कर्नाटक : बी नागेंद्र का मंत्री पद से इस्तीफा, विधायक पद छोड़ने की पेशकश कर भाजपा को दी चुनौती

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बेंगलूरु। कर्नाटक के योजना एवं साख्यिकी मंत्री बी नागेंद्र ने महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में कोष के कथित दुरुपयोग को लेकर जारी विवाद के बीच शुक्रवार को राज्य मंत्रिमंडल से अपने इस्तीफे की घोषणा कर दी। इसके साथ ही उन्होंने विधायक पद से भी इस्तीफा देने की पेशकश करते हुए विपक्षी भाजपा को जनता की अदालत में आरोपों को सिद्ध करने की खुली चुनौती दी है।

नागेंद्र ने बताया कि उन्होंने स्वेच्छा से अपना इस्तीफा उपमुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार को सौंपा है, ताकि इस विवाद से कांग्रेस पार्टी को कोई असहजता न हो और सरकार के विकास कार्यों में कोई बाधा न आए।

उन्होंने बल्लारी से भाजपा नेताओं, विशेषकर बी श्रीरामुलु पर कटाक्ष करते कहा कि अगर मैंने कोई गलती की है तो मैं सजा भुगतने को तैयार हूं। आइए, जनता की अदालत में चलते हैं और सच साबित करके दिखाइए। उन्होंने कहा कि आप कहते हैं कि मैंने घोटाला किया और 187 करोड़ रुपए का हेरफेर किया। आइए और लोगों के सामने इसे साबित कीजिए।

उन्होंने अपने खिलाफ लगे सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए सवाल उठाया कि क्या उनके खिलाफ कोई हस्ताक्षर, आदेश या आर्थिक लेन-देन का सबूत मौजूद है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब राज्य की एसआईटी और सीआईडी जांच में उन्हें क्लीन चिट मिल गई थी, तब केंद्रीय जांच एजेंसियों के जरिए उन्हें दुर्भावनापूर्ण तरीके से फंसाने का प्रयास किया गया।

उन्होंने इसे विपक्षी दलों की मनुवादी मानसिकता करार दिया जो दलितों और आदिवासियों को नेतृत्व के पदों पर नहीं देखने देना चाहती। रामायण के शंबूक प्रसंग का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह पौराणिक युग नहीं है। यह संविधान और बाबासाहेब अंबेडकर का युग है। नागेंद्र ने भाजपा पर मनुवादी राजनीति करने और दलितों, आदिवासियों, महिलाओं, अल्पसंख्यकों और पिछड़े समुदायों को सत्ता के पदों पर आने से रोकने की कोशिश करने का आरोप लगाया।

विधानसभा में सूखा, कावेरी जल विवाद और कस्तूरीरंगन रिपोर्ट जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा न करने देने के लिए भाजपा की आलोचना करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि अदालत और संविधान पर उनका पूर्ण विश्वास है। उन्होंने कहा कि उनका इस्तीफा किसी अपराध की स्वीकारोक्ति नहीं है, बल्कि पार्टी और सरकार की मर्यादा की रक्षा के लिए उठाया गया कदम है।

उन्होंने कहा कि उन्होंने पहले कांग्रेस पार्टी के हितों की रक्षा के लिए 2024 में मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था और उसके बाद राज्य की एसआईटी और सीआईडी ने जांच की थी। उन्होंने पूछा कि राजनीतिक नेताओं से जुड़े अन्य लंबित मामलों में ऐसी कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

मुकदमा चलाने की मंज़ूरी देने के राज्यपाल के फैसले पर नागेंद्र ने कहा कि वह संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान करते हैं और कानूनी प्रक्रिया का सामना करेंगे। उन्होंने कहा कि मुझे संविधान और न्यायपालिका पर भरोसा है। मैं मामले का सामना करूंगा। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष वाल्मीकि निगम विवाद का इस्तेमाल राजनीतिक हथियार के तौर पर कर रहा है और विधानसभा में ठोस बहस की अनुमति दिए बिना पदयात्रा कर रहा है।

नागेंद्र ने विवाद में केंद्रीय अधिकारियों और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की भूमिका पर भी सवाल उठाए और तर्क दिया कि जब लेन-देन बैंकिंग प्रणाली से जुड़ा था, तो जवाबदेही सिर्फ़ उन तक ही सीमित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कथित तौर पर इधर-उधर किए गए फंड को वापस पा लिया गया है और ज़ोर देकर कहा कि जांच में उन लोगों की ज़िम्मेदारी तय होनी चाहिए जिन्होंने इन लेन-देन को मंज़ूरी दी और उन्हें अंजाम दिया।

नागेंद्र ने समर्थन के लिए शिवकुमार और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, सिद्दारमैया, केसी वेणुगोपाल और रणदीप सिंह सुरजेवाला का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि उनके इस्तीफ़े का मकसद यह सुनिश्चित करना था कि इस विवाद का असर कांग्रेस सरकार पर न पड़े। उन्होंने कहा कि मेरी वजह से मेरी पार्टी को शर्मिंदगी का सामना न करना पड़े। मैं नहीं चाहता कि मुख्यमंत्री के विकास कार्यों पर कोई असर पड़े। हालांकि, नागेंद्र ने साफ़ किया कि उनकी राजनीतिक लड़ाई जारी रहेगी और उन्होंने कहा कि वह पूरे राज्य में प्रचार करेंगे और अपने साथ हुए अन्याय-जैसा कि उन्होंने इसे बताया-का मुद्दा उठाएंगे।

उन्होंने कहा कि वे चाहें तो फिर से ईडी या सीबीआई भेज दें। मुझे डर नहीं है। नागेंद्र ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और उन्हें यकीन है कि आख़िरकार उन्हें इस मामले में बरी कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि मुझे अदालत पर अटूट भरोसा है। मैं पूरी तरह से बेदाग़ साबित होकर बाहर आऊंगा।