वनस्पति विज्ञान विभाग की टीम ने हासिल किया पहला स्थान, पर्यावरण संरक्षण में जनभागीदारी को बताया जरूरी
अजमेर। अंतर्राष्ट्रीय ओजोन परत संरक्षण दिवस के अवसर पर महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय (एमडीएसयू), अजमेर में विद्यार्थियों के बीच पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित की गई। पर्यावरण विज्ञान विभाग की ओर से रिमोट सेंसिंग एवं भूगोल विभाग के संयुक्त सहयोग से आयोजित इस प्रतियोगिता में विभिन्न विभागों की 21 टीमों ने हिस्सा लिया।
प्रतियोगिता में पर्यावरण विज्ञान, रिमोट सेंसिंग, भूगोल, प्राणी विज्ञान, वनस्पति विज्ञान और शिक्षा विभाग के कुल 63 विद्यार्थियों ने भाग लेकर पर्यावरण से जुड़े विषयों पर अपनी जानकारी और समझ का प्रदर्शन किया।
ओजोन परत से लेकर जलवायु परिवर्तन तक सवाल
प्रश्नोत्तरी में ओजोन परत के संरक्षण के साथ जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता, सतत विकास और मौजूदा पर्यावरणीय चुनौतियों से संबंधित प्रश्न पूछे गए। आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों को पर्यावरणीय मुद्दों की वैज्ञानिक समझ देने के साथ उन्हें प्रकृति संरक्षण के प्रति अधिक जागरूक करना रहा।
प्रतियोगिता में वनस्पति विज्ञान विभाग की वंशिका, तनिष्का और नीलम की टीम ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। पर्यावरण विज्ञान विभाग की साक्षी, यशस्वी और तन्मय की टीम दूसरे स्थान पर रही। वहीं रिमोट सेंसिंग विभाग के अंशुल, दीपक और जयदीप ने तीसरा स्थान हासिल किया।
‘ओजोन परत पृथ्वी का प्राकृतिक सुरक्षा कवच’
पर्यावरण विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. सुब्रतो दत्ता ने कहा कि ओजोन परत पृथ्वी के लिए प्राकृतिक सुरक्षा कवच की भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि इसके संरक्षण के लिए केवल वैज्ञानिक प्रयास और सरकारी नीतियां पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग की भागीदारी भी जरूरी है।
उन्होंने विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करते हुए कहा कि पर्यावरणीय समस्याओं का प्रभावी समाधान तभी संभव है, जब आम नागरिक भी अपनी जिम्मेदारी समझें और व्यवहार में पर्यावरण हितैषी बदलाव लाएं।
मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के सकारात्मक परिणाम
पर्यावरण विज्ञान विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. प्रवीण माथुर ने मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल को पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग का महत्वपूर्ण उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि इस वैश्विक पहल के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। उन्होंने युवाओं से पर्यावरण संरक्षण को केवल किसी विशेष दिवस तक सीमित न रखकर दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच विकसित करना जरूरी
प्रतियोगिता के संयोजक एवं संचालनकर्ता डॉ. रौनक चौधरी ने कहा कि पर्यावरण से जुड़े विषयों पर विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना वर्तमान समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि ओजोन संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता और सतत विकास जैसे मुद्दों का सीधा संबंध मानव जीवन और पृथ्वी के भविष्य से है।
अतिथि शिक्षिका निवेदिता शर्मा ने कहा कि पर्यावरण शिक्षा का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को जानकारी देना नहीं, बल्कि उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनाने की दिशा में प्रेरित करना भी है। उन्होंने विद्यार्थियों से पर्यावरण संरक्षण के लिए अपने दैनिक जीवन में छोटे-छोटे व्यावहारिक कदम अपनाने की अपील की।
कार्यक्रम में बताया गया कि विश्वविद्यालय का पर्यावरण विज्ञान विभाग पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता, जलवायु परिवर्तन और सतत विकास जैसे विषयों पर नियमित रूप से शैक्षणिक एवं जागरूकता गतिविधियां आयोजित करता है। रिमोट सेंसिंग विभाग उपग्रह आंकड़ों और भू-स्थानिक तकनीकों के माध्यम से पर्यावरणीय बदलावों के अध्ययन में योगदान दे रहा है। वहीं भूगोल विभाग मानव-पर्यावरण संबंधों और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन से जुड़े विषयों पर अध्ययन एवं जागरूकता गतिविधियां संचालित करता है।
कार्यक्रम में डॉ. फिरोज खान, डॉ. शुभ्रा सिंह, कौशल रूपावत, कोमल नोगिया, मैना थोलिया और धवन कुमार सहित शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी मौजूद रहे। अंत में विजेता टीमों को बधाई दी गई और सभी प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी की सराहना की गई।



