राजस्थान रोडवेज की निशुल्क यात्रा योजना में करोड़ों के गबन में 7 और अरेस्ट

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जयपुर। राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम (रोडवेज) की बसों में निशुल्क यात्रा योजना में करोड़ों के गबन के मामले में पुलिस ने सात और आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

झालावाड़ पुलिस अधीक्षक अमित कुमार के अनुसार उनके नेतृत्व में चलाए जा रहे ऑपरेशन क्लीन राइड ने राजस्थान रोडवेज के भीतर चल रहे एक ऐसे सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है जो छात्र हित की योजना को भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा रहा था। पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए रविवार को जोधपुर, अजमेर, कोटा और झालावाड़ से सात और आरोपियों को गिरफ्तार किया, जो एसटीडी गिरोह के माध्यम से इस बड़े गबन को अंजाम दे रहे थे।

कुमार ने बताया कि गिरफ्तार लोगों में दिनेश कुमार वैष्णव (44) निवासी केकड़ी अजमेर, राधेश्याम बैरवा (43) निवासी कुन्हाड़ी कोटा शहर, नरेन्द्र टांक (56) निवासी नागौरी गेट जोधपुर, शाहनवाज (33) निवासी कोतवाली झालावाड़, अंकित गुर्जर (27) निवासी झालरापाटन और उमेश पुरोहित (52) एवं गिरीश जोशी (51) निवासी कोतवाली जिला बांसवाड़ा शामिल है।

इससे पहले गोपनीय परिवाद की लगभग एक महीने से अधिक अवधि की लंबी विस्तृत जांच के बाद जांच रिपोर्ट पर पुलिस थाना कोतवाली झालावाड़ में प्रकरण दर्ज किया गया और गत 30 जनवरी को दी गयी दबिश में गिरोह के सरगना नरेंद्र सिंह सहित आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था और अब तक इस मामले में 15 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

उन्होंने बताया कि जांच में सामने आया कि राजस्थान सरकार द्वारा प्रतियोगी परीक्षार्थियों के लिए शुरू की गई निशुल्क यात्रा सुविधा का अपराधी गिरोह दुरुपयोग कर रहे थे। इसका खेल तीन चरणों में चलता था, परिचालक और सिविल डिफेंस वॉलंटियर परीक्षार्थियों से एडमिट कार्ड की फोटोकॉपी लेते थे।

चूंकि इन परिचालकों का कोई फिक्स टारगेट नहीं होता, वे इन एडमिट कार्ड्स को एसटीडी गिरोह के माध्यम से बस सारथी (अनुबंध पर काम करने वाले) को बेच देते थे। बस सारथी यात्रियों से तो पूरा किराया वसूलते थे लेकिन रिकॉर्ड में इन एडमिट कार्ड्स का उपयोग कर निशुल्क यात्रा टिकट दिखा देते थे। इस तरह वे अपने टारगेट का 50 से 75 प्रतिशत हिस्सा फर्जी टिकटों से पूरा कर सरकारी राजस्व अपनी जेब में डाल रहे थे।

पुलिस ने कोटा निवासी आरोपी राधेश्याम के पास से बड़ी संख्या में परीक्षार्थियों के एडमिट कार्ड बरामद किए हैं। ताज्जुब की बात यह है कि बारां, भीलवाड़ा, धौलपुर और चित्तौड़गढ़ जैसे अलग-अलग जिलों के एडमिट कार्ड कोटा में एक ही जगह मिले, जो इस संगठित गिरोह की पहुंच को दर्शाता है।

कुमार ने बताया कि एसटीडी गिरोह का सरगना नरेन्द्र सिंह रोडवेज परिचालकों को उडनदस्तों के नाम पर डराता था। वह रिमार्क लगवाने और नौकरी खराब करने की धमकी देकर उनसे वसूली करता था। जो पैसे देते थे, उन्हें उडनदस्तों की लोकेशन बताकर राजस्व हानि में मदद की जाती थी।