अजमेर मेयर चुनाव में अनामिका शर्मा बनाम किरण गढ़वाल, 11 निर्दलीयों पर टिकी सत्ता की चाबी

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भाजपा ने अनामिका शर्मा तो कांग्रेस ने किरण गढ़वाल को उतारा, 41 के आंकड़े तक पहुंचने के लिए दोनों दलों को जुटाना होगा अतिरिक्त समर्थन

अजमेर। अजमेर नगर निगम में नई सरकार के गठन को लेकर सियासी तस्वीर अब काफी हद तक साफ हो गई है। मेयर पद के लिए भाजपा ने वार्ड 3 की पार्षद अनामिका शर्मा को मैदान में उतारा है, जबकि कांग्रेस ने वार्ड 57 से निर्वाचित किरण गढ़वाल को अपना प्रत्याशी बनाया है। दोनों प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल कर दिया है।

हालांकि असली मुकाबला केवल भाजपा और कांग्रेस प्रत्याशियों के बीच नहीं है। 80 सदस्यीय अजमेर नगर निगम में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। कांग्रेस 37 वार्डों में जीत के साथ सबसे बड़ा दल है, भाजपा के 32 पार्षद हैं, जबकि 11 निर्दलीय पार्षद निर्णायक स्थिति में हैं। मेयर बनाने के लिए 41 पार्षदों का समर्थन जरूरी है।

अनामिका शर्मा के सामने कांग्रेस की किरण गढ़वाल

भाजपा ने मेयर पद के लिए अनामिका शर्मा के नाम पर दांव लगाया है। शर्मा वार्ड 3 से निर्वाचित हुई हैं और उन्होंने मेयर पद के लिए नामांकन दाखिल किया। नामांकन के बाद भाजपा की ओर से बोर्ड बनाने का दावा भी किया गया है। पूर्व डिप्टी मेयर नीरज जैन ने दावा किया है कि 11 निर्दलीय पार्षद भाजपा के साथ हैं। यह दावा फिलहाल भाजपा की ओर से किया गया राजनीतिक दावा है, जिसका अंतिम परीक्षण चुनाव के दौरान होगा।

कांग्रेस ने अंतिम समय में वार्ड 57 से विजयी किरण गढ़वाल को मेयर पद का प्रत्याशी बनाया। कांग्रेस की ओर से शहर अध्यक्ष राजकुमार जयपाल उन्हें नामांकन कराने पहुंचे।

संख्या का गणित क्या कहता है?

दलपार्षद
कांग्रेस37
भाजपा32
निर्दलीय11
कुल80
बहुमत41

संख्या के हिसाब से कांग्रेस बहुमत से केवल 4 सीट दूर है, जबकि भाजपा को बहुमत के लिए 9 अतिरिक्त समर्थन जुटाना होगा। यही वजह है कि 11 निर्दलीय पार्षदों की भूमिका इस चुनाव में बेहद महत्वपूर्ण हो गई है।

कांग्रेस की रणनीति

कांग्रेस के सामने सबसे बड़ा लक्ष्य अपने 37 पार्षदों को एकजुट रखते हुए कम से कम चार अतिरिक्त पार्षदों का समर्थन सुनिश्चित करना है। कांग्रेस पहले ही पांच निर्दलीय पार्षदों के समर्थन का दावा कर चुकी है और उनके साथ तस्वीरें भी सार्वजनिक की गई हैं। यदि यह समर्थन मतदान तक कायम रहता है तो कांग्रेस के पास बहुमत के आंकड़े से अधिक संख्या हो सकती है। हालांकि अंतिम स्थिति मतदान के समय ही स्पष्ट होगी।

कांग्रेस की रणनीति का दूसरा महत्वपूर्ण हिस्सा पार्षदों की एकजुटता और क्रॉस वोटिंग रोकना रहेगा। बहुमत से चार सीट दूर होने के कारण पार्टी का फोकस निर्दलीयों के साथ समझौते और अपने पार्षदों को एक साथ रखने पर रहेगा।

भाजपा का गणित

भाजपा के पास 32 पार्षद हैं। ऐसे में पार्टी को बहुमत के लिए 9 अतिरिक्त वोटों की आवश्यकता होगी। भाजपा की ओर से पूर्व डिप्टी मेयर नीरज जैन ने सभी 11 निर्दलीयों के समर्थन का दावा किया है। यदि यह दावा मतदान तक सही साबित होता है तो भाजपा का आंकड़ा 43 तक पहुंच सकता है।

भाजपा ने फिलहाल अपने पत्ते काफी हद तक बंद रखे हैं। रिपोर्टों के अनुसार पार्टी ने पार्षदों को मीडिया से दूरी बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में भाजपा की रणनीति का बड़ा हिस्सा निर्दलीय पार्षदों के समर्थन को अंतिम समय तक बनाए रखने और पार्टी के सभी 32 पार्षदों को एकजुट रखने पर केंद्रित दिखाई देता है।

किसकी जीत की संभावना?

इस समय  संख्या के आधार पर कांग्रेस के पास शुरुआती बढ़त है, क्योंकि उसके 37 पार्षद हैं और बहुमत के लिए उसे चार अतिरिक्त वोट चाहिए। दूसरी ओर भाजपा के पास 32 पार्षद हैं, लेकिन भाजपा का दावा है कि सभी 11 निर्दलीय उसके साथ हैं।

इसलिए चुनाव का निर्णायक बिंदु निर्दलीय पार्षदों का वास्तविक मतदान व्यवहार होगा। कांग्रेस का पांच निर्दलीयों के समर्थन का दावा और भाजपा का 11 निर्दलीयों के समर्थन का दावा-दोनों के बीच अंतिम तस्वीर 21 सितंबर को मतदान के बाद ही स्पष्ट होगी।

21 सितंबर को मेयर, 22 को डिप्टी मेयर का चुनाव

अजमेर नगर निगम में मेयर का चुनाव 21 सितंबर 2026 को होगा, जबकि डिप्टी मेयर का चुनाव 22 सितंबर 2026 को प्रस्तावित है। मेयर पद इस बार अनारक्षित महिला के लिए आरक्षित है।

डिप्टी मेयर पद के लिए दोनों दलों की ओर से नाम और अंतिम रणनीति मतदान प्रक्रिया के करीब और स्पष्ट होने की उम्मीद है। मेयर चुनाव के परिणाम का असर अगले दिन होने वाले डिप्टी मेयर चुनाव के समीकरण पर भी पड़ सकता है।

अब नजर 11 निर्दलीयों पर

अजमेर नगर निगम का यह चुनाव इसलिए खास है क्योंकि करीब 35 साल बाद कांग्रेस 37 सीटों के साथ सबसे बड़ा दल बनकर उभरी है, लेकिन बहुमत से चार सीट दूर है। भाजपा 32 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर है। ऐसे में 11 निर्दलीय पार्षद दोनों दलों के बीच सत्ता संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। अब 21 सितंबर को होने वाला मतदान यह तय करेगा कि अजमेर नगर निगम की कमान अनामिका शर्मा के नेतृत्व में भाजपा के हाथ जाती है या किरण गढ़वाल के नेतृत्व में कांग्रेस बोर्ड बनाने में सफल होती है।