आबूरोड। रेलवे स्टेशन के पास एक युवक फोन पर किसी से गर्ममिजाज में बात करता सुनाई दिया। बात में मूल और ब्याज की बात निकली। दूसरे दिन शाम को भी कुछ ऐसा ही नजारा और माहौल देखने को मिला। इसके पीछे के तथ्य खंगाले तो आबूरोड में ब्याज के उस अवैध व्यापार की जानकारी सामने आई जिसे बिना रजिस्ट्रेशन के करना पूरी तरह से अवैध है। अवैध मनी लेंडिंग का व्यापार आबूरोड में जबरदस्त तेजी से फलने फूलने की जानकारी सामने आई। पुलिस अधीक्षक ने आते ही नशे पर वार करने को लेकर कदम उठाना शुरू कर दिया है। अवैध मनी लेंडिंग पर कार्रवाई जिला कलेक्टर के अधीन है लेकिन, इसे लेकर राजस्व विभाग संजीदा नजर नहीं आ रहा है।
– ब्याज इतना की चैंक जाएंगे
एक सप्ताह तक अलग-अलग सूत्रों के जानकारी जुटाने पर आबूरोड में फैले अवैध मनी लेंडिंग के धंधे की तो हकीकत सामने आई वो चैंकाने वाली है। आबूरोड में साहुकारी का ये धंधा लम्बे अर्से स ेचल रहा है। पीडितों की मानें तो इसमें दस हजार पर तीन महीने के लिए बीस प्रतिशत ब्याज लिया जाता है। यानि इन अवैध साहूकारों से दस हजार रुपये लेंगे तो ये दो हजार काटकर आठ हजार रुपये देंगे। इस दस हजार को इन्हें सौ दिन में हर दिन सौ रुपये के हिसाब से चुकाने होते हैं। स्टेशन और विभिन्न चैराहों पर फोन से इसी उगाही के लिए प्रतिदिन कोई न कोई दिख जाता है। इस हिसाब से प्रतिमाह 5.7 प्रतिशत और सालाना करीब 68 प्रतिशत की दर से ब्याज की वसूली का धंधा यहां पर बेरोक टोक चल रहा है।
– डेढ सौ के लगभग अवैध लेंडर्स
आबूरोड में इस तरह से बेहिसाब ब्याज का धंधा करने वाले करीब डेढ सौ अवैध मनी लेंडर्स शामिल हैं। इनमें हर वर्ग के लोग हैं। ब्याज की असीमित राशि बता रही है कि राजस्थान में इसे लेकर कानून होने के बावजूद इन पर कोई सरकारी नियंत्रण नहीं है। इस व्यापार में जुडे लोगों के इतनी ब्याज दर के पीछे रिस्क फैक्टर की दलील रहती है। इनका मानना है कि पैसे की एवज में कई बार कुछ सिक्योरिटी नहीं रखते और ये राशि अधिकतर असंगठित क्षेत्र के लोगों की दी जाती है इसलिए रिस्क फैक्टर ज्यादा रहता है।
– बिना लाइसेंस ये व्यापार अवैध
भारत में बिना लाइसेंस के ब्याज का व्यवसाय करना पूरी तरह से अवैध है। राजस्थान में इस व्यवसाय को नियंत्रित करने के लिए राजस्थान मनी लेंडिंग एक्ट 1963 अस्तित्व में है। इसके बिना ब्याज पर रकम उधार देना कानूनी रूप से अवैध है। राजस्व विभाग के अधिकारी जिला कलेक्टर, उपखण्ड अधिकारी और तहसीलदार इसके तहत लाइसेंस देने के लिए अधिकृत हैं। यही नहीं यदि किसी शहर या गांव में साहूकारी के अवैध धंधे ने पांव पसार लिया है तो इसकी कार्रवाई करना भी उन्हीं के अधीन है।
– सिद्धार्थ महाजन ने किया था बडा क्रेक डाउन
करीब डेढ दशक पहले सिरोही जिला मुख्यालय पर ये व्यवसाय और मनी लेंडर्स का लोगों को प्रताडित करने का काम बहुत ज्यादा बढ गया था। इसके बाद एक मामला ऐसा आया जिसके समाचार पत्रों में छाने पर तत्कालीन जिला कलेक्टर सिद्धार्थ महाजन ने इसे गंभीरता से लेते हुए एक बडा क्रेक डाउन किया। सिरोही पुलिस उप अधीक्षक उमेश व्यास और सिरोही कोतवाल नारायण सिंह ने अपने मुखबिर तंत्र के साथ मनी लेंडिंग के अवैध व्यवसाय में जुडे लोगों को सूची बद्ध किया। इसके बाद प्रमुख मनी लेंडर्स पर कार्रवाई की।उनके पास से कई खाली चेक बरामद किए। इसके बाल लम्बे अर्से से सिरोही में मनी लेंडर्स के लोगों को डराने धमकाने के मामलेनहीं आए।