बने रहे रहे। लेकिन, अपने करीबी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को मुख्यमंत्री से मुलाकात की लाइन में शामिल करने की होड करने वाले इन तीनों ही नेताओं ने अलग-अलग गांवों से लाए गए लोगों को रोकने के लिए अपने विश्वस्त कार्यकर्ताओं को पंडाल में भेजने की जहमत नहीं उठाई। मुख्यमंत्री के साथ मंच शेयर करने का गौरव हासिल करने का ऐसा मोह था कि खुद मुख्यमंत्री को उनके कार्यक्रम पर गौरव करने का मौका नहीं दिया।

मुख्यमंत्री के आगमन पर स्वागत की सूची में अपना और अपने करीबियों का नाम वेरिफाई करवाते सिरोही भाजपा के नेता।

पदाधिकारियों की भी फजीहत कम नहीं

भजनलाल प्रशासन में प्रदेश समेत सिरोही में भाजपा कार्यकर्ताओं की दुर्गत किसी से छिपी नहीं है। कार्यकर्ताओं की अनदेखी करने के मामले में भजनलाल सरकार अशोक गहलोत सरकार 3.0 की तरह काम कर रही है। उसमें कांग्रेस के कार्यकर्ता अधिकारियों द्वारा उनके कामों को तवज्जो नहीं देने की शिकायत करते थे अब भी शिकायत भाजपा कार्यकर्ता करते नजर आ रहे हैं।

हालात ये है कि अपने काम के लिए जाने पर भाजपा के पूर्व पार्षद तक राजकार्य में बाधा का मामला दर्ज हो चुका है। तो कार्यकर्ताओं को तो सिरोही में मुख्यमंत्री के आगमन पर वैसे भी कोई विशेष मोह नहीं था। लेकिन, जिला, मंडल और मोर्चों के पदाधिकारियों को ये आशा भर थी कि काम नहीं होते तो कोई बात नहीं मुख्यमंत्री के आने या जाने के समय हवाई पट्टी, प्रदर्शनी या मंच में कहीं मुख्यमंत्री का अभिवादन करने को मिल जाए। और उनकी फोटो खिंच जाए ताकि मोहल्ले और पार्टी में ये ताने नहीं सुननी पड़े कि दिनभर पार्टी के पीछे लगे रहते है और पार्टी है कि पूछती नहीं।

जिला और मंडल के कई पदाधिकारियों के नाम मुख्यमंत्री से मुलाकातियों की किसी सूची में नहीं था। इसकी नाराजगी ये लोग मीडिया के बीच दिखाते दिखे। आबूरोड माउंट आबू समेत कई स्थानों के तो उन पदाधिकारियों के भी नाम नहीं इस सूची में नहीं थे जो पार्टी के कार्यक्रमों में पैसा और पसीना पानी की तरह बहा देते हैं। माउंट आबू के तो ऐसे ही कुछ पदाधिकारी मायूस होकर लौट भी गए।

सिरोही के कुछ पदाधिकारियों का आरोप था कि कार्यक्रम स्थल पर मुख्यमंत्री के लिए बने पांडाल में दो लोगों को रहना था लेकिन, नेताओं ने अपने करीबी आधा दर्जन नेताओं को वहां डलवा दिया। वहीं मंच के पास मुख्यमंत्री के आगमन के दौरान अभिवादन करने वालों की पूरी की पूरी सूची नहीं निरस्त होने का भी आरोप पदाधिकारी लगाते दिखे। कार्यकताओं तो ये भी आरोप था कि सिरोही के नवनियुक्त जिला प्रभारी को भी मंच पर वो तवज्जो नहीं मिली जो प्रदेश अध्यक्ष के रूप में मंच पर मौजूद मदन राठौर सिरोही जिले के प्रभारी रूप में लिया करते थे।

मुख्यमंत्री की कांग्रेस को चेतावनी

समय ज्यादा हो जाने से दर्शक दीर्घा में बैठे लोगों में मुख्यमंत्री को सुनने के लिए रुकने की क्षमता नहीं थी लेकिन मुख्यमंत्री भजनलाल के हौसले भी कम नहीं थे। अपने कार्यक्रम में निर्धारित समय से एक घंटे की देरी से पहुंचे मुख्यमंत्री का इंतजार किसी को रहा नहीं था। मुख्यमंत्री ने बोलना शुरू किया। लोगों ने कुछ देर में पांडाल छोड़कर जाना के दिया। अपनी सरकार की पीठ थपथपाई। कांग्रेस को कोसा। उन्होंने नाम लिए बिना कांग्रेस सबसे बड़बोले नेता पर निशाना साधते हुए चेतावनी भी दे दी।

उन्होंने कहा कि कुछ लोग कहते हैं कि उन्हें बोलने नहीं आता। लेकिन कांग्रेस ये जान ले कि उनके समय में किया हुए भ्रष्टाचार का हिसाब किया जाएगा। मुख्यमंत्री के मुंह से अपने लिए कोई घोषणा नहीं सुनने की दलील देते हुए वहां आई महिलाएं पुरुष पांडाल छोड़ने लगे। आरोप ये लग रहा है कि इन लोगों को कुछ लोगों ने ये बोलकर भी एकत्रित किया था कि उनके लिए भी मुख्यमंत्री घोषणा करेंगे।

नेताओं की पीआर टीम फायदा मीडिया को

पिछले कुछ सालों में प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री बड़े कैबिनेट मंत्रियों के साथ उनकी अपनी पीआर टीम चलती है। इसके चलते इन नेताओं जुड़ी सिक्योरिटी टीम भी उन जगहों मीडिया को आने नहीं देती जहां ये नेता उनके करीब हो सकें। उनके भाषण तुरंत यूट्यूब लाइव आ जाते हैं। ऐसे में मीडियाकर्मियों पर भी पूर्व को तरह भाषण और कार्यक्रम चूक जाने का दबाव नहीं था। दबाव मुक्त होने से उन्हें पंडाल के बाहर दर्शक दीर्घा में आने का मौका मिल जाता हैं जहां वास्तविक खबरें बिखरी हुई रहती हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल कार्यक्रम दौरान भी यही हुआ। हवाई पट्टी, मंच, प्रदर्शनी सब जगह उनकी पीआर टीम थी तो मीडियाकर्मी बाहर कवर करने लगे। बाहर आते ही मुख्यमंत्री भाषण के दौरान लोगो पंडाल छोड़ देने के दृश्य कैमरों कैद हो गए।