टिब्बी नगर पालिका में भाजपा का सूपड़ा साफ, निर्दलीयों ने मारी बाजी; कांग्रेस को 8 सीटें

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हनुमानगढ़। राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले की टिब्बी नगर पालिका के चुनाव परिणामों ने सियासी तस्वीर बदल दी है। 20 वार्डों वाली नगर पालिका में भारतीय जनता पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा और पार्टी एक भी वार्ड जीतने में सफल नहीं हो सकी। वहीं कांग्रेस ने आठ सीटों पर जीत दर्ज कर अपनी मौजूदगी मजबूत की।

टिब्बी के चुनाव परिणामों की सबसे खास बात यह रही कि यहां मतदाताओं ने दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के बजाय निर्दलीय प्रत्याशियों पर अधिक भरोसा जताया। निर्दलीय उम्मीदवारों ने कुल 11 वार्डों में जीत दर्ज कर कांग्रेस और भाजपा दोनों को पीछे छोड़ दिया। इस तरह 20 वार्डों के परिणाम में निर्दलीयों का दबदबा साफ नजर आया।

भाजपा का खाता भी नहीं खुला

टिब्बी नगर पालिका चुनाव भाजपा के लिए बेहद निराशाजनक रहे। पार्टी ने सभी वार्डों में चुनावी मैदान में उतरकर जीत की उम्मीद लगाई थी, लेकिन परिणाम आने के बाद भाजपा के खाते में एक भी सीट नहीं आई। 20 में से किसी भी वार्ड में भाजपा प्रत्याशी जीत दर्ज नहीं कर सका।

भाजपा के लिए यह परिणाम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि प्रदेश में पार्टी सत्ता में है और नगरीय निकाय चुनावों में उसके प्रदर्शन को स्थानीय स्तर पर संगठन की स्थिति से जोड़कर देखा जा रहा है।

निर्दलीयों ने दोनों दलों को पीछे छोड़ा

टिब्बी में सबसे बड़ा उलटफेर निर्दलीय प्रत्याशियों ने किया। स्थानीय मुद्दों और व्यक्तिगत जनसंपर्क के सहारे मैदान में उतरे निर्दलीयों ने 11 वार्डों में जीत हासिल की। इससे स्पष्ट है कि कई वार्डों में मतदाताओं ने पार्टी के बजाय स्थानीय प्रत्याशी और उसकी व्यक्तिगत पकड़ को प्राथमिकता दी।

निर्दलीयों की इस बड़ी जीत ने कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए राजनीतिक संदेश दिया है कि स्थानीय निकाय चुनावों में केवल पार्टी का चुनाव चिह्न ही जीत की गारंटी नहीं है।

कांग्रेस आठ सीटों के साथ दूसरे स्थान पर

कांग्रेस ने आठ वार्डों में जीत हासिल कर भाजपा से कहीं बेहतर प्रदर्शन किया। हालांकि पार्टी निर्दलीयों को बहुमत से रोकने में कामयाब नहीं रही, लेकिन आठ सीटों के साथ वह नगर पालिका में मजबूत विपक्षी भूमिका में नजर आ रही है।

वहीं मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने भी एक वार्ड में जीत दर्ज कर अपना खाता खोला। इस तरह टिब्बी नगर पालिका के 20 वार्डों में निर्दलीय 11, कांग्रेस 8 और माकपा 1 सीट पर विजयी रही, जबकि भाजपा के खाते में कोई सीट नहीं आई।

अध्यक्ष पद को लेकर बढ़ी राजनीतिक दिलचस्पी

निर्दलीयों के सबसे अधिक वार्ड जीतने के बाद अब नगर पालिका में सत्ता का समीकरण भी दिलचस्प हो गया है। अध्यक्ष पद के लिए किस पक्ष को समर्थन मिलता है और निर्दलीय पार्षद किस दिशा में जाते हैं, इस पर स्थानीय राजनीति की नजर रहेगी। चुनाव परिणामों ने भाजपा के सामने जहां संगठनात्मक चुनौती खड़ी की है, वहीं कांग्रेस के लिए भी निर्दलीयों के बीच अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की चुनौती होगी।