जनता की आंखो में धूल झोंकने का गोरखधंधा आबूरोड बजरी लूट

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आबूरोड में बनास नदी वाले रास्ते पर पांडुरी के निकट बनाया झोपड़ी नुमा अस्थाई कैंप।

सबगुरु न्यूज-आबरोड। बिना लीज दिए आबूरोड में बजरी के नाम पर लीज वसूली करने के मामले का खुलासा राजनीतिक मंच से हुआ तो ये आशंका जताई जाने लगी थी कि इसमें राजनीतिक सपरस्ती जरूर होगी। और चकल्लस में जो सामने आया वो वाकई चैंकाने वाला था। ये बजरी राजनीतिक पार्टियों का जनता की आंखो में धूल झोंकने के गोरखधंधे का जीता जागता उदाहरण है। यही वो प्रमुख कारण है जिसकी वजह से आबूरोड में एक राजनीतिक पार्टी के राज में दूसरी राजनीतिक पार्टी जन उत्पीडन के खिलाफ आवाज उठती नहीं नजर आती। उनका जनता के प्रति दर्द तभी उफनता है जब चुनाव निकट आ जाते हैं। बजरी की अवैध लीज वसूली में गठबंधन बता रहा है कि इस तरही की चुप्पी की एक वजह प्राॅफिट शेयरिंग भी है।

– दो किनारे एकसाथ

माना जाता है कि नदी के दो किनारे आपस में कभी नहीं मिलते। लेकिन, सूखी जलधारा वाली खाली नदी में किनारे होते ही नहीं। इन्हीं खाली नदियों से बजरी निकलती है। इसी बजरी के गोरखधंधे में छिपे लाभ की हिस्सेदारी ने राजनीति की दो विपरीत विचारधारओं को भी सुखाकर इनको मिला दिया। कांग्रेस के धरने में बिना लीज दिए अवैध तरीके से आबूरोड में बजरी की लीज वसूलने के गोरखधंधे का खुलासा सार्वजनिक रूप से हुआ।

इसके बाद इसमें राजनीतिक सरपरस्ती के आरोप लगने लगे। राजनीति और निर्माण से जुडे लोगों में आबूरोड से एक पार्टी के तो सिरोही से दूसरी पार्टी के स्वयंभू नायकों की प्राॅफिट शेयरिंग की सुगबुगाहट सामने आने लगी। संभवतः यही कारण है जिसकी वजह से विशेषकर आबूरोड और माउण्ट आबू में आम जनता की समस्याओं को लेकर दोनों राजनीतिक पार्टियों के नेता एक दूसरे की सत्ता में जनता के समर्थन में आवाज उठाते नजर नहीं आते।

– नदियों से आने वाले रास्ते पर अस्थाई झोपडियां

आबूरोड में बजरी का खनन वेस्ट बनास नदी से हो रहा है। लम्बे अर्से से यहां पर खनन लीज नहीं दी हुई है। यहां पर बजरी का प्रमुख स्रोत वेस्ट बनास नदी है। ये बारिश के अलावा सामान्य दिनों में लगभग सूखी रहती है। ऐसे में बडे पुलों के अलावा नदी को पार करने के लिए रपटें भी बनी हुई हैं। कई कच्चे रास्ते भी नदी की तरफ जा रहे हैं। इसी तरह के कच्चे रास्ते पर पांडुरी क्षेत्र में प्लास्टिक की एक झोपडी बनी हुई दिखी। स्थानीय लोगों के अनुसार सूरज ढलने के बाद ये झोपडी बजरी से भरे ट्रेक्टरों से अवैध रूप से लीज वसूलने के काम में आती है। ऐसी झोपडियां कई जगह बनी होने की बात सामने आ रही है।