संसद में नहीं बोलने देने का आरोप गलत, राहुल बार-बार बदलते हैं गोल पोस्ट : भाजपा

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नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के इस दावे को खारिज किया है कि उन्हें बुधवार को संसद में नहीं बोलने दिया गया। पार्टी ने विपक्ष के नेता पर बार-बार बात बदलने (गोल पोस्ट बदलने) का आरोप लगाया है।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पत्रा ने पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन के दौरान लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर नहीं बोलने देने के आरोप को लेकर गांधी पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि गांधी ने आज शाम छह संवाददाता सम्मेलन का आयोजन किया। इस दौरान उन्होंने फिर से तथ्यों से भटकाने की कोशिश की।

उन्होंने कहा कि मैंने बार-बार कहा है कि जब 45 लोगों को बोलने का मौका दिया गया, तो गांधी को बोलने का मौका क्यों नहीं दिया जाएगा। जब प्रियंका गांधी वाड्रा को बोलने का मौका दिया गया, तो गांधी को बोलने का मौका क्यों नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि गांधी को बोलने का पूरा मौका दिया गया, लेकिन वह बोल नहीं पाए।

पात्रा ने कहा कि गांधी ने यह भी कहा है कि वह भाजपा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) या उनसे जुड़े किसी भी व्यक्ति से माफी नहीं मांगते हैं, लेकिन कुछ दिन पहले उन्होंने शिवराज सिंह चौहान से लिखित रूप में माफी मांगी थी। एक हलफनामा पर हस्ताक्षर करके उन्होंने अपने बयान, चौकीदार चोर है के लिए भी माफी मांगी थी। उन्होंने कहा कि हम जानते हैं कि गांधी आप माइक्रोफोन पर माफी नहीं मांगते, लेकिन आप अदालत में माफी मांगते हैं।

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि गांधी ने संसद में कहा कि छात्रों पर गोलियां चलाई गयीं और यह आदेश गृह मंत्री अमित शाह ने दिया था। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों पर गोली नहीं चलाई गई। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह, किरेन रिजिजू, पीयूष गोयल और भाजपा ने आधिकारिक संवाददाता सम्मेलन में साफ़ किया कि कोई गोलीबारी नहीं हुई थी।

पात्रा ने आरोप लगाया कि गांधी ने फिर से अपना रुख बदल लिया है। गोल पोस्ट बदलना करना कोई गांधी से सीखे। सदन में आज गांधी ने कहा कि छात्रों पर गोली चलाई गई और गृहमंत्री ने इसका आदेश दिया। भाजपा के तमाम मंत्रियों ने और भाजपा ने आधिकारिक रूप से स्पष्ट कर दिया है कि गोली नहीं चली है। गोल पोस्ट बदलना गांधी की पुरानी आदत है।

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि मैं फिर से दोहरा रहा हूं कि विरोध-प्रदर्शन के दौरान, मौके पर मौजूद स्थानीय उपजिला मजिस्ट्रेट (एसडीएम) के पास ही यह तय करने का अधिकार होता है कि अगर स्थिति बेकाबू हो जाए तो क्या कार्रवाई की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि गांधी कहते हैं कि दिल्ली पुलिस गृह मंत्रालय के अधीन है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि जहां भी भीड़ या जमावड़ा हो वहां गृह मंत्री खुद आदेश दे रहे होते हैं। उन्होंने कहा कि गांधी ने दावा किया कि उन्होंने खुद गृह मंत्री को पुलिस से बात करते देखा, तो वह बताएं कि उन्होंने यह कहां देखा?

संसद में हर जगह सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, इसलिए हमें सबूत दिखाएं। पात्रा ने कहा कि डॉ. सिंह पूरी बहस में मौजूद रहे और आज उत्तर भी दिया। मतदान के माध्यम से आज से यह विधेयक लोकसभा से पारित हो गया। इसके लिए मैं आप सभी को बधाई देता हूं। मैं इसके लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का धन्यवाद करता हूं।