जयपुर। राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की कार्यशैली और प्राथमिकताओं पर प्रहार करते हुए कहा है कि मुख्यमंत्री का पद अत्यंत गरिमामय और ‘सम्मानजनक’ पद होता है लेकिन वह महिला आरक्षण के मुद्दे पर केवल भ्रम फैलाने का काम कर रहे हैं।
जूली ने मंगलवार को अपने बयान में यह आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश के मुखिया को राजनीतिक आयोजन करने के बजाय उन मासूमों के आंसू पौंछने चाहिए जो सरकारी तंत्र की विफलता और बीमारियों के कारण दम तोड़ रहे हैं।
उन्होंने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश में एक दलित बच्चा पुलिस की बर्बरता का शिकार होकर अस्पताल में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से सीधा सवाल किया कि क्या वह बच्चा दलित समुदाय से है, इसलिए मुख्यमंत्री उसके हाल जानने अस्पताल नहीं गए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को पीड़ित परिजनों से मिलना चाहिए था और उन्हें न्याय का भरोसा दिलाना चाहिए था लेकिन सरकार की प्राथमिकता में दलित वर्ग कहीं नहीं है।
जूली ने सरकार को घेरते हुए कहा कि प्रदेश के आदिवासी इलाकों में अज्ञात बीमारी के कारण मासूम बच्चे मर रहे हैं, जिससे वहां के परिवारों में कोहराम मचा हुआ है। मुख्यमंत्री और उनके प्रशासन ने उन गरीब माता-पिता की सुध लेना तक उचित नहीं समझा। उन्होंने कहा कि एक तरफ प्रदेश का भविष्य अज्ञात बीमारियों से खत्म हो रहा है और दूसरी तरफ मुख्यमंत्री और भाजपा के नेता मशाल जुलूस निकालकर अपनी राजनीति चमकाने में व्यस्त हैं।
भाजपा द्वारा महिला आरक्षण के नाम पर निकाले जा रहे मशाल जुलूस को लेकर जूली ने कहा कि यह केवल जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश है। कांग्रेस ने हमेशा महिलाओं और वंचितों के अधिकारों की लड़ाई लड़ी है जबकि भाजपा केवल नकारात्मक सोच के साथ भ्रम फैला रही है।
उन्होंने कहा कि जब प्रदेश का आम नागरिक परेशान है, महिलाओं और बच्चियों के साथ दुष्कर्म हो रहे हैं तब मुख्यमंत्री का अमर जवान ज्योति से अंबेडकर सर्किल तक जुलूस निकालना संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। सरकार को ऐसे एजेंडा का हिस्सा न बनकर प्रदेश की बिगड़ती कानून-व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं पर ध्यान देना चाहिए।



