एकनाथ शिंदे के ‘ऑपरेशन टाइगर’ की कामयाबी के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल की अटकलें

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नई दिल्ली/मुंबई। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने राष्ट्रीय राजधानी में अपनी सक्रियता बढ़ा दी है और वह महज 48 घंटों के भीतर दूसरी बार नयी दिल्ली के दौरे पर हैं। महाराष्ट्र में जैसे-जैसे राजनीतिक स्थितियां बदल रही हैं शिंदे का मकसद केंद्रीय मंत्रिमंडल में अपने गुट के लिए सत्ता में बड़ी हिस्सेदारी प्राप्त करना लग रहा है।

यह कदम ऑपरेशन टाइगर की बड़ी सफलता के बाद उठाया गया है जिसमें उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूटीबी) के छह लोकसभा सांसद शिंदे गुट में शामिल हो गए थे। इस अहम बदलाव से लोकसभा में शिंदे की पार्टी के सांसदों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है, जिससे भाजपा के नेतृत्व वाले केंद्रीय नेतृत्व के सामने उनकी मोल-भाव करने की क्षमता और ज्यादा मज़बूत हुई है। सांसदों की संख्या में अचानक हुई इस बढ़ोतरी ने मंत्रियों के विभागों में फेरबदल की ज़बरदस्त अटकलों को हवा दी है।

पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि शिंदे अभी केंद्र में कम से कम एक कैबिनेट मंत्री और एक राज्य मंत्री का पद पाने के लिए बातचीत कर रहे हैं, साथ ही महाराष्ट्र सरकार में भी कैबिनेट स्तर पर फेरबदल चाह रहे हैं। हालांकि केंद्रीय मत्रियों के लिए उम्मीदवारों को तय करने में शिंदे के सामने एक मुश्किल स्थिति है। डॉ. श्रीकांत शिंदे, ओमराजे निंबालकर और बांडू जाधव जैसे प्रमुख नेताओं के मुख्य दावेदार के रूप में उभरने के बीच, शिंदे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और अन्य केंद्रीय नेताओं के साथ मिलकर चयन प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर काम कर रहे हैं।

शिंदे अपनी यात्रा के दौरान राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की अहम बैठकों में शामिल होने वाले हैं और उन्हें पूरा भरोसा है कि छह सांसदों को शामिल करने का फ़ैसला सभी संवैधानिक एवं कानूनी नियमों के अनुसार है। यद्यपि संजय राउत के नेतृत्व में विपक्ष ने इस दलबदल की कड़ी आलोचना करते हुए इसे गंभीर अपराध और राजनीतिक जनादेश की चोरी करार दिया है, वहीं शिंदे ने इन चिंताओं को खारिज करते हुए डबल-इंजन की सरकार के कल्याणकारी एजेंडे के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पर ज़ोर दे रहे है।