समर्पण और सत्य के मार्ग पर चलना ही सच्ची भक्ति : संत एसएस चांवला

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अजमेर। संत निरंकारी मिशन के केंद्रीय प्रचारक एवं प्रचारक विभाग के वाइस चेयरमैन संत एसएस चांवला ने कहा कि समर्पण, प्रेम और निराकार प्रभु के प्रति अटूट विश्वास ही वास्तविक भक्ति का आधार है। ब्रह्मज्ञान की प्राप्ति के बाद जब भक्त का हृदय परमात्मा से जुड़ता है, तभी सच्ची भक्ति का आरंभ होता है। भक्ति केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं, बल्कि प्रत्येक कर्म में ईश्वर को याद रखते हुए जीवन जीने की अवस्था है।

संत एसएस चांवला राजस्थान की प्रचार यात्रा के तहत अजमेर पहुंचे। यहां चामुंडा चौराहा स्थित संत निरंकारी सत्संग भवन परिसर में सुबह 11 से दोपहर 1 बजे तक आयोजित विशाल सत्संग में उन्होंने सद्गुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के संदेश को साझा किया। इस दौरान उन्होंने श्रद्धालुओं को आत्ममंथन, प्रेम और सेवा भाव को जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी।

आत्ममंथन से पहचानें अपनी कमियां

सत्संग को संबोधित करते हुए संत चांवला ने कहा कि आत्ममंथन के माध्यम से व्यक्ति अपनी कमियों और बुराइयों को पहचान सकता है। भक्ति केवल एकतरफा प्रेम नहीं, बल्कि भक्त और भगवान के बीच प्रेमपूर्ण संबंध की अनुभूति है। जब हृदय में परमात्मा के प्रति सच्चा अनुराग उत्पन्न होता है, तो जीवन में सकारात्मक बदलाव आने लगते हैं।

उन्होंने कहा कि निराकार प्रभु परमात्मा ही जीवन का शाश्वत आधार हैं। जब मनुष्य अपने जीवन को परमात्मा के सत्य से जोड़ लेता है, तो उसके विचारों और कर्मों में सहजता तथा सकारात्मकता आने लगती है।

स्वार्थ नहीं, निस्वार्थ भाव से हो भक्ति

संत एसएस चांवला ने कहा कि ईश्वर की स्तुति किसी स्वार्थ या व्यक्तिगत इच्छा की पूर्ति के उद्देश्य से नहीं होनी चाहिए। सच्ची भक्ति वह है, जिसमें व्यक्ति हर पल और प्रत्येक कर्म के दौरान परमात्मा का स्मरण करे। यह भावना धीरे-धीरे उसके स्वभाव और जीवनशैली का हिस्सा बन जानी चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि संतों के जीवन की केवल नकल करने के बजाय उनसे प्रेरणा लेकर अपने आचरण में सुधार करना चाहिए। भक्ति का वास्तविक प्रभाव तभी दिखाई देता है, जब व्यक्ति के व्यवहार में प्रेम, विनम्रता और सद्भाव झलकने लगे।

सेवा और सहयोग से बनें दूसरों की खुशियों का कारण

सत्संग में यह संदेश भी दिया गया कि आध्यात्मिक जीवन का उद्देश्य केवल स्वयं का कल्याण नहीं, बल्कि दूसरों के सुख-दुख में सहभागी बनना भी है। व्यक्ति को अपनी पारिवारिक और सामाजिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए जरूरतमंदों की यथासंभव सहायता करनी चाहिए।

संत निरंकारी मिशन के अनुसार सद्गुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के आशीर्वाद से राजस्थान के विभिन्न शहरों में आयोजित सत्संगों के माध्यम से प्रेम, समर्पण, सेवा और मानवता का संदेश दिया जा रहा है। सत्संग में भी इन्हीं मूल्यों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया गया।