नई दिल्ली। नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी को महत्वपूर्ण समर्थन मिला है। ब्रिक्स देशों ने वैश्विक संस्थाओं में सुधार और विकासशील देशों की भागीदारी बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया। खास बात यह रही कि सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य चीन और रूस ने भारत और ब्राजील की स्थायी सदस्यता की आकांक्षाओं के समर्थन को दोहराया।
ब्रिक्स की ओर से जारी नई दिल्ली घोषणा में संयुक्त राष्ट्र और उसकी प्रमुख संस्थाओं में व्यापक सुधार की आवश्यकता पर सहमति जताई गई। घोषणा में कहा गया कि वैश्विक संस्थाओं में एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका सहित विकासशील देशों का प्रतिनिधित्व मौजूदा वैश्विक वास्तविकताओं के अनुरूप बढ़ाया जाना चाहिए।
भारत और ब्राजील की दावेदारी को मिला समर्थन
घोषणा में चीन और रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की भारत और ब्राजील की आकांक्षाओं के प्रति अपना समर्थन दोहराया। दोनों देश लंबे समय से सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की मांग कर रहे हैं।
भारत का तर्क रहा है कि दुनिया की आबादी, अर्थव्यवस्था और वैश्विक राजनीति में बड़ा योगदान देने वाले देशों को संयुक्त राष्ट्र की सबसे महत्वपूर्ण निर्णय लेने वाली संस्था में स्थायी प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
ब्राजील के साथ भारत की दावेदारी को समर्थन मिलने से सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग को ब्रिक्स मंच से नया राजनीतिक बल मिला है।
मोदी ने भी उठाया UNSC सुधार का मुद्दा
ब्रिक्स सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार को अब और टाला नहीं जा सकता। भारत ने प्रतिनिधित्व, जवाबदेही और वैश्विक नियम बनाने की प्रक्रिया में विकासशील देशों की अधिक भागीदारी पर जोर दिया।
मोदी का संदेश साफ था कि यदि वैश्विक व्यवस्था का भविष्य साझा है तो उसके निर्माण में विकासशील देशों की भूमिका भी बराबर होनी चाहिए।
रूस ने भी बढ़े प्रतिनिधित्व की वकालत की
ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के विस्तार की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि परिषद में एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका को अधिक प्रतिनिधित्व दिया जाना चाहिए।
इससे भारत की उस मांग को मजबूती मिलती है कि मौजूदा सुरक्षा परिषद की संरचना को आज की वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप बदला जाए।
चीन का समर्थन क्यों अहम?
भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी के संदर्भ में चीन का समर्थन विशेष महत्व रखता है, क्योंकि चीन सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों में शामिल है। हालांकि भारत और चीन के बीच कई रणनीतिक और सीमा संबंधी मतभेद रहे हैं, लेकिन ब्रिक्स के मंच पर चीन की ओर से भारत की बड़ी भूमिका की आकांक्षा का समर्थन एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक संकेत माना जा रहा है।
ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात भी हुई। दोनों नेताओं ने भारत-चीन संबंधों को व्यापक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से आगे बढ़ाने तथा सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।
सिर्फ सुरक्षा परिषद नहीं, पूरी वैश्विक व्यवस्था में बदलाव की मांग
नई दिल्ली घोषणा का दायरा केवल UNSC सुधार तक सीमित नहीं रहा। ब्रिक्स देशों ने बहुपक्षीय व्यवस्था को मजबूत करने, विकासशील देशों की आवाज को प्रभावी बनाने और वैश्विक संस्थाओं में अधिक समान प्रतिनिधित्व की जरूरत पर जोर दिया।
18वें ब्रिक्स सम्मेलन में अपनाई गई नई दिल्ली घोषणा में आतंकवाद, वैश्विक संघर्ष, व्यापारिक प्रतिबंधों और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर भी साझा रुख सामने आया। घोषणा को सदस्य देशों ने सर्वसम्मति से स्वीकार किया।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह समर्थन?
भारत लंबे समय से सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की दावेदारी करता रहा है। ब्रिक्स जैसे प्रभावशाली समूह के मंच से भारत और ब्राजील की दावेदारी का समर्थन वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार की मांग को मजबूत करता है।



