
सबगुरु न्यूज- आबूरोड। यूआईटी आबूरोड सूचना के अधिकार के तहत कॉलोनियों के तैयार नक्शों को तैयार नहीं होने की दलील देकर छिपा रही है। ये जानबूझकर किया जा रहा है या मिलीभगत होने की वजह से ये जांच का विषय है। यूआईटी आबूरोड की ही एक कॉलोनी में बरसाती नाले का बहुत बड़ा हिस्सा गायब कर दिया गया है। यूआईटी इनके नक्शे भी छिपा रही है। नक्शे छिपाने के बाद सवाल ये उठने लगा है कि कॉलोनियों में इस तरह के बड़ी छेड़छाड़ में यूआईटी में ही कोई शामिल तो नहीं।

– राजस्व, मौके और सेटेलाइट नक्शे में काफी अंतर
कुछ कॉलोनियों में मूल भूमि से छेड़छाड़ को लेकर शहर में चर्चाएं थी। शक ये जताया जा रहा था कि मूल नक्शे में छेड़छाड़ करके कॉलोनी काटी गई है। और इनके पट्टे पहले ही जारी करवा लिए गए हैं। कॉलोनी के राजस्व नक्शे और मार्च 2024 के सैटेलाइट नक्शे में समानता है। लेकिन, मौके पर और वर्तमान सेटेलाइट चित्र में स्थिति राजस्व नक्शे और पुराने सेटेलाइट नक्शे से अलग है। नए और पुराने सेटेलाइट चित्रों व राजस्व नक्शे का मिलान करने स्पष्ट नजर आ रहा है कि गैर मुमकिन नाले को कालोनाइजर ने खत्म करके उसका रूप परिवर्तित कर दिया है। नाले का रूप बदल कर इसका क्षेत्रफल कम कर दिया है।
-फेसिलिटी घटाई या बफर से छेड़छाड़?
राजस्व नक्शे और इस कॉलोनी में से नाला अंग्रेजी के एस शेप का दिख रहा है। नाले का रूप एस शेप से बदलकर अंग्रेजी के एल शेप में परिवर्तित करके की फेसिलिटी का हिस्सा बनाने के दो आशंका हैं। एक तो ये कि कॉलोनजर के द्वारा प्रस्तावित प्रोजेक्ट की कुल भूखंड के 40% फेसिलिटी में से जमीन को बचाने को कोशिश हुई है या फिर नाले के बफर से प्लॉटों को। दोनों ही सूरत में भविश्व में कभी राजस्व रिकॉर्ड से कॉलोनी का मिलान किया गया तो भूखंड धारकों को समस्या आ सकती है। मार्च 2024 में भूखंड का में एस शेप का नाला स्पष्ट नजर आ रहा है, वहीं मार्च 2025 के चित्र में ये एल शेप का दिख रहा है।


