श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़, धार्मिक अनुष्ठानों के साथ मेले में नजर आया राजस्थान का पारंपरिक लोक रंग
ब्यावर। वीर तेजाजी महाराज के प्रति आस्था, राजस्थान की लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक ऐतिहासिक श्री वीर तेजा मेला रविवार को धार्मिक माहौल के बीच विधिवत शुरू हुआ। मेले के शुभारंभ के साथ ही ब्यावर शहर श्रद्धा, भक्ति और लोक संस्कृति के रंगों से सराबोर नजर आया। शहर के साथ आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु मेले में पहुंचे।
ब्यावर का तेजा मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्र की सामाजिक और लोक-सांस्कृतिक पहचान से भी जुड़ा हुआ है। मेले में ग्रामीण और शहरी जीवन की झलक एक साथ देखने को मिलती है। श्रद्धालु वीर तेजाजी महाराज के दर्शन कर पूजा-अर्चना करते हैं और अपनी मनोकामनाओं के साथ मंदिर में ध्वज एवं प्रसाद अर्पित करते हैं। ऐतिहासिक रूप से मेले में राजस्थान के अलावा गुजरात, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालुओं के पहुंचने का उल्लेख मिलता है।
ढोल-नगाड़ों और ध्वजों के साथ पहुंचते हैं श्रद्धालु
तेजा मेले की सबसे खास पहचान यहां दिखाई देने वाली पारंपरिक श्रद्धा है। विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु समूहों में ढोल-नगाड़ों और बैंड की धुनों के साथ वीर तेजाजी के ध्वज लेकर पहुंचते हैं। रंग-बिरंगे ध्वज और पारंपरिक वेशभूषा मेले के वातावरण को विशिष्ट लोक रंग प्रदान करते हैं।
मेले में धार्मिक गतिविधियों के साथ ग्रामीण संस्कृति से जुड़े खान-पान, हस्तशिल्प और मनोरंजन के विभिन्न रंग भी दिखाई देते हैं। झूले, खिलौनों और खान-पान की दुकानों के साथ मेला परिसर में लोगों की चहल-पहल बनी रहती है। ब्यावर के तेजा मेले में ग्रामीण संस्कृति की झलक इसकी पुरानी पहचान रही है।
तीन से चार दिन तक धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन
उपलब्ध 2026 की रिपोर्टों के अनुसार इस वर्ष ब्यावर में श्री वीर तेजाजी मेले का आयोजन 19 से 22 सितंबर तक किया जा रहा है। इस दौरान धार्मिक कार्यक्रमों के साथ सांस्कृतिक गतिविधियां भी आयोजित की जा रही हैं। मेले से जुड़े कार्यक्रमों में श्रद्धालुओं के लिए विभिन्न व्यवस्थाएं की गई हैं। प्रशासन और आयोजन से जुड़े विभागों की ओर से भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा, यातायात और अन्य आवश्यक सुविधाओं पर ध्यान दिया जा रहा है।
ब्यावर की पहचान से जुड़ा है तेजा मेला
ब्यावर का तेजा मेला वर्षों से क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा रहा है। पुराने संदर्भों के अनुसार यहां आयोजित होने वाला यह मेला ग्रामीण जीवन, लोक आस्था और पारंपरिक मेलों की संस्कृति को एक मंच देता है। मेले में श्रद्धालुओं के साथ व्यापारी, स्थानीय कलाकार और ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोग भी बड़ी संख्या में शामिल होते हैं। शुभारंभ के साथ ही ब्यावर में मेले की रौनक बढ़ गई है। आने वाले दिनों में धार्मिक आयोजनों के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों और विभिन्न गतिविधियों में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की उम्मीद है।
आरंभ अवसर क्या क्या हुआ
इससे पहले प्रसन्न गणपति मंदिर में पूजा-अर्चना कर मेले का पहला निमंत्रण भगवान गणेश को दिया गया। कलेक्टर कमल राम मीणा और पुलिस अधीक्षक रतन सिंह सहित प्रशासनिक अधिकारियों ने गणपति मंदिर में यह परंपरा निभाई।
इसके बाद प्रशासनिक दल ढोल-नगाड़ों के साथ वीर तेजाजी के प्रसिद्ध थान पर पहुंचा। वहां वीर तेजाजी महाराज की पूजा-अर्चना की गई। तेजाजी महाराज से ब्यावर की सुख-समृद्धि और मेले के निर्विघ्न आयोजन की कामना की गई।




