जम्मू। कश्मीरी पंडितों ने जनीपुर इलाके के भवानी नगर में स्थित रागन्या देवी (माता खीर भवानी) मंदिर में सोमवार को खीर भवानी त्योहार के अवसर पर वैदिक मंत्रों और घंटियों की गूंज के बीच पूजा-अर्चना की।
समुदाय के सदस्यों ने मंदिर में इलाके में शांति के लिए प्रार्थना की और आशीर्वाद मांगा। भक्तों ने श्रीनगर के गांदरबल ज़िले के तुलमुल्ला गांव में बने मंदिर में स्थापित माता खीर भवानी की मूर्तियों पर फूल चढ़ाए।
मंदिर के बाहर लंबी कतारें देखी गईं और युवा व बुजुर्ग समेत सभी भक्त पूजा-अर्चना करने और आशीर्वाद पाने के लिए अपनी बारी का इंतज़ार कर रहे थे।
एक कश्मीरी हिंदू श्रद्धालु ने कहा कि हम प्रार्थना करने के लिए गांदरबल स्थित खीर भवानी मंदिर जाना चाहते थे, लेकिन कुछ अपरिहार्य कारणों से नहीं जा सके। इसलिए हम यहां आए हैं, क्योंकि इसकी प्रतिकृति का भी उतना ही महत्व है।
हालांकि, उन्होंने कहा कि उन्होंने जम्मू-कश्मीर में शांति के लिए प्रार्थना की है और आशा व्यक्त किया कि विस्थापित कश्मीरी हिंदू जल्द ही अपनी मातृभूमि लौट सकेंगे। इस बीच, समारोह को सुचारू रूप से आयोजित करने के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।
20 जून को नगरोटा इलाके से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था, धार्मिक उत्साह और धार्मिक भजनों व नारों के बीच 214 बसों के काफिले में लगभग 8500 तीर्थयात्री गांदरबल में माता खीर भवानी यात्रा के लिए रवाना हुए।
इस साल की यात्रा के लिए तीर्थयात्रियों के रजिस्ट्रेशन में काफी बढ़ोतरी हुई है। प्रशासन इस बढ़ोतरी का श्रेय शांतिपूर्ण माहौल, बेहतर सुरक्षा और व्यापक इंतज़ामों को देता है, जिससे 2026 की यात्रा हाल के वर्षों की सबसे बड़ी यात्राओं में से एक बन गई है।
माता खीर भवानी का सालाना मेला तुलमुल्ला (गांदरबल), टिक्कर (कुपवाड़ा), देवसर-मंजगाम (कुलगाम) और लोगरीपोरा (अनंतनाग) जैसे पारंपरिक तीर्थ स्थलों पर मनाया जा रहा है जिसमें मुख्य आयोजन तुलमुल्ला में माता रागन्या देवी के मंदिर में हो रहा है।



