
सबगुरु न्यूज-सिरोही/आबूरोड। अगर आप ये सोच रहे हो कि पैसा पड़ा है और सिरोही और आबूरोड में किसी नए प्रोजेक्ट इनवेस्टमेंट कर देवे, तो जरा रुकिए। जमीन हो या दुकान व मकान। अगर 2015 से पहले का हो तो ठीक लेकिन उसके बाद खाली जमीन पर बने हुए हैं तो फिर संभलकर पैसा डालियेगा।
यहां अभी ऐसे कई व्यावसायिक निर्माण और आवासीय कॉलोनियों उभर रही हैं जिनमें ऐसी अवहेलनाएं होने की शिकायत सामने आई हैं जो सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के दिए निर्णयों की जद में आ सकती हैं। कॉलोनाइजर और बिल्डर इन्हें बेचकर निकल देंगे और फिर इन भूखंडों, मकानों और दुकानों को खरीदने वालों पर हमेशा न्यायालय का डंडे का डर सताता रहेगा।
– प्रशासक काल में उड़ी नियमों की धज्जियां
सिरोही नगर परिषद क्षेत्र हो या आबूरोड नगर पालिका और यूआईटी जिस तरह से नियमों को तक में रखकर कॉलोनियां और कॉम्प्लेक्स बनने दिए गए हैं उनको देखकर ये स्पष्ट लग रहा है कि दोनों जगहों के शिकायत बाजों की किसी हरकत से ये मामले न्यायालय के संज्ञान में ये चले गए तो निवेशकों के हाथ कुछ भी नहीं आयेगा। अधिकारी अपना काम कर गए बिल्डर और कॉलोनाइजर इन्हें बेचकर निकल लेंगे पीछे रह जाएंगे पछताने वाले रिटेल इन्वेस्टर।
सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्टों के आदेशों के विपरीत कई कॉलोनी और निर्माण तो ऐसे हैं कि जिनको देखकर स्पष्ट लग रहा है कि कोई समझदार अधिकारी तो इनकी पत्रावलियों पर भी हस्ताक्षर नहीं करेगा। ऐसे में या तो ये निर्माण अवैध हैं या फिर इन प्रोजेक्ट्स को स्वीकृति देने वाले अधिकारी अकर्मण्य। सिरोही और आबूरोड में निवेशकों के पैसे डुबोने वाले ऐसे अधिकांश काम प्रशासक काल में हुए हैं।
– सिरोही नगर परिषद में भी आए थे ऐसे मुद्दे
नियम विरुद्ध कॉलोनियां काटने के ऐसे मामले सिरोही नगर परिषद के नव-निर्वाचित बोर्ड में सामने आए आए थे। लेकिन वहां और आबूरोड में ये अकेले मामले हों ऐसा नहीं हैं। दोनों जगहों पर ऐसी कॉलोनियां और भवन अस्तित्व में आ चुके हैं जो सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार नो कंस्ट्रक्शन लैंड की श्रेणी आते हैं। पार्क, श्मशान, तालाब, बावड़ी, नदी आदि को लेकर जो आदेश सुप्रीम कोर्ट में दिए हुए हैं उनको दरकिनार करके इन आदेशों के बाद भी खाली पड़ी जमीनों पर भवन निर्माण और प्लॉटिंग के दी गई हैं। आबूरोड के एक मामले में तो प्रशासक काल में उपखंड अधिकारी को ऐसे मामले की शिकायत के बाद भी उनके तलहटी नगर पालिका आने के मार्ग में ऐसा निर्माण शुरू हो गया था।
अगर निर्माण सुप्रीम कोर्ट के आदेशों से पहले के हुए होते तो फिर भी कमिटमेंट की श्रेणी में आ जाते। लेकिन, कई ऐसी जगह हैं जहां इनको लेकर सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्टों के द्वारा दिए गए आदेशों के बाद ये काम हुए हैं। ऐसे प्लॉट और भवनों में निवेश करने पर अंतिम निवेशक की पूंजी स्वाहा होने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। यूं सिरोही के निवेशकों का निवेश फंसने से बचाने के लिए तो वहां की नव निर्वाचित सभापति रितु जैन ने जांच होने तक ऐसी संदिग्ध कॉलोनियों के पट्टे और पंजीयन को रोकने के लिए पंजीयन विभाग को पत्र लिखने का प्रस्ताव भी बोर्ड बैठक में प्रस्तुत किया था जिस पर अमल किया जा रहा है।
-बोर्डों पर काबिज होने की भी कोशिश
कॉलोनाइजर्स और बिल्डरों की लॉबी के इस चुनाव में बोर्डो पर काबिज होने के लिए भी एडी चोटी जोर लगा दिया था। सिरोही में तो नगर परिषद कार्मिकों को आदेश निर्देश देने के लिए एक स्वघोषित सभापति बैठा दिया था। आबूरोड में पालिकाध्यक्ष चुनाव वाले दिन के वायरल वीडियोज में पार्षदों को लाने ले जाने वाली गाड़ियों और नगर पालिका के मुख्य द्वार पर ऐसी लॉबी के लोग सक्रिय नजर आए। आबूरोड में कांग्रेस लगातार बोर्ड के इस तरह के लोगों के हाथ में चले जाने का आरोप लगा रही है।

