जयपुर। राजस्थान उच्च न्यायालय ने जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (पीएचईडी) के शीर्ष अधिकारियों के वेतन रोकने के गुरुवार को निर्देश दिए।
अदालत ने यह कार्रवाई उन अधिकारियों के खिलाफ की है जिन्होंने वर्ष 2017 के न्यायालयी आदेश का पालन नहीं किया। उच्च न्यायालय की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि वर्ष 2017 में जारी आदेश के बाद भी विभागीय अधिकारियों ने आवश्यक अनुपालन नहीं किया। अदालत ने टिप्पणी की कि बार-बार निर्देश दिए जाने के बावजूद अधिकारियों द्वारा आदेश को लागू न करना प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर उदाहरण है।
वर्ष 2017 का आदेश पीएचईडी को जलापूर्ति परियोजनाओं और विभागीय प्रक्रियाओं से जुड़ी कुछ निर्धारित मानकों के पालन के लिए बाध्य करता है। याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि लगातार टालमटोल के कारण न सिर्फ न्यायालय के आदेशों की अवहेलना हो रही है, बल्कि आम जनता को मिलने वाली सेवाओं पर भी इसका सीधा असर पड़ रहा है।
अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि संबंधित अधिकारियों का वेतन अगले आदेश तक स्थगित रहेगा। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि सरकारी अधिकारी न्यायालय के आदेशों की अनदेखी नहीं कर सकते और आवश्यक होने पर अदालत वेतन रोकने जैसे कठोर कदम भी उठा सकती है।
उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट पेश करने को कहा है और मामले की अगली सुनवाई जल्द निर्धारित की है। राज्य की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने आश्वासन दिया कि सरकार अदालत के निर्देशों का पूर्ण पालन करेगी।



