महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय में कर्तव्य बोध पर विशेष व्याख्यान
अजमेर। महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की विश्वविद्यालय इकाई की ओर से कर्तव्य बोध विषय पर एक प्रेरक व्याख्यान का आयोजन किया गया।
इस मौके पर मुख्य वक्ता राजस्थान लोक सेवा आयोग से सदस्य डॉ अशोक कलवार ने अपने संबोधन में भारतीय इतिहास के महान व्यक्तित्वों के कर्तव्य बोध के उदाहरण प्रस्तुत किए। चाणक्य के तक्षशिला में शिक्षा ग्रहण करने और सिकंदर के आक्रमण से देश की रक्षा करने, भगवान राम के 14 वर्ष के वनवास के दौरान समाज के कल्याण के लिए किए गए कार्यों का उल्लेख किया गया।
महाभारत की गीता को कर्तव्य बोध का सर्वोत्तम उदाहरण बताते हुए कहा गया कि श्रीकृष्ण ने अर्जुन को कर्तव्य पथ पर लाने के लिए 18 अध्यायों का ज्ञान दिया। भीष्म पितामह की प्रतिज्ञा और विदुर की नीति को भी कर्तव्यनिष्ठा के उत्कृष्ट उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया। उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज, महाराणा प्रताप, गुरु गोविंद सिंह, पृथ्वीराज चौहान और सुभाष चंद्र बोस के बलिदान और कर्तव्यनिष्ठा का विस्तार से वर्णन किया।
गुरु तेग बहादुर के बलिदान और उनके पुत्रों की शहादत को धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए सर्वोच्च त्याग बताया गया। उन्होने बताया कि पंडित मदन मोहन मालवीय द्वारा काशी विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए किए गए प्रयासों का उल्लेख करते हुए बताया कि कैसे उन्होंने भिक्षा मांगकर भी इस महान शैक्षणिक संस्थान का निर्माण किया। शिक्षकों और विद्यार्थियों से अपील करते हुए डॉ अशोक कलवार ने शिक्षकों से कहा कि उनका कर्तव्य केवल कक्षा में पढ़ाना नहीं है, बल्कि व्यक्ति निर्माण और राष्ट्र निर्माण करना है।
विद्यार्थियों की समस्याओं को समझना और उनका समाधान करना शिक्षक का दायित्व है। केवल किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं है। अनुसंधान और नवाचार में रुचि लेकर देश के विकास में योगदान देना चाहिए। एक एमबीबीएस छात्र की शोध यात्रा का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि कैसे उसने कैंसर और रक्त समूह पर 10 शोध पत्र प्रकाशित किए। उन्होंने वर्तमान चुनौतियों के रूप में युवाओं में बढ़ते अवसाद, चारित्रिक पतन, नशे की लत और मोबाइल की लत जैसी समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित किया गया।
पिछले वर्ष 350 मेडिकल छात्रों द्वारा आत्महत्या के आंकड़े साझा करते हुए चिंता व्यक्त की साथ ही राष्ट्र निर्माण का आह्वान में प्रधानमंत्री के मिशन कर्मयोगी और नेशन फर्स्ट के आदर्श वाक्य का उल्लेख करते हुए कहा कि 2047 तक भारत को विश्वगुरु बनाने के लक्ष्य की प्राप्ति केवल युवाओं के कर्तव्यबोध और समर्पण से ही संभव है। अंत में उन्होंने सभी का आह्वान किया कि चरित्र निर्माण और नैतिक मूल्यों को विकसित करते हुए राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलगुरु प्रो सुरेश कुमार अग्रवाल ने कहा कि कर्तव्यनिष्ठा का जीवंत उदाहरण डॉ. कलवार ने शिक्षकों और छात्रों से संवाद को प्राथमिकता देते हुए कार्यक्रम में भागीदारी की। कैंसर विशेषज्ञ होने के नाते निजी प्रैक्टिस में अधिक आय का विकल्प छोड़कर उन्होंने देशसेवा का मार्ग चुना, जो स्वयं में कर्तव्यनिष्ठा का प्रेरक उदाहरण है। उन्होंने बताया कि भारतीय संस्कृति में कर्तव्य बोध संबोधन में इस बात पर जोर दिया गया कि भारतीय संस्कृति मूलतः कर्तव्य बोध की संस्कृति रही है। राजा का प्रजा के प्रति, माता-पिता का संतान के प्रति, शिक्षक का छात्र के प्रति-सभी संबंधों का आधार कर्तव्य रहा है।
कुलगुरु ने अपने जीवन के जापान यात्रा के दौरान के अनुभव साझा करते हुए बताया कि वहां शिक्षक अपनी कक्षा से 5 मिनट पहले कक्षा कक्ष के बाहर खड़े रहते हैं। यदि किसी दिन विलंब हो जाए तो वे इसके लिए पश्चाताप करते हैं और छात्रों के नष्ट हुए समय की क्षतिपूर्ति करते हैं। यह समयनिष्ठा और कर्तव्यबोध का उत्कृष्ट उदाहरण है। सभी का आह्वान करते हुए कुलगुरु ने कहा कि कर्तव्य बोध की शुरुआत उस संस्थान से होती है जहां व्यक्ति कार्य करता है। कर्तव्य बोध में राष्ट्र बोध और समाज बोध दोनों समाहित हैं।
उन्होंने गीता के स्थितप्रज्ञ अध्याय का उल्लेख करते हुए कहा गया कि लाभ-हानि और सुख-दुख की चिंता किए बिना कर्तव्य पथ पर चलते रहना ही जीवन का मूल मंत्र है। जयद्रथ वध से प्रेरक पंक्तियों का उल्लेख करते हुए उन्होने कहा कि “सुख दो दुख हो जो शोक जब जो आ गिरे सो धैर्य पूर्व सहो, होगी सफलता क्यों नहीं कर्तव्य पथ पर यदि तुम रहो।
कुलगुरु प्रो अग्रवाल ने शिक्षकों और विद्यार्थियों दोनों से अपने कर्तव्य बोध के प्रति सावधान रहने का आग्रह किया। यह स्पष्ट किया गया कि शिक्षार्थी शिथिल पड़ें तो शिक्षक भी शिथिल हो जाता है, अतः दोनों की भागीदारी आवश्यक है।
प्रारम्भ में स्वागत उदबोधन एवं विषय प्रवर्तन अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो सुभाष चन्द्र ने दिया एवं कार्यक्रम का संचालन प्रो अरविंद पारीक ने किया। आभार ज्ञापन प्रो ऋतु माथुर ने किया।
कार्यक्रम में कैलाश चंद्र शर्मा (कुलसचिव) वित्त नियंत्रक नेहा शर्मा, प्रोफेसर प्रो मोनिका भटनागर, प्रो शिवप्रसाद, डॉ अश्विनी तिवारी, परीक्षा नियंत्रक डॉ सुनील टेलर, डॉ आशीष पारीक, डॉ लारा शर्मा डॉ. असीम जयंती, डॉ राजू शर्मा, दिलीप शर्मा सहित अतिथि शिक्षक, शोधार्थी, विद्यार्थी उपस्थित रहे।





