नेपाल-तिब्बत बाढ़ आपदा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 750, करीब 3000 लोग लापता

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काठमांडू। नेपाल में अचानक आई भयानक बाढ़ और भूस्खलन से मरने वालों की संख्या बढ़कर 750 हो गई है और लगभग 3,000 लोग अभी भी लापता हैं। बचाव दल कीचड़ और मलबे में जीवित बचे लोगों की तलाश कर रहे हैं।

स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार नेपाल में अभी भी 2,498 लोग लापता हैं, जिनमें 933 जलविद्युत कर्मचारी, 589 विदेशी नागरिक और विदेशी पर्यटकों के साथ यात्रा कर रहे 127 नेपाली शामिल हैं। वहीं, तिब्बत में 16 लोगों की मौत की रिपोर्ट है और 546 लोग लापता हैं। नेपाल में लगभग 20,000 सुरक्षाकर्मी तैनात किए गये हैं। हेलीकॉप्टरों के ज़रिए प्रभावित इलाकों से 279 जलविद्युत कर्मचारियों और 227 विदेशी नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया है।

यह आपदा बुधवार को चीन-नेपाल सीमावर्ती इलाके में आई। पानी और मलबे का अचानक बहाव हिमालय की घाटियों से गुज़रा, जिससे आवासीय बस्तियां नष्ट हो गयीं और सड़कें, पुल तथा जलविद्युत बुनियादी ढांचे क्षतिग्रस्त हो गए। खड़ी पहाड़ियां, संकरी घाटियां, मलबे और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे के कारण बचाव कार्यों में बाधा आ रही है।

अधिकारियों को बरामद शवों की पहचान करने में भी मुश्किल हो रही है। नेपाल पुलिस के उप महानिरीक्षक (डीआईजी ) एबी नारायण काफ्ले ने द काठमांडू पोस्ट को बताया कि पहचान करना इसलिए भी मुश्किल हो गया है क्योंकि कई शव अधूरे थे और उनके अंग कटे हुए थे।

काफ्ले ने कहा कि कई शव दो-तीन दिनों तक कीचड़ और पानी के नीचे दबे रहे। नेपाल ने सुरंग से बचाव कार्य, बचे हुए लोगों का पता लगाने वाली तकनीक, फॉरेंसिक और डीएनए जांच, और बरामद शवों को सुरक्षित रखने के लिए उपकरणों के मामले में खास मदद मांगी है। भारत से 11 सदस्यों वाली टनल-रेस्क्यू रिकॉनिसेंस टीम (जांच-पड़ताल करने वाली टीम) नेपाल पहुंच गयी है ताकि बचाव अभियान में मदद पहुंचायी जा सके।

त्रिशूली 3ए हाइड्रोपावर परियोजना में नेपाली सुरक्षा बलों ने सुरंग में फंसे हुए श्रमिकों का पता लगाया। सेना के प्रवक्ता राजा राम बस्नेत ने कहा कि हेलीकॉप्टर तैनात किए गए हैं, लेकिन बचाव कर्मियों को सुरंग के प्रवेश द्वार खोजने में मुश्किल हो रही है। बचाव टीमें मुश्किल हालात का सामना कर रही हैं क्योंकि वे हाइड्रोपावर प्लांट की सुरंग में फंसे श्रमिकों को बचाने की कोशिश कर रही हैं, जबकि रविवार सुबह स्थानीय समय के अनुसार पास की नदी का जलस्तर फिर से बढ़ रहा है।

नेपाली प्रधानमंत्री कार्यालय ने रविवार को अपर त्रिशूली 3ए हाइड्रोपावर प्लांट का ज़िक्र करते हुए कहा कि आज सुबह करीब चार बजे संयंत्र वाली जगह पर बाढ़ के कारण त्रिशूली नदी का जलस्तर पांच से 10 मीटर तक बढ़ गया। कार्यालय ने कहा कि बाढ़ ने नदी के किनारों को काटना शुरू कर दिया है। सुरंग तक जाने वाली सड़क बंद हो गई है और हेलीकॉप्टर की लैंडिंग मुमकिन बनाने और ज़रूरी उपकरण निकालने की तैयारी चल रही है।

कार्यालय ने कहा कि टीमें मलबा हटाने के लिए भारी मशीनों का इस्तेमाल कर रही हैं, और एक स्पेशल फोर्स हाइड्रोपावर फैसिलिटी के हिस्सों, सीसीटीवी कैमरों और दूसरे उपकरणों को निकालने की तैयारी कर रही है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, यह एक मुश्किल काम है क्योंकि सुरंग के प्रवेश द्वार का पता लगाना भी मुश्किल है।

साइट से लगभग 350 वर्करों और स्थानीय लोगों को बचाया गया है, जबकि उस इलाके में फंसे 100 से ज़्यादा लोगों तक पहुंचने की कोशिशें जारी हैं। बचे हुए लोगों ने बाढ़ को अचानक और बहुत भयानक बताया। हाइड्रोपावर प्लांट में काम करने वाले बुद्ध तमांग को 24 घंटे से ज़्यादा समय तक फंसे रहने के बाद बचाया गया है।

इस बीच, राहत कार्य तेज़ कर दिए गए हैं और प्रभावित समुदायों तक भोजन, ज़रूरी सामान तथ्सस मेडिकल मदद पहुंचाई जा रही है। सरकार की तरफ़ से दी जाने वाली नकद मदद भी पीड़ितों तक पहुंचने लगी है। अमरीका ने शनिवार को बाढ़ से प्रभावित नेपाल के लिए 36 लाख डॉलर से ज़्यादा की मानवीय सहायता का ऐलान किया, जिसमें 10,000 प्रभावित परिवारों के लिए आपातकालीन भोजन सहायता भी शामिल है। इस आपदा ने एक गंभीर मानवीय संकट भी पैदा कर दिया है।

यूनिसेफ ने कहा है कि कम से कम 17,000 बच्चों को तुरंत मदद की ज़रूरत है, जबकि 18 स्कूल पूरी तरह नष्ट हो गए हैं और 20 अन्य को नुकसान पहुंचा है। अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस सोसायटी का अनुमान है कि कम से कम 93,000 लोग प्रभावित हुए हैं और उन्हें तुरंत मदद की ज़रूरत है।

काठमांडू में अस्पताल और दूसरी जगहों पर परिवार अपने लापता रिश्तेदारों की तलाश में जुटे हैं। साथ ही लापता लोगों की तस्वीरें और नाम वाले पोस्टर भी लगाए गए हैं। अधिकारी हिमालयी क्षेत्र में बनी एक नयी झील पर भी नज़र रख रहे हैं, जिससे एक और भयानक बाढ़ का डर पैदा हो गया है।

चीन के सरकारी न्यूज चैनल सीसीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, शनिवार को चीन-नेपाल सीमा के पास एक नदी में भूस्खलन से एक नई झील (बैरियर लेक) बन गयी, जिसके कारण ग्यिरोंग पोर्ट के पास मौजूद बचाव कर्मियों को वहां से हटना पड़ा।

चीन के आपातकालीन प्रबंधन मंत्रालय के अनुसार शनिवार शाम एक निगरानी ड्रोन ने प्योरपु त्सांगपो नदी पर पहले से मौजूद एक झील से लगभग 2.8 किलोमीटर (1.7 मील) नीचे की ओर पहाड़ की ढलान पर भूस्खलन का पता लगाया। अधिकारियों ने बताया कि इस ताज़ा भूस्खलन से नदी में एक नई रुकावट पैदा हुई और एक और झील बन गई। हालांकि उस खतरे में कुछ कमी आई है, लेकिन बचाव दल अभी भी दबाव में हैं क्योंकि वे लापता लोगों की तलाश में बड़े इलाकों में खोजबीन कर रहे हैं और तबाह हुई घाटियों से शव निकाल रहे हैं।