
आबूरोड। उप जिला चिकित्सालय की जमीन एक्सपायर्ड दवाएं उगल रही है। उप जिला चिकित्सालय ने खुद ये जानकारी दी कि उनके कार्यालय के द्वारा वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 में कोई भी दवा एक्सपायर नहीं हुई है। लेकिन, चिकित्सालय की जमीन ने इस सूचना की सच्चाई उगल दी। एक्सपायर्ड दवाओं के सैंकडों पैकेट मिट्टी से बाहर निकलने लगे हैं। जिस तरह सरकारी रेकर्ड और सरकारी सामान की एंट्री में विरोधाभास दिख रहा है उप जिला चिकित्सालय में दफन की गई इन दवाओं की विस्तृत जांच की जरूरत नजर आती है।

– ढेर में दबी 2024-25 की एक्सपायर्ड दवा
आबूरोड उपजिला चिकित्सालय और नगर पालिका के सुलभ शौचालय के बीच खाली जमीन है। इस खाली जमीन की भुरभुरी मिट्टी से सैंकडों की तादाद में एक्सपायर्ड दवाइयां बाहर निकल रही हैं। मिट्टी से उगली जा रही इन दवाओं के पैके पर 2024 से सितम्बर 2025 के बीच एक्सपायरी डेट लिखी हुई है।
सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि आरटीआई में उप जिला चिकित्सालय के प्रमुख चिकित्सा अधिकारी ने ये जानकारी दी है कि वर्ष 2024-25 और 2025-26 में कोई भी दवा एक्सपायर नहीं हुई है। अतः इन्हें डिस्पोज करने की आवश्यकता नहीं पडी। चिकित्सालय प्रशासन के द्वारा दी गई कागजी सूचना और भौतिक स्थिति में कोई मेल नहीं है। ऐसे में इन दवाओं का डिस्पोजल पूरी तरह से संदिग्ध है।

– सरकारी धन को चूना
चिकित्सालय सूत्रों के अनुसार सुलभ शौचालय और चिकित्सालय के बीच ये मिट्टी का ढेर करीब एक साल से भी पुराना है। लेकिन, 3 जनवरी 2026 को मिट्टी से उगली गई दवाइयों में सितम्बर 2025 में एक्सपायर होने वाली दवाइयां भी मिली हैं। सूत्रों के अनुसार यहां गहरा गडढा था। जिसे दवाइयों से ढककर इस पर मिट्टी डाल दी गई है।
उपजिला चिकित्सालय की सूचना के अनुसार 2024-25 में कोई दवा एक्सपायर नहीं हुई लेकिन, यहां पर सितम्बर 2024 से मार्च 2025 की दवाए भी दबी हुई हैं। वहीं 2025-26 में भी कोई दवा एक्सपायर नहीं होने की सूचना दी है लेकिन, इस मिट्टी के ढेर में सितम्बर 2025 में एक्सपायर होने वाली दवाएं भी हैं। दफन की गई दवाओं का कोई रिकाॅर्ड संधारण नहीं होने की सूचना देना बता रहा है कि चिकित्सालय प्रशासन ने जनता के धन से खरीदी गई लाखों की दवाओं को बर्बाद कर दिया। जो कहीं और किसी दूसरे के काम आ सकती थी।


