भिण्ड : युवती से कार में रेप के सह-आरोपी की जमानत याचिका कोर्ट ने की खारिज

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भिण्ड। मध्यप्रदेश के भिण्ड जिले के अटेर अनुभाग के सुरपुरा थाना क्षेत्र में युवती से दुष्कर्म के मामले में सह-आरोपी विवेक कुमार यादव को न्यायालय से राहत नहीं मिली। नियमित जमानत के लिए दायर याचिका पर सुनवाई के बाद न्यायालय ने सोमवार को उसे खारिज कर दिया।

न्यायालय ने मामले की गंभीरता, उपलब्ध साक्ष्यों और आरोपी पर मुख्य आरोपी को दुष्कर्म में सहयोग करने के आरोप को देखते हुए जमानत देना उचित नहीं माना। मामले में फरियादिया पक्ष की ओर से अधिवक्ता हिमांशु शर्मा ने जमानत का विरोध करते हुए लिखित आपत्ति पेश की थी। मामला 15 जुलाई 2026 का है।

फरियादिया ने सुरपुरा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वह दोपहर करीब दो बजे सुरपुरा स्थित हनुमान मंदिर के पास अपनी बुआ के यहां नावली जाने के लिए ऑटो का इंतजार कर रही थी। इसी दौरान सुमित यादव और उसके साथ एक अन्य युवक सफेद चार पहिया वाहन से वहां पहुंचे। सुमित ने उसे नावली छोड़ने की बात कही।

फरियादिया के अनुसार वह उनकी बात पर अपनी इच्छा से कार में बैठ गई। सुमित पीछे की सीट पर बैठा था, जबकि दूसरा युवक कार चला रहा था। आरोप है कि दोनों उसे कार से अटेर किले तक ले गए। वहां सुमित ने कार में उसके साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद दोनों उसे वापस सुरपुरा की ओर लेकर आए और परा तिराहे के पास कार रोककर उसे नीचे उतार दिया। फरियादिया के अनुसार कार से नीचे गिरने के कारण उसके पैर में चोटें आईं। बाद में उसने अपने परिजनों को घटना की जानकारी दी।

पुलिस ने मामले में बीएनएस की धाराओं 64(1), 70(1) और 351(3) के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू की। विवेक कुमार को पुलिस ने 18 जुलाई को गिरफ्तार किया था। इसके बाद 19 जुलाई को न्यायालय में पेश करने पर उसे न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया।

जांच के दौरान पुलिस ने घटना में इस्तेमाल सफेद मारुति सुजुकी फ्रॉक्स कार क्रमांक एमपी-07-एई-1372 जब्त की। न्यायालय के समक्ष पेश रिकॉर्ड के अनुसार विवेक के मेमोरेण्डम में उसके और सुमित के उक्त कार से सुरपुरा आने की बात सामने आई। वाहन के रजिस्टर्ड मालिक ने भी पुलिस को बताया कि 15 जुलाई की सुबह विवेक कार लेकर गया था।

बचाव पक्ष ने विवेक को निर्दोष बताते हुए कहा कि उसे साजिश के तहत झूठा फंसाया गया है और उसके खिलाफ पहले कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। वहीं अभियोजन ने जमानत का विरोध किया। फरियादिया पक्ष के अधिवक्ता हिमांशु शर्मा ने लिखित आपत्ति में कहा कि आरोपी ने मुख्य आरोपी के साथ मिलकर फरियादिया को कार से नीचे उतारने में सहयोग किया और जमानत मिलने पर उसके द्वारा साक्ष्यों को प्रभावित करने की आशंका है।

न्यायालय ने रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद कहा कि मामले में विवेचना पूरी होकर अभियोग पत्र प्रस्तुत किया जा चुका है। उपलब्ध सामग्री के आधार पर आरोपी को प्रथम दृष्ट्या गलत तरीके से फंसाया जाना सामने नहीं आता। अपराध गंभीर प्रकृति का है और आजीवन कारावास तक के दंड से दंडनीय है। इन परिस्थितियों को देखते हुए न्यायालय ने विवेक कुमार यादव की धारा 483 बीएनएसएस के तहत प्रस्तुत पहली नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी।