काठमांडू। नेपाल के भोटेकोशी में बुधवार को अचानक आई भयानक बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 475 हो गई है, जबकि सैकड़ों लोग अभी भी लापता हैं। बचाव टीमें नदी और निचले इलाकों में जीवित लोगों और शवों की तलाश कर रही हैं। पुलिस ने यह जानकारी दी है।
काठमांडू पोस्ट के अनुसार बाढ़ 26 अगस्त को सुबह उत्तरी नेपाल के रसुवा और आस-पास के ज़िलों में आई, जिससे भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में पानी और मलबे का तेज़ बहाव आ गया। इस आपदा में घर, पुल, सड़कें और दूसरे बुनियादी ढांचे बह गये, जबकि कुछ इलाकों में रहने वाले लोग और यात्री देश के बाकी हिस्सों से कट गए। अधिकारी अलग-अलग ज़िलों से मरने वालों और लापता लोगों की रिपोर्ट का मिलान कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि जिन लोगों का पता नहीं चला है, उनमें बड़ी संख्या में पर्यटक और ट्रेकर्स शामिल हैं। नेपाल पर्यटन बोर्ड ने गुरुवार रात कहा कि बाढ़ से प्रभावित इलाकों में 127 नेपालियों समेत 667 पर्यटक और यात्री अभी भी लापता हैं। बोर्ड ने कहा कि वह उन पर्यटकों और यात्रियों का पता लगा रहा है जो बुधवार सुबह बाढ़ आने पर रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग में थे, या वहां से गुज़र रहे थे।
लापता लोगों में विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। बोर्ड ने कहा कि प्रभावित इलाकों से 31 विदेशी नागरिकों को बचाया गया है, जिनमें एक भारतीय, चार दक्षिण कोरियाई, दो अमरीकी, दो रूसी, दो इतालवी, एक बल्गेरियाई और एक स्विस नागरिक शामिल हैं। बचाये गये बाकी 18 लोगों की राष्ट्रीयता की अभी तक पुष्टि नहीं हुई है।
पर्यटन, संस्कृति मंत्रालय, पर्यटन और नागरिक उड्डयन, पर्यटकपुलिस और पर्यटन क्षेत्र की दूसरी एजेंसियां लापता यात्रियों के बारे में जानकारी इकट्ठा कर रही हैं और उसे सत्यापित कर रही हैं। उन्होंने बताया कि वे तलाश और बचाव की कोशिश में ट्रैवल एजेंसियों, ट्रेकिंग कंपनियों, गाइड, स्थानीय अधिकारियों और सुरक्षा एजेंसियों के साथ भी समन्वय कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि नेपाली सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल को तलाश, बचाव और निकासी अभियान के लिए तैनात किया गया है। अलग-थलग इलाकों तक पहुंचने और बचे हुए लोगों को निकालने के लिए हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल किया गया है, जबकि मैदानी टीमें नदी के किनारों और नीचे की बस्तियों में तलाश जारी रखे हुए हैं।
बाढ़ ने इलाके में परिवहन संपर्क और दूसरे बुनियादी ढांचों को भी बहुत नुकसान पहुंचाया है, जिससे प्रभावित समुदायों तक पहुंचने की कोशिशें मुश्किल हो गई हैं। अचानक आई बाढ़ के कारणों की अभी भी जांच की जा रही है।



