भारी भीड़ के चलते पदयात्रा छोड़ खुले वाहनों में रामलीला मैदान पहुंचे INDIA गठबंधन के दिग्गज नेता

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नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार को आयोजित INDIA गठबंधन की ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ महारैली में विपक्षी दलों ने अपनी ताकत का प्रदर्शन किया। रैली में उमड़ी भारी भीड़ के कारण विपक्षी नेताओं को निर्धारित पदयात्रा का कार्यक्रम बदलना पड़ा। मिंटो रोड से रामलीला मैदान तक पैदल मार्च करने के बजाय गठबंधन के प्रमुख नेता खुले वाहनों में सवार होकर रैली स्थल पहुंचे। करीब एक किलोमीटर की दूरी तय करने में उन्हें लगभग डेढ़ घंटे का समय लग गया।

जानकारी के अनुसार रैली से पहले कांग्रेस और INDIA गठबंधन के प्रमुख नेताओं का जमावड़ा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास 10 राजाजी मार्ग पर हुआ। यहां से नेता एक साथ रैली स्थल की ओर रवाना हुए। पहले कार्यक्रम के अनुसार नेताओं को मिंटो रोड से रामलीला मैदान तक पदयात्रा करनी थी, लेकिन रास्ते में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और समर्थकों की मौजूदगी के चलते पैदल आगे बढ़ना मुश्किल हो गया। इसके बाद नेताओं को खुले वाहनों में बैठाकर रैली के रूप में रामलीला मैदान तक ले जाने का निर्णय किया गया।

रास्ते भर कार्यकर्ताओं का उत्साह, धीमी रही वाहनों की रफ्तार

मिंटो रोड से रामलीला मैदान तक पहुंचने के दौरान सड़क के दोनों ओर बड़ी संख्या में कांग्रेस और गठबंधन के समर्थक मौजूद रहे। कार्यकर्ता अपने नेताओं के समर्थन में नारेबाजी करते नजर आए। भीड़ के दबाव और रास्ते में समर्थकों की मौजूदगी के कारण वाहनों की रफ्तार काफी धीमी रही। इस वजह से महज एक किलोमीटर का रास्ता तय करने में करीब डेढ़ घंटे का समय लगा।

खुले वाहनों में सवार विपक्षी नेताओं ने कार्यकर्ताओं का अभिवादन किया। इस दौरान रैली का माहौल राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन में बदल गया। गठबंधन के नेताओं की एक साथ मौजूदगी को विपक्षी एकजुटता के संदेश के तौर पर भी देखा गया।

23 दलों के नेताओं की मौजूदगी से एकजुटता का संदेश

‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ महारैली में INDIA गठबंधन के करीब 23 घटक दलों के प्रमुख नेताओं और प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा सहित विभिन्न विपक्षी दलों के नेताओं ने मंच से केंद्र सरकार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।

रैली का मुख्य मुद्दा मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताएं, वोट चोरी के आरोप, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता रहा। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि मतदाताओं के अधिकारों को प्रभावित करने वाली गतिविधियों पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।

सड़क से मंच तक सरकार और चुनाव आयोग पर निशाना

रामलीला मैदान पहुंचने के बाद विपक्षी नेताओं ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा। राहुल गांधी ने वोट चोरी के आरोपों को लेकर कार्रवाई की चेतावनी दी, जबकि मल्लिकार्जुन खरगे ने मोदी सरकार की विदाई नजदीक होने का दावा करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और जांच की मांग उठाई।

महारैली में उमड़ी भीड़ और नेताओं के लंबे काफिले ने राजधानी में राजनीतिक हलचल पैदा कर दी। विपक्षी गठबंधन ने इस आयोजन के जरिए चुनावी निष्पक्षता और मताधिकार के मुद्दे पर अपने साझा अभियान को मजबूती देने की कोशिश की।