पेट्रोल-डीजल बचा सको तो बचा लो!

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संतोष खाचरियावास
अजमेर। पीएम नरेंद्र मोदी का कोई भी शब्द बेमायना नहीं होता। उन्होंने कहा कि पेट्रोल डीजल का इस्तेमाल कम करें, हो सके तो सोना न खरीदें, विदेश यात्रा अवॉइड करें। बाकी दो सलाह पर तो सोशल मीडिया पर चुटकले और मिम्स बन गए लेकिन पहली सलाह को हल्के में लेना बहुत बड़ी मूर्खता होगी- पेट्रोल डीजल बचा सको तो बचा लो।

एक सप्ताह में दूसरी बार पेट्रोल डीजल के दाम बढ़ाकर मोदी सरकार ने सीधा इशारा भी दे दिया है लेकिन हम कहां सुधरने वाले? मोदी की माला जपने और उनके नाम का पट्टा (उपरणा) गले में डालकर घूमने वाले भी इस सलाह को कहां मान रहे हैं। बल्कि इसे अवसर में बदलकर मीडिया में खबरें-फोटो छपवाने का जरिया बना बैठे हैं।

सीएम भजनलाल शर्मा ने अपना काफिला सीमित कर दिया। डिप्टी सीएम दिया कुमारी ने जयपुर से अजमेर तक कारों के काफिले में आने की बजाय ट्रेन से सफर किया। बकायदा फोटो खिंचवाए… वाहवाही लूटी…हो गया मोदीजी की सलाह पर अमल। इसके बाद अजमेर से केसरपुरा तक खुद भले ही ईवी में गईं लेकिन पिछलग्गूओं का लवाजमा तो पेट्रोल डीजल की गाड़ियां लेकर ही पहुंचा।

केसरपुरा में डिप्टी सीएम के स्वागत में करीब 10 जेसीबी मशीनें तैनात की गईं, जिनकी बकेट से भर-भरकर फूल उछाले गए। ये जेसीबी पानी से नहीं डीजल से चलती हैं। कितना डीजल इस स्वागत में बिलावजह फूंका गया, किसी को फिक्र नहीं।

केसरपुरा के आसपास कई पेट्रोल पंपों पर किसानों को डीजल नहीं मिल रहा है लेकिन इन जेसीबी को इस फालतू काम के लिए डीजल कैसे मिल गया, किसी को परवाह नहीं।

डिप्टी सीएम यहां केवल एक भवन का लोकार्पण करने के लिए आई थीं, चाहती तो जयपुर से ही वर्चुअल तरीके से लोकार्पण हो सकता था, मगर नहीं। फिर ट्रेन में सफर की फोटो कैसे छपती? मोदीजी की बात भी तो रखनी थी।

इसी तरह अजमेर भाजपा ने पुष्कर के जॉलिवुड रिसोर्ट में प्रशिक्षण शिविर रखा है। इसमें शामिल होने के लिए प्रदेशभर से पदाधिकारी लक्जरी कारें लेकर आएंगे। जिलेभर से कार्यकर्ता गाड़ियां लेकर पुष्कर पहुंचेंगे…तब पेट्रोल डीजल की बर्बादी नहीं होगी?

चाहते तो इस प्रशिक्षण वर्ग को भी वर्चुअल तरीके से आयोजित कर सकते थे, मगर नहीं, सलाह सिर्फ आम के लिए होती है, खास के लिए नहीं।

इधर, पीएम की सलाह पर ही एमडीएस यूनिवर्सिटी के कुलगुरु ने विश्वविद्यालय परिसर में पेट्रोल डीजल वाहनों का उपयोग ‘सीमित’ करने का फरमान जारी कर राजभवन को राजी रखने का नुस्खा ढूंढ निकाला। लेकिन अब तक किसी भी खास ने लग्जरी कार का मोह छोड़कर आमजन की तरह रोजाना ई-रिक्शा में आने-जाने का ऐलान नहीं किया है।

जिला पूल को कोई निर्देश नहीं दिए गए कि कार मांगने वाले अफसरों को थोड़े दिन ई-रिक्शा की सवारी कराओ। सरकार आमजन के लिए तो ई बसें खरीद रही है लेकिन अपने मंत्रियों-विधायकों और अफसरों के लिए ई-रिक्शा खरीदने की नहीं सोच रही।

डीजल वाकई अब हमारी अर्थव्यवस्था की रगों का लहू है। इसे माल ढोने वाले ट्रकों और किसानों के लिए सहेजकर रखना होगा, ना कि लग्जरी कारों में फूंकने के लिए।

सरकार ने पेट्रोलियम कम्पनियों के जरिए पेट्रोल पंप संचालकों को मौखिक हिदायत दी है कि अवैध खनन में लगे वाहनों और पेट्रोल डीजल की जमाखोरी करने वाले वाहनों को तेल न दिया जाए। कौनसा वाहन बार-बार तेल भरवाने आ रहा है, उसके नम्बर नोट करके जिला प्रशासन को दिए जाएं, मगर सरकार ने यह निर्देश नहीं दिए कि जिला पूल के बजट में कटौती की जाए… फूल बरसाने वाली जेसीबी को डीजल न दिया जाए।