अजमेर। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा है कि राज्य सरकार संस्कृति, आध्यात्मिक विरासत एवं सनातन परंपराओं के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही है और वह पुष्कर, गिरिराजजी, खाटूश्यामजी, बालाजी और अन्य प्रमुख तीर्थ स्थलों के समग्र एवं सुनियोजित विकास के लिए प्रतिबद्ध है।
शर्मा तीर्थराज पुष्कर में आयोजित तीन दिवसीय हनुमंत कथा में मंगलवार को सहभागिता करते हुए यह बात कही। उन्होंने बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का अभिनंदन किया। उन्होंने कथा का श्रवण करते हुए कहा कि तीर्थराज पुष्कर में इस प्रकार का आध्यात्मिक आयोजन सनातन संस्कृति की ज्योति को प्रज्ज्वलित करने का कार्य कर रहा है और विशेष रूप से युवाओं के मन में भारतीय संस्कृति एवं आध्यात्मिक मूल्यों की गहरी समझ विकसित कर रहा है। इस प्रकार के आयोजनों से समाज में नैतिक मूल्यों, राष्ट्रभावना और सांस्कृतिक गौरव का सुदृढ़ीकरण होता है।
उन्होंने पुष्कर की भौगोलिक एवं आध्यात्मिक विशिष्टता का उल्लेख करते हुए कहा कि यह नगरी केवल आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि अद्वितीय प्राकृतिक संरचना का भी प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने पुष्कर स्थित विश्वविख्यात ब्रह्मा मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इस अवसर पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी, राज्य के जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत, शिक्षा मंत्री मदन दिलावर तथा अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे।
ब्रह्मा मंदिर में विधि-विधान से की पूजा-अर्चना
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने पुष्कर स्थित विश्वविख्यात ब्रह्मा मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पुष्कर की पावन धरा आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक विरासत और सनातन आस्था का अद्वितीय संगम है। जगतपिता ब्रह्मा मंदिर विश्वभर में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है और यह स्थल आस्था का केंद्र होने के साथ प्रदेश की सांस्कृतिक गौरवगाथा का भी प्रतीक है।
उन्होंने पुष्कर की भौगोलिक एवं आध्यात्मिक विशिष्टता का उल्लेख करते हुए कहा कि यह नगरी केवल आस्था का केंद्र ही नहीं बल्कि अद्वितीय प्राकृतिक संरचना का भी प्रतीक है।





