मथुरा। ग्लैमर और अभिनय की दुनिया में पहचान बना चुकी अभिनेत्री एना जयसिंघानी अब पूरी तरह अध्यात्म और भक्ति की राह पर चल पड़ी हैं। मुंबई की चमक-दमक छोड़कर वह इन दिनों वृंदावन में रहकर राधा-कृष्ण भक्ति में लीन हैं और राधे-राधे नाम का जाप कर रही हैं।
एना का कहना है कि संत प्रेमानंद महाराज के स्वप्न में आने के बाद उनके जीवन की दिशा पूरी तरह बदल गई। ग्वालियर निवासी एना जयसिंघानी ने यूनीवार्ता को एक विशेष बातचीत में बताया कि उनके जीवन में आया यह परिवर्तन राधारानी और ठाकुर जी की कृपा से संभव हुआ। उन्होंने कहा कि मनुष्य अपने बल पर इतना बड़ा बदलाव नहीं ला सकता। भगवान ने ही उन्हें मायानगरी मुंबई की चकाचौंध से निकालकर वृंदावन की सादगी भरी जिंदगी की ओर खींच लिया।
एना ने बताया कि जब वह मुंबई में एकता कपूर के बालाजी फिल्म्स में एक्टिंग कोर्स कर रही थीं, तभी उनके कुछ मित्र उन्हें इस्कॉन मंदिर लेकर गए। शुरुआत में वह सामान्य रूप से मंदिर जाती थीं, लेकिन नियमित पूजा-पाठ या नाम जप जैसी दिनचर्या का हिस्सा नहीं थीं। इस्कॉन में भागवत गीता की कक्षाओं और आध्यात्मिक वातावरण ने उनके जीवन को नई दिशा दी।
उन्होंने कहा कि वहीं से उन्हें माला जप और सात्विक जीवन का महत्व समझ में आया। धीरे-धीरे उन्होंने प्याज-लहसुन और मांसाहार छोड़ दिया। एना का कहना है कि किसी जीव की हत्या कर भोजन करना पाप है और अध्यात्म ने उन्हें करुणा तथा संयम का रास्ता दिखाया।
एना जयसिंघानी ने बताया कि उन्होंने टीवी इंडस्ट्री में कई धारावाहिकों में काम किया। सोनी चैनल के धारावाहिक देखा एक ख्वाब में निभाए गए चिक्की के किरदार से उन्हें खास पहचान मिली। इसके अलावा उन्होंने सावधान इंडिया और फियर फाइल्स जैसे कार्यक्रमों में भी अभिनय किया। उन्होंने कहा कि अभिनय की दुनिया में पहचान और लोकप्रियता मिलने के बावजूद उन्हें भीतर से सुकून नहीं मिलता था। धीरे-धीरे उन्हें महसूस हुआ कि यह सब भौतिक दुनिया का हिस्सा है और वास्तविक शांति केवल भक्ति में ही है।
मुंबई और वृंदावन की जिंदगी के अंतर पर एना ने कहा कि मुंबई में दिखावे और कृत्रिमता की दुनिया है, जबकि वृंदावन में सादगी और आत्मिक शांति है। वहां लोग बाहरी पहचान को महत्व देते हैं, जबकि वृंदावन में व्यक्ति अपने वास्तविक स्वरूप को महसूस करता है।
एना ने बताया कि जीवन का निर्णायक मोड़ तब आया जब संत प्रेमानंद महाराज उन्हें स्वप्न में दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि महाराज जी ने सपने में केवल एक बात कही- नाम जप करो। यही शब्द उनके जीवन का आधार बन गए। इसके बाद उन्होंने वृंदावन आकर पूरी तरह भक्ति मार्ग अपना लिया।
उन्होंने बताया कि शुरुआत में परिवार को उनके फैसले पर आश्चर्य हुआ, लेकिन बाद में सभी ने उनका साथ दिया। अब उनकी मां भी नियमित नाम जप करती हैं और परिवार ने भी सात्विक जीवनशैली अपना ली है। एना जयसिंघानी ने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि जीवन में अपने कार्य करते हुए भी भगवान के नाम का स्मरण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि व्यक्ति जिस भी ईश्वर को मानता हो, उसके नाम का जाप जीवन में शांति और सकारात्मकता लाता है।



