जयपुर में मैसर्स नव्यता पर छापा, फर्जी आईटीसी के बड़े मामले का खुलासा

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जयपुर। राजस्थान में जयपुर के मानसरोवर विस्तार स्थित केसर नगर क्षेत्र में संचालित मैसर्स नव्यता पर वाणिज्यिक कर विभाग की सर्वे कार्रवाई में वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) कानून के प्रावधानों के विपरीत 1.39 करोड़ रुपए का संदिग्ध इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लेना पाया गया है।

विभाग की डेटा एनालिटिक्स एवं जोखिम विश्लेषण प्रणाली से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर की गयी इस कार्रवाई में प्रारंभिक जांच में सामने आया कि यह फर्म मुख्य रूप से मैनपावर सप्लाई, स्टाफिंग तथा प्रशिक्षण सेवाएं प्रदान करती है।

वित्त वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 के दौरान फर्म द्वारा दिल्ली स्थित विभिन्न आपूर्तिकर्ताओं से प्राप्त खरीद के आधार पर 1.39 करोड़ रुपए से अधिक का इनपुट टैक्स क्रेडिट प्राप्त कर उसका उपयोग किया। विभागीय सत्यापन में पाया गया कि जिन आपूर्तिकर्ताओं के आधार पर यह आईटीसी लिया गया, उनके जीएसटी पंजीकरण की तिथि से ही निरस्त पाए गए, जिससे इन लेन-देन की सत्यता पर गंभीर संदेह उत्पन्न हुआ है।

प्रारंभिक जांच के आधार पर 1.39 करोड़ रुपए से अधिक का संदिग्ध इनपुट टैक्स क्रेडिट चिह्नित किया गया है। साथ ही फर्म के क्रेडिट लेजर में 27.47 लाख रुपए का इनपुट टैक्स क्रेडिट वर्तमान में उपलब्ध पाया गया है। हालांकि, यह केवल वर्तमान में उपलब्ध आईटीसी की राशि है।

विस्तृत जांच के दौरान फर्जी बिलों के माध्यम से किए गए वास्तविक लेन-देन, संबंधित अन्य फर्मों की भूमिका तथा कर अपवंचन की वास्तविक मात्रा का आकलन किया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद कर अपवंचन की वास्तविक राशि का निर्धारण किया जाएगा। मामले की विस्तृत जांच जारी है तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जायेगी।