कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को फाल्टा विधानसभा पुनर्मतदान से ठीक दो दिन पहले बड़ा झटका लगा जब पार्टी उम्मीदवार जहांगीर खान ने मंगलवार को चुनाव मैदान से हटने की घोषणा कर दी। उन्होंने अपने फैसले के पीछे क्षेत्र में शांति और विकास को कारण बताते हुए पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सार्वजनिक रूप से प्रशंसा की।
यह नाटकीय घोषणा पुनर्मतदान के लिए प्रचार समाप्त होने से कुछ घंटे पहले हुई, जिससे राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। फाल्टा विधानसभा क्षेत्र अभिषेक बनर्जी के लोकसभा क्षेत्र डायमंड हार्बर के अंतर्गत आता है। बनर्जी के करीबी माने जाने वाले खान ने एक संवाददाता सम्मेलन में मुख्यमंत्री अधिकारी के नेतृत्व और प्रशासनिक कार्यशैली की सराहना करते हुए चुनाव से हटने की घोषणा की।
इस घटनाक्रम को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि कुछ दिन पहले ही भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार देबांग्शु पांडा के समर्थन में चुनावी सभा को संबोधित करते हुए अधिकारी ने कहा था कि खान से निपटने की जिम्मेदारी उन्हीं की है। उन्होंने कहा था कि पहले चुनाव प्रक्रिया पूरी होने दीजिए, उसके बाद मैं व्यक्तिगत रूप से इस मामले को देखूंगा।
अधिकारी के इस बयान के कुछ ही दिनों बाद खान के चुनाव से हटने के फैसले ने राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलों को जन्म दे दिया है। इसे डायमंड हार्बर क्षेत्र में तृणमूल कांग्रेस के भीतर बढ़ते दबाव और संगठनात्मक दरार के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। यह क्षेत्र पिछले डेढ़ दशक से पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है।
राजनीतिक विरोधियों ने इस मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधा। केंद्रीय मंत्री और भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने कहा कि जहांगीर डरकर मैदान छोड़कर भाग गए। उन्होंने तृणमूल नेतृत्व की चुप्पी पर भी सवाल उठाया, जो अब तक डायमंड हार्बर मॉडल को राजनीतिक रूप से अजेय बताता रहा है।
यह पुनर्मतदान हालिया विधानसभा चुनावों के दौरान कई बूथों पर बूथ कब्जाने और बड़े पैमाने पर चुनावी अनियमितताओं के आरोपों के बाद कराया जा रहा है। विपक्षी दलों की शिकायतों पर चुनाव आयोग ने मामले की समीक्षा कर पुनर्मतदान का आदेश दिया था।
दूसरी ओर, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के राज्य सचिवालय सदस्य सुजन चक्रवर्ती ने भी तंज कसते हुए कहा कि ये लोग आक्रामक और अहंकारी भाषा बोलते हैं, लेकिन डर के कारण मैदान छोड़ देते हैं। वामपंथ ने अतीत में कई हमले झेले, लेकिन कभी संघर्ष से पीछे नहीं हटे।
फाल्टा पुनर्मतदान पिछले कुछ सप्ताह से राजनीतिक और प्रशासनिक तनाव का केंद्र बना हुआ है। डायमंड हार्बर पुलिस जिला पर्यवेक्षक अजय पाल शर्मा और जहांगीर खान के बीच कथित टकराव ने भी क्षेत्र की संवेदनशीलता बढ़ा दी थी।
इस बीच, तृणमूल कांग्रेस के भीतर भी पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी और सांसद अभिषेक बनर्जी की चुनाव प्रचार से दूरी को लेकर असंतोष की खबरें सामने आई हैं। स्थानीय नेताओं का कहना है कि भाजपा, माकपा और कांग्रेस नेताओं ने जहां क्षेत्र में व्यापक प्रचार किया, वहीं शीर्ष नेतृत्व की अनुपस्थिति से जमीनी कार्यकर्ताओं में बेचैनी बढ़ी।
मुख्यमंत्री अधिकारी ने मंगलवार को भाजपा उम्मीदवार के समर्थन में विशाल रोड शो भी किया। रोड शो शुरू करने से पहले उन्होंने स्थानीय शिव मंदिर में पूजा-अर्चना की। फाल्टा में मतदान 21 मई को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच होगा, जबकि मतगणना 24 मई को निर्धारित है।



