मथुरा। वृंदावन की धार्मिक गलियों में साधु का वेश धारण कर वर्षों से रह रहे एक बुजुर्ग की असली पहचान सामने आने के बाद पुलिस भी हैरान रह गई। पश्चिम बंगाल में करीब 38 साल पुराने अपहरण और दुष्कर्म के मामले में फरार चल रहे 70 वर्षीय बुधदेव हालदार को पश्चिम बंगाल पुलिस ने मथुरा पुलिस की मदद से वृंदावन के पानी घाट इलाके से गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार, बुधदेव पर वर्ष 1988 में एक युवती के अपहरण और रेप का आरोप था। घटना के बाद वह गिरफ्तारी से बचने के लिए फरार हो गया। करीब चार दशक तक पुलिस की पकड़ से दूर रहने के दौरान उसने अपनी पहचान छिपाने के लिए साधु का रूप अपना लिया।
पानी घाट में किराए के मकान में रह रहा था
जांच में सामने आया कि आरोपी पिछले करीब 32 वर्षों से वृंदावन के पानी घाट क्षेत्र में किराए के मकान में रह रहा था। वह परिक्रमा मार्ग में भीख मांगकर अपना गुजारा करता था। धार्मिक नगरी में साधु के रूप में रहने के कारण लंबे समय तक किसी को उसके अतीत पर शक नहीं हुआ।
पुलिस की पड़ताल में उसके वृंदावन में छिपे होने की जानकारी सामने आने के बाद निगरानी और स्थानीय स्तर पर छानबीन शुरू की गई। इसके बाद पश्चिम बंगाल पुलिस की टीम ने मथुरा पुलिस के सहयोग से पानी घाट इलाके में दबिश दी और उसे पकड़ लिया।
सर्विलांस ने खोला 38 साल पुराना राज
पश्चिम बंगाल के नादिया जिले के थाना तिहत्तर की पुलिस टीम आरोपी की तलाश में वृंदावन पहुंची थी। टीम में उपनिरीक्षक विकास घोष के साथ पुलिसकर्मी जीसू सोरेन और शोभिक शामिल थे। बताया गया है कि लंबे समय से लंबित इस मामले में पुलिस ने सर्विलांस और अन्य सुरागों के आधार पर आरोपी तक पहुंच बनाई। अदालत की ओर से गिरफ्तारी के आदेश जारी होने के बाद कार्रवाई को अंजाम दिया गया।
गिरफ्तारी के बाद बंगाल ले गई पुलिस
गिरफ्तारी के बाद बुधदेव हालदार को ट्रांजिट रिमांड की प्रक्रिया के तहत पश्चिम बंगाल ले जाया गया है। वहां पुराने मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। रिपोर्टों के मुताबिक मामले में पुलिस पहले ही न्यायालय में चार्जशीट दाखिल कर चुकी थी और आरोपी की गिरफ्तारी लंबित थी।
चार दशक बाद सामने आया अतीत
इस मामले ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि एक गंभीर अपराध का आरोपी आखिर इतने लंबे समय तक अपनी पहचान बदलकर कैसे कानून की नजरों से बचा रहा। 1988 में दर्ज मामले के बाद करीब 38 वर्ष तक फरार रहना और इनमें से लगभग 32 वर्ष वृंदावन में साधु के वेश में गुजारना इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू है।
वृंदावन में हुई इस गिरफ्तारी के बाद स्थानीय स्तर पर भी चर्चा है कि धार्मिक नगरी में लंबे समय से रहने वाला यह व्यक्ति वास्तव में कौन था, इसका खुलासा पुलिस की कार्रवाई के बाद हुआ। अब पश्चिम बंगाल में इस पुराने मामले की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।



