नेपाल-तिब्बत सीमा पर आपदा : मृतकों की संख्या बढकर 359, 288 भारतीय लापता

0

नई दिल्ली/काठमांडो। नेपाल-तिब्बत सीमा पर आए विनाशकारी और अचानक आयी बाढ़ एवं भूस्खलन में मरने वालों की संख्या बढ़कर 359 हो गई है तथा 900 से अधिक लोग लापता बताए गए हैं।

नेपाली अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि खतरा पूरी तरह से टला नहीं है और इस इलाके में ऐसी ही दूसरी और यहां तक की तीसरी दुर्घटना जल्द देखने को मिल सकती है। इस बीच व्यापक तबाही और संचार नेटवर्क पूरी तरह ठप होने के बीच राहत एवं बचाव कार्य लगातार जारी हैं।

नेपाल पुलिस ने गुरुवार को बताया कि एक दिन पहले हिमालयी सीमावर्ती क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ में कम से कम 359 लोगों की जान जा चुकी है। तिब्बत में तीन लोगों के मरने की जानकारी सामने आई है और कम से कम 558 लोगों का कुछ पता नहीं चल सका है।

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने बताया कि गुरूवार को चलाए गए बचाव एवं राहत अभियान में कम से कम 573 लोगों को बचा लिया गया है। बचाव के काम में करीब 13 हजार से अधिक सुरक्षा कर्मियों को लगाया गया है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नई दिल्ली में बताया कि भारत अपने प्रभावित नागरिकों को बचाने और सुरक्षित निकालने के लिए नेपाल और चीन के अधिकारियों के लगातार संपर्क में है।

नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के कारण हुई तबाही के बाद 290 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। इनमें त्रिशूली-1 ऊर्जा परियोजना पर काम कर रहे भारतीय भी शामिल हैं हालांकि इन लोगों में से 63 को बचा लिया गया है। इसके अलावा तमिलनाडु के 21 लोगों को भी बचाया गया है। मानसरोवर यात्रा पर गए करीब 200 भारतीय नागरिकों के भी चीन के क्षेत्र में फंसे होने की आशंका है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने गुरुवार को यहां नेपाल पर विशेष ब्रीफिंग में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को नेपाल के प्रधानमंत्री से बात कर इस त्रासदी पर गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं और कहा है कि भारत नेपाल की जनता के साथ एकजुटता के साथ खड़ा है। उन्होंने भारत की ओर से हर संभव सहायता तथा मानवीय सहायता की पेशकश की थी।

नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) ने चेतावनी दी है कि रसुवागढ़ी सीमा क्षेत्र से लगभग 18 किलोमीटर ऊपर ल्हेन्डे नदी का बहाव रुकने से करीब 0.11 वर्ग किलोमीटर में एक बैरियर झील बन गई है, जिससे निचले इलाकों में एक और बड़ी बाढ़ आने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। प्रशासन ने नदी तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। बुधवार सुबह आई इस बाढ़ से रसुवा, नुवाकोट, धादिंग और गोरखा सहित कई जिले बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।

भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार प्रभावित क्षेत्र में तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, केरल और अन्य राज्यों के तीर्थयात्री और पर्यटक फंसे हुए हैं, जो कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए थे। इसके अलावा त्रिशूली-1 जलविद्युत परियोजना में काम कर रहे 73 भारतीय नागरिकों की स्थिति पर भी नजर रखी जा रही है। राहत प्रयासों के तहत तमिलनाडु के 21 नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।

भारत सरकार ने नेपाल की सहायता के लिए कदम बढ़ाए हैं और भारतीय वायुसेना के दो विमानों के माध्यम से कुल 47.5 टन राहत सामग्री भेजी है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी इस विभीषिका पर दुख व्यक्त करते हुए प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है और संयुक्त राष्ट्र की ओर से नेपाल सरकार को हर संभव मदद का आश्वासन दिया है।

यूनीसेफ ने अनुमान लगाया है कि इस आपदा के कारण 17 हजार बच्चों को तुरंत राहत पहुंचाए जाने की आवश्यकता है। अमरीका ने कहा है कि उसके करीब 90 नागरिक इस आपदा से प्रभावित हुए हैं। इसके अलावा कनाडा के 30, ब्रिटेन के 33 नागरिक भी इस आपदा से पीड़ित बताए गए हैं।