गौरव भाटिया मानहानि मामले में हाईकोर्ट की टिप्पणी, सौरव दास-आशुतोष रांका पोस्ट हटाने पर राजी

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नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया से जुड़े मानहानि मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका से विवादित सोशल मीडिया पोस्ट हटाने पर विचार करने को कहा है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने बिना तथ्यों की पुष्टि किए किसी व्यक्ति के खिलाफ सोशल मीडिया पर गंभीर टिप्पणी करने के तरीके पर भी सवाल उठाया। मामला गौरव भाटिया की ओर से दायर 2 करोड़ रुपए के मानहानि मुकदमे से जुड़ा है। भाटिया ने CJP, उसके नेता अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को मामले में पक्ष बनाया है।

AI से तैयार पोस्ट को लेकर शुरू हुआ विवाद

विवाद एक सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुआ, जिसमें गौरव भाटिया की तस्वीर के साथ कथित तौर पर एक ऐसा बयान प्रसारित किया गया था, जिसे उन्होंने कभी नहीं दिया था। रिपोर्टों के मुताबिक पोस्ट में भाटिया को स्वातंत्र्य भारद्वाज के संबंध में आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए दिखाया गया था। भाटिया ने इस पोस्ट को फर्जी बताते हुए इसे हटाने की मांग की थी। बाद में सामने आया कि संबंधित ग्राफिक AI की मदद से तैयार किया गया था। सौरव दास ने भी बाद में पोस्ट के AI-generated होने की बात स्पष्ट की थी।

कोर्ट ने 24 घंटे में पोस्ट हटाने का सुझाव दिया

10 सितंबर को सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला ने मामले को आपसी समाधान की दिशा में ले जाने का सुझाव दिया। कोर्ट ने CJP नेताओं से कहा कि अदालत के आदेश का इंतजार करने के बजाय वे स्वेच्छा से संबंधित पोस्ट हटाने पर विचार कर सकते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार अदालत ने पोस्ट हटाने के लिए 24 घंटे का समय देने की बात भी कही। न्यायमूर्ति गेडेला ने युवा नेताओं को सोशल मीडिया पर विरोध या असहमति व्यक्त करते समय भाषा और तथ्यों के सत्यापन को लेकर अधिक जिम्मेदारी बरतने की सलाह दी।

भाटिया को भी कोर्ट की नसीहत

इस सुनवाई में अदालत ने केवल CJP नेताओं पर ही टिप्पणी नहीं की। रिपोर्ट के अनुसार कोर्ट ने गौरव भाटिया के अदालत का रुख करने से पहले मामले को आपसी बातचीत के जरिए सुलझाने की कोशिश नहीं करने पर भी सवाल उठाया। इस तरह सुनवाई के दौरान अदालत ने सोशल मीडिया पर राजनीतिक और वैचारिक विरोध के बीच तथ्य जांच, जिम्मेदार भाषा और आपसी समाधान की जरूरत पर जोर दिया।

मामला अब किस दिशा में जाएगा?

गौरव भाटिया ने मानहानि मामले में 2 करोड़ रुपये के हर्जाने के साथ कथित आपत्तिजनक सामग्री को आगे प्रसारित करने पर रोक की मांग की है। अब हाईकोर्ट के सुझाव के बाद विवादित पोस्ट हटाने और मामले को आपसी समाधान की दिशा में ले जाने की संभावना बनी है।