
सबगुरु न्यूज-सिरोही। सांसद लुंबाराम चौधरी की पीआर टीम ने एक एनजीओ द्वारा दिए जा रहे गैर सरकारी तमगे को उपलब्धि के रूप में दिखाने के लिए जो डेटा दिए वो डेटा खंगालने पर जो सामने आए वो सांसद के जालोर सिरोही लोकसभा के लाखों परिवारों के सपनों से जुड़े मुद्दे को दिखा ही नहीं रहा है।
98% प्रतिशत उपस्थिति को उपलब्धि बताने वाली सांसद लुंबाराम चौधरी की पीआर टीम ये बताना भूल गई लोकसभा में जो तारांकित और अतारांकित सवाल उठाए और डिबेट में नियम 377 से जो मुद्दे उठाये उसमें आदर्श को ऑपरेटिव सोसायटी और सहारा के निवेशकों के पैसों को वापस दिलवाने का मुद्दा कब और कितने पुरजोर तरीके से उठाया गया।
– जालोर-सिरोही के काफी निवेशक
आदर्श क्रेडिट को ऑपरेटिव सोसायटी के करीब 14हजार करोड़ रुपए की कथित वित्तीय अनियमितता में करीब 22 लाख निवेशकों के पैसे फंसे हुए हैं। इनमें दो से ढाई लाख निवेशक तो अकेले सिरोही और जालोर जिले के स्थानीय और प्रवासी होंगे।
पिछले सांसद देवजी पटेल को इस मुद्दे पर लोगों ने कई बार कई जगह घेरा था। उन्होंने इसके लिए कई बार संसद में मुद्दा भी उठाया था। लेकिन वर्तमान सांसद लुंबाराम चौधरी के 246 सवालों 36 डिबेट्स में ये मुद्दा कब और कहां आया ये सांसद की पीआर टीम ने अभी तक नहीं बताया। जबकि सिरोही जालोर जिले के लाखों स्थानीय और प्रवासी परिवारों के करोड़ों रुपए केंद्र सरकार के गृह और को-ऑपरेटिव विभाग की जांच और सिंजिंग में फंसे हुए हैं।
– मुद्दे कम नहीं हैं
सांसद लुंबाराम चौधरी के सांसद बनने पर आदर्श क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसायटी से जुड़े मुद्दे खत्म और कम हो गए हों, ऐसा नहीं है। इनके सांसद रहते हुए ही ये मुद्दा उठा कि आदर्श की ईडी के द्वारा सीज संपत्तियां को औने-पौने दामों बेच दिया गया है। यही नहीं ये भी आरोप लगा कि जिन्हें ये बेचा गया उन कंपनियों की स्थापना ही इन जमीनों को खरीदने के लिए हुई उसके बाद ये कम्पनियां या समूह विलोपित हो गए।
लोगों में ये भी सवाल उठा कि लिक्विडेटर के द्वारा आदर्श की कितनी सीज संपत्ति नीलाम की गई और इससे आई राशि को निवेशकों में किस तरह बांटा। लेकिन सांसद की पीआरटीम ये बताने में नाकाम रही है कि ये सारे यक्ष प्रश्न आज भी सांसद लुंबाराम चौधरी लोकसभा के माध्यम से जनता के बीच में कब लाए हैं।
– सात सत्रों में सहकारिता के पांच दिन में पूछे ये सवाल
सांसद की पीआर टीम ने उनके एक गैर सरकारी संस्थान के द्वारा संसद रत्न का तमगा देने के दौरान जो डेटा दिया उसके अनुसार लुंबाराम चौधरी ने अब तक संसद के सात सत्र में हिस्सा लिया है। लोकसभा में सांसदों के कार्यकलाप पर नजर रखने वाली भारत की सबसे महत्वपूर्ण संस्थान पीआरएस रिसर्च का डेटा खंगालने पर ये सामने आया कि इन सत्रों में लुंबाराम चौधरी ने सहकारिता मंत्रालय के लिए निर्धारित दिनों से सिर्फ पांच दिन सवाल पूछे।
11 फरवरी 2025 को पैक्स को लेकर, 25 मार्च 2025 को भारत बीज ब्रांड को लेकर, 22 जुलाई 2025 को तीन सवाल सूचीबद्ध हुए जिनमें मेरी समिति मेरा पोर्टल, क्विक कम्फर्ट के साथ एमओयू को लेकर और प्राथमिक कृषि को ऑपरेटिव सोसायटी के विस्तार को लेकर, 29 जुलाई 2025 को भारत बैंकर से संबंधित और 19 दिसंबर 2025 को सहकारिता संस्थाओं पर जीएसटी के प्रभाव को लेकर। लेकिन इन दिनों में आदर्श क्रेडिट को ऑपरेटिव सोसायटी के निवेशकों के हित का सवाल नजर नहीं आया।
– चाहते नहीं हैं या डर है
प्रश्न ये उठता है कि पीआरएस की साइट और लुंबाराम चौधरी की पीआर टीम ने संसद में सहकारिता मंत्रालय के सवालों के दिन पर आदेश क्रेडिट को ऑपरेटिव सोसायटी के मुद्दे के सवालों को इसलिए नहीं बताया कि सांसद ये सवाल उठाना नहीं चाहते हैं या फिर सहकारिता मंत्रालय मंत्री अमित शाह के और सरकार के इस मुद्दे पर संसद में घिर जाने के डर से जालोर सिरोही के आदर्श के निवेशकों के हितों को दरकिनार किया। पीआरएस रिसर्च के डेटा के अनुसार सवालों और डिबेट में सबसे ज्यादा बार कडाना बांध, रेलवे, कृषि बीज आदि और मानपुर हवाई पट्टी के मुद्दे उठाये। लेकिन इनमें आदर्श क्रेडिट को ऑपरेटिव सोसायटी के निवेशकों के हित में सरकार से सवाल का कोई जिक्र नहीं नजर आया।


