जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवाद मामले में 58 वर्ष से साथ जीवन व्यतीत कर रहे दंपती के तलाक की याचिका को खारिज कर दिया है।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि संपत्ति विवाद या सामान्य पारिवारिक मतभेद को तलाक का कारण नहीं माना जा सकता। 78 वर्षीय पति द्वारा दायर इस याचिका में अपनी 75 वर्षीय पत्नी से तलाक की मांग की थी।
पति ने दलील दी कि सेवानिवृत्ति के बाद पत्नी ने उनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज कराए और संपत्ति के बंटवारे को लेकर विवाद बढ़ गया। उच्च न्यायालय ने कहा कि दंपती ने 1967 से 2013 तक करीब छह दशक तक सामान्य वैवाहिक जीवन बिताया और अब तलाक के अनुरोध को असंवैधानिक और अनुचित करार दिया।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि वैवाहिक जीवन में छोटी-मोटी खींच-तान, आपसी आरोप-प्रत्यारोप और दैनिक जीवन की सामान्य परेशानियों को क्रूरता या तलाक का आधार नहीं माना जा सकता। विशेष रूप से जब पति-पत्नी दोनों ने इतने वर्षों तक सहयोग और सहनशीलता के साथ जीवन व्यतीत किया हो, तब अचानक उत्पन्न हुए संपत्ति विवाद को तलाक का कारण मानना उचित नहीं है। अदालत ने यह भी कहा कि केवल एक प्राथमिकी दर्ज कराना भी क्रूरता का आधार नहीं बनता।
हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में यह भी रेखांकित किया कि ऐसे मामलों में यह देखना आवश्यक है कि क्या वैवाहिक जीवन का समग्र मूल्यांकन गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है या नहीं। कोई वास्तविक क्रूरता या विवाह के स्थायी टूटने के तथ्य नहीं हैं, तो तलाक देना न्यायोचित नहीं माना जाएगा।



