सिरोही निकाय चुनावों की मतदाता सूचियां आते ही खुली भाजपा-कांग्रेस नेतृत्व की पोल

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राजस्थान निकाय चुनाव 2026

सिरोही/आबूरोड। राजस्थान में स्थानीय निकाय चुनावों की दस्तक हो चुकी है। मतदाता सूचियां भी सार्वजनिक हो गई हैं। मतदाता सूचियों के बाहर आते ही पांचों नगर निकायों में हडकम्प मच गया है। इस मतदाता सूचि ने दोनों ही प्रमुख राजनीतिक पार्टियों के बूथ मैनेजमेंट की पोल खोल दी है। कांग्रेस मतदाता सूचि के मैनेजमेंट में वैसे ही फेल रहती है। फिर उनके जिलाध्यक्ष की सुसुप्तता बता रही है कि वो चुनावों को लकर कितने सजग हैं। लेकिन, भाजपा तो बूथ से एक कदम आगे जाकर पन्ने पर काम कर रही है इसके बावजूद भाजपा के ही वोटरों को जिस तरह से बिखेरा है उससे जिला नेतृत्व द्वारा संगठन की रणनीति पर काम करने को लेकर बरती गई ढिलाई सामने आ रही हैं। अब मतदाता और खासकर वो नेता परेशान हैं जिन्हें चुनाव लडना था।

– वार्डों से बाहर निकले सैंकडों वोटर

सिरोही और आबूरोड के दो जगह के नेताओं ने इसे लेकर अपना दर्द बयां किया। यही स्थिति माउण्ट आबू, पिण्डवाडा और शिवगंज में भी बताई जा रही है। उन्होंने बताया कि सिरोही में एक एक वार्ड के दो सौं से तीन सौ मतदाताओं को उनके मूल वार्ड से हटाकर दूसरे वार्ड की मतदाता सूचि में डाल दिया गया है। इसी तरह की व्यवस्था आबूरोड में भी देखी गई। यहां तो हालात ये हैं कि एक ही घर के मतदाताओं को अलग-अलग तीन वार्डों में डाल दिया गया है। ऐसे में मतदाताओं वो वोट देने जाने में और राजनीतिक पाटियों को अपनी सीटें जीतने में मशक्कत करनी पडेगी।

– बूथ प्रभारी के साथ थे बीएलओ दो

दोनों ही राजनीतिक पार्टियों के हर बूथ पर बूथ अध्यक्ष होते हैं। इन बूथ अध्यक्षों का काम मतदाता सूचियों में अपने बूथ के मतदाताओं के नामों की तस्दीक करना और उनमें संगठन के प्रति विश्वास जगाना होता है। नगर निकाय चुनावों में बूथ की बजाय वार्ड के अनुसार मतदान होगा। ऐसे में किसी एक बूथ में दो वार्ड आ रहे हैं तो दो बूथों पर एक वार्ड भी। भाजपा ने इससे होने वाली समस्या से मुक्ति पाने के लिए एक कदम आगे का काम किया। उन्होंने सरकार के द्वारा मतदाता सूचियों के संधारण के लिए नियुक्त बीएलओ के साथ एक बीएलओ अपने संगठन का भी लगाया जिसे बीएलओ टू कहा गया। बूथ अध्यक्ष तो पहले ही इन इलाकों में थे। भाजपा ने इनके साथ में बीएलओ दो भी लगाए जो इनके ही कार्यकर्ता थे। इसके बाद भी इनके खुदके संगठन के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के घरों के वोट कई वार्डों में विभक्त हो गए हैं। अब इसके लिए निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण प्रधिकारी के कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं।

-ये मान रहे हैं वजह

मतदाता सूचियों में इस तरह की बडी गडबडी आने के पीछे राजनीतिक कार्यकर्ता एक वजह मान रहे हैं बीएलओ की अनुभवहीनता। सिरोही के एक राजनीतिक कार्यकर्ता ने बताया कि जो अनुभवी बीएलओ थे उन्होंने या तो अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके मतदाता सूचि संधारण की ड्यूटी से मुक्ति ले ली वहीं कुछ जनगणना के लिए भी लगे हुए थे। ऐसे में इनकी जगह दूसरे अनुभवहीन बीएलओ लगाए गए। उन्होंने आशंका जताई की बूथ के मतदाताओं को वार्डों में डिस्ट्रीब्यूट करने और वार्डवार मतदाताओं की संख्या को री-शफल करने के लिए दौरान रेंडम प्रक्रिया अपनाई गई होगी जिससे ये स्थिति आ गई कि एक-एक वार्ड के सौ से ज्यादा मतदाता वार्ड से बाहर हो गए और एक ही परिवार के मतदाता भी अलग-अलग वार्डों में बंट गए।