ग्राहम स्टेन्स हत्याकांड : दारा सिंह की सजा में छूट की याचिका खारिज, SC ने चुनौती देने के लिए दिया समय

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नई दिल्ली। वर्ष 1999 के चर्चित ग्राहम स्टेन्स हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट रहे दारा सिंह उर्फ रवींद्र कुमार पाल को फिलहाल जेल से रिहाई नहीं मिलेगी। ओडिशा सरकार ने उसकी सजा में छूट (Remission) और समयपूर्व रिहाई की मांग खारिज कर दी है। राज्य सरकार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि इस संबंध में 31 अगस्त 2026 को आदेश पारित किया जा चुका है।

दारा सिंह ने 1999 में ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टुअर्ट स्टेन्स और उनके दो नाबालिग बेटों फिलिप और टिमोथी की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काटने के बाद समयपूर्व रिहाई की मांग की थी। उसने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में जेल में 25 साल से अधिक समय पूरा करने का भी हवाला दिया था।

सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?

जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ के समक्ष ओडिशा सरकार के वकील ने बताया कि राज्य की Sentence Review Board दारा सिंह की समयपूर्व रिहाई की अर्जी पहले ही खारिज कर चुकी है। अदालत को 31 अगस्त के आदेश की प्रति भी उपलब्ध कराई गई।

सरकार के फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट ने दारा सिंह को इस आदेश को चुनौती देने का रास्ता खुला रखा है। अदालत ने उसके वकील को याचिका में संशोधन करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया और मामले की अगली सुनवाई करीब तीन सप्ताह बाद रखने का निर्देश दिया।

1999 में हुई थी तीन लोगों की हत्या

जनवरी 1999 में ओडिशा के क्योंझर जिले में ग्राहम स्टेन्स और उनके दोनों बेटे एक वाहन में सो रहे थे। वाहन में आग लगा दी गई, जिससे तीनों की मौत हो गई। मामले में दारा सिंह को दोषी ठहराया गया था। उसे निचली अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी, जिसे बाद में उम्रकैद में बदल दिया गया।

25 साल से अधिक जेल में रहने का दिया था हवाला

दारा सिंह की ओर से समयपूर्व रिहाई के लिए यह तर्क दिया गया था कि वह 25 साल से अधिक समय जेल में बिता चुका है। ओडिशा की 2022 की रिमिशन नीति में कुछ श्रेणियों के कैदियों के लिए निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद समयपूर्व रिहाई पर विचार का प्रावधान है। सुप्रीम कोर्ट के मार्च 2026 के एक आदेश में भी राज्य की मौजूदा नीति के इन प्रावधानों का उल्लेख किया गया था।

हालांकि, राज्य की Sentence Review Board ने 31 अगस्त की बैठक में दारा सिंह की समयपूर्व रिहाई की सिफारिश नहीं की। अब दारा सिंह इस निर्णय को कानूनी आधार पर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकता है और अदालत उसकी संशोधित याचिका पर आगे सुनवाई करेगी।