
सबगुरु न्यूज-सिरोही। सिरोही विधानसभा में एकाएक कांग्रेस की राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। शिवगंज में संयम लोढ़ा मोर्चा सम्भाले हुए हैं सिरोही में नवनियुक्त मंडल अध्यक्ष की सक्रियता बढ़ गई है। सिरोही जिला मुख्यालय पर भी भले ही सत्ता की स्वेच्छाचारिता के खिलाफ राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं, लेकिन पिंडवाड़ा और रेवदर जैसी विधानसभाओं में सत्ता की इसी मनमानी पर आवाज उठाने वाला कांग्रेस का कोई नेता नजर नहीं आ रहा है।
इस विधानसभा में कांग्रेस नेता संयम लोढ़ा यूं भी सक्रिय रहे लेकिन, एकाएक ये सक्रियता बढ़ने के पीछे की वजह राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश के बाद नगर पालिका पंचायत समिति चुनावों की दस्तक को माना जा रहा है। ये चुनाव भी संयम लोढ़ा की ही याचिका पर होने की स्थिति में आए हैं। इसके लिए संगठन ने एन वक्त पर सिरोही नगर मंडल के अध्यक्ष को भी बदला है। लेकिन, शेष दो विधानसभाओं पर कांग्रेस अभी भी लगभग सुप्त अवस्था में है। जबकि इन इलाकों में एक विधानसभा में तो कांग्रेस जिलाध्यक्ष खुद प्रत्याशी रहे हैं और दूसरी विधानसभा में इनका घर और कार्यक्षेत्र रहा है। जहां राष्ट्रीय नेतृत्व देश की सबसे मजबूत मानी जाने वाली सरकार की जवाबदेही के मुद्दों पर बैकफुट पर ले जाने के लिए मजबूर कर दे रहा है वहीं जिले में कांग्रेस का नेतृत्व जिले की भाजपा के कमजोर नेतृत्व और प्रशासनिक गैर जवाबदेही को लेकर कोई हलचल नहीं मचा पा रहा है। ये बात अलग है कि सिरोही विधानसभा स्थानीय नेतृत्व की वजह से भाजपा के मंत्री के माध्यम से हर मुद्दे पर प्रदेश सरकार और स्थानीय नेतृत्व को घेरे हुए है।
शिवगंज में नगर परिषद के द्वारा एक व्यापारी की दुकान के निर्माण को भी किसी पूर्व नोटिस के रोकने को लेकर संयम लोढ़ा ने वहां के अधिशासी अधिकारी को घेरा। जिले की अन्य नगर पालिकाओं में इसी तरह की कार्रवाइयों पर कांग्रेस मौन ही रही। वहीं विधानसभा के ग्रामीण क्षेत्र की रोवाड़ा घाटा रोड के पहली ही बारिश में बिखर जाने पर पीडब्ल्यूडी कार्यालय का घेराव किया। कालंद्री रोड के टूटने पर भी कांग्रेस ने सरकार और पीडब्ल्यूडी और सरकार को आड़े हाथों लिया।
इधर, सिरोही शहर मंडल में भी सक्रियता एकाएक बढ़ गई है। प्रदेश कांग्रेस के द्वारा सिरोही नगर मंडल के अध्यक्ष बदलने के बाद एक सप्ताह में ही तीन आयोजन सामने आए। 25 जुलाई को राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देश पर पेपर लीक को लेकर दिल्ली के जंतर मंतर पर जेन ज़ी के प्रदर्शन के दौरान पुलिस के अत्याचार और बर्बरता के खिलाफ 25 जुलाई को नगर मंडल अध्यक्ष पुनित जैन के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन हुआ। उसके ठीक अगले दिन ही उनके नेतृत्व में कारगिल शहीद दिवस पर शहीद स्मारक पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
सिरोही जिला मुख्यालय अव्यवस्थाओं से सबसे ज्यादा बदहाल है। टूटी सड़कों पर लोगों का चलना दुश्वार हो चुका है। बारिश में तो इन सड़को ने वाहनों और लोगों दोनों का ही हाल खराब किया हुआ है। नगर पालिका बोर्डों के नहीं होने के कारण आबूरोड, माउंट आबू, को तरह सिरोही की भी सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चरमराई हुई है। इन्हीं सब अव्यवस्थाओं को लेकर मंगलवार कांग्रेस नगर मंडल पुनीत जैन के नेतृत्व में कांग्रेस ने प्रशासक जिला कलेक्टर को ज्ञापन दिया।
इसके बाद बुधवार को जिला कलेक्टर ने सभी संबंधित अधिकारियों के साथ सिरोही शहर का अवलोकन करना पड़ा। वहां की सड़कों और सफाई को लेकर संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इसके विपरीत आबूरोड और माउंट आबू नगर पालिकाओं में सत्ता पक्ष के साथ साथ विपक्ष के भी मौन धारण किए हुए होने की वजह से टूटी हुई सड़कें और बदहाल सफाई व्यवस्था ने हाल खराब किया हुआ है।
-जिला संगठन के जगने का इंतजार
कांग्रेस जिलाध्यक्ष लीलाराम गरासिया ने लंबे अरसे के बाद अपनी जिला कार्यकारिणी घोषित कर दी है। लेकिन, जिला संगठन राष्ट्रीय और प्रदेश स्तरीय कार्यक्रमों के अलावा स्थानीय स्तर पर कोई बड़ा आंदोलन अपने स्तर पर खड़ा नहीं कर पाया है। सबसे सुप्त पिंडवाड़ा आबू विधानसभा और इसके बाद रेवदर।
पिंडवाड़ा-आबू विधानसभा में कांग्रेस की चुप्पी प्रदेश के लिए चिंताजनक होनी चाहिए क्योंकि जिलाध्यक्ष खुद यहां के प्रत्याशी रहे हुए हैं दूसरा यहां पर दो नगर पालिकाएं पड़ती हैं। अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित इस विधानसभा में पिछले करीब ढाई दशक से कांग्रेस इस वजह से अपना विश्वास नहीं कमा पाई है कि यहां पर सत्ता और विपक्ष दोनों में स्थानीय लोगों की समस्याओं में सहारा बनने वाली कांग्रेस को कोई आवाज नहीं मिल पाई है।
यही हाल रेवदर विधानसभा का है। यहां की पंचायत समिति में खुद जिलाध्यक्ष प्रधान हैं। सांगठनिक सूत्रों की मानें तो जिलाध्यक्ष लीलाराम गरासिया की पिंडवाड़ा-आबू विधानसभा में कम सक्रियता की मूल वजह ये भी है कि वो अपना पहला ध्यान टीएसपी क्षेत्र में पड़ने वाली आबूरोड पंचायत समिति के प्रधान के रूप में फिर से काबिज होने में लगाए हुए हैं। इस विधानसभा में दो पंचायत समिति और एक नगर पालिका है। रेवदर पंचायत समिति में तो रेवदर के कांग्रेस विधायक मोतीराम कोली सक्रिय हैं लेकिन, आबूरोड नगर पालिका में उनकी अरूचि को लेकर यहां के मतदाताओं में उनके प्रति नाराज़गी साफ नजर आ रही है। आबूरोड पंचायत समिति और नगर पालिका में कांग्रेस उस तरह से सक्रिय नहीं दिख रही है जिस तरह की निरंतर सक्रियता सिरोही और शिवगंज नगर निकायों और पंचायत समितियों में देखने को मिल रही है।
स्थानीय लोगों में ये चर्चा आम है कि आबूरोड और पिंडवाड़ा पंचायत समितियों में कांग्रेस की निष्क्रियता की मूल वजह ये भी है कि यहां के बजरी की अवैध वसूली और दूसरे कई कामों में दोनों संगठनों के नेताओं के साझा आर्थिक हित हैं। इसी के कारण यहां पर सत्ता की अव्यवस्थाओं के खिलाफ आवाज भी उठती नहीं दिख रही है। यूं चुनावो के कारण हाल में आबूरोड नगर पालिका में कांग्रेस के कुछ नेता सक्रिय दिखे हैं। लेकिन, उन पर जनता का विश्वास नहीं के बराबर है। इनकी एकाएक सक्रियता पर जनता में यही सवाल है कि जिन मुद्दों को ये लोग अभी उठा रहे हैं उन पर पिछले पांच सालों से मौन क्यों थे। मतदाता इन मुद्दों पर लंबे मौन को दोनों संगठनों की सहमति के रूप में देख रही है।
लीलाराम गरासिया के नेतृत्व में जिला कार्यकारिणी गठित हुए करीब दो महीने होने को हैं। लेकिन स्थानीय साझा समस्याओं को लेकर जिला संगठन कोई बड़ा आंदोलन नहीं खड़ा कर पाया है। जिला संगठन म रेवदर विधानसभा का पलड़ा भारी है। इसके बावजूद रेवदर में मुद्दों को लेकर भी कोई बड़ा आंदोलन नहीं हुआ नजर आता। प्रदेश के निर्देश पर जो एक विरोध प्रदर्शन हुआ वो भी जिला मुख्यालय की जगह रेवदर विधानसभा में पड़ने वाले आबूरोड में करके औपचारिकता पूरी कर ली गई। राहुल गांधी भले ही इस विचार ओर जिलाध्यक्षों को अधिक शक्ति देने की बात करते रहते हों कि कांग्रेस संगठन जनता के बीच जाकर उनकी आवाज बनेगा, लेकिन सिरोही जिले में जिला संगठन ऐसा कुछ लंबे अर्से से नहीं दिखा जिसकी वजह से कांग्रेस लोगों में ये विश्वास जगा सके कि उनकी हर जायज मांगों के लिए वो उनके साथ है।


